आजादी के 70 साल पूरे: भारत-पाकिस्तान बंटवारे की ये 6 बातें जो आपको हैरान कर देगी

नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच बंटवारा हुए आज पूरे 70 साल हो गए हैं। इस बंटवारे के दौरान करोड़ो लोगो विस्थापित हुए थे और कई लोगों दंगों में मारे गए थे। हिंदुस्तान के दो भागों में बंट जाने के बाद अनगिनत कहानियां और किस्से बने। इस स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हम आपको भारत-पाकिस्तान बंटवारे को लेकर उन 6 बातों से रूबरू करा रहे हैं जिसे हर हिंदुस्तानी को जानना जरूरी है।

भारत-पाकिस्तान बंटवारे की ये 6 बातें जो आपको हैरानी कर देगी

बंटवारा: दुनिया का सबसे बड़ा विस्थापन

बंटवारा: दुनिया का सबसे बड़ा विस्थापन

भारत सरकार का अनुमान है कि बंटवारे दौरान करीब 1 करोड़ 50 लाख लोग विस्थापित हुए थे। आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत-पाकिस्तान के इस विभाजन ने मानव इतिहास का सबसे बड़ा विस्थापन बना दिया। दुनिया के इतिहास में इतनी बड़ी तादाद में लोग किसी भी मुल्क में विस्थापित नहीं हुए।

बिना सोचे समझे ही खींच दी रैडक्लिफ रेखा

बिना सोचे समझे ही खींच दी रैडक्लिफ रेखा

भारत-पाकिस्तान की सीमा को रैडक्लिफ कहा जाता है। इस सीमा रेखा को डिजाइन करने का काम ब्रिटिश वकील सिरिल रैडक्लिफ ने किया था। हैरान करने वाली बात यह है कि उस इंसान को भूगौलिक ज्ञान के अलावा कुछ नहीं पता था। रैडक्लिफ ने बिना किसी धर्म, समुदाय और संस्कृति को जाने दो देशों के बीच सीमा खींच दी। आज हिंदू-मुस्लिम तनाव के प्रमुख कारण में से यह रैडक्लिफ रेखा भी है।

माउंटबेटन नहीं चाहते थे कि दोनों मुल्क एक ही दिन आजादी का जश्न मनाए

माउंटबेटन नहीं चाहते थे कि दोनों मुल्क एक ही दिन आजादी का जश्न मनाए

लॉर्ड माउंटबेटन गुलाम भारत के आखिरी वायसराय जनरल थे। माउंटबेटन नहीं चाहते थे कि भारत और पाकिस्तान एक ही दिन आजादी का जश्न मनाए, इसलिए 14 अगस्त को वे पाकिस्तान के स्वतंत्रता समारोह में शामिल हुए और 15 अगस्त को भारत के स्वतंत्रता दिवस समारोह में शिरकत की।

गांधी, ना तो बंटवार में आए और ना ही आजादी के जश्न में

गांधी, ना तो बंटवार में आए और ना ही आजादी के जश्न में

विभाजन के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी दिल्ली में मौजूद नहीं थे। इसके अलावा 15 अगस्त को जब भारत आजादी के जश्न में डूबा था तब गांधी कलकत्ता में सांप्रदायिक दंगों की आग बुझाने में लगे थे। हैरानी की बात यह है कि जिस इंसान ने ब्रिटिश हुकुमत को भारत से बाहर निकालने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई थी, वो ही इतने बड़े समारोह में पहुंच नहीं पाया।

बंटवारे के दौरान कश्मीर असंमजस में पड़ गया था

बंटवारे के दौरान कश्मीर असंमजस में पड़ गया था

बंटवारे के बाद जम्मू कश्मीर राज्य तय नहीं कर पा रहा था कि किस तरफ रुख किया जाए। पाकिस्तान ने सबसे पहले जम्मू कश्मीर पर यह कहकर दांव ठोका कि यह टूकड़ा हमारा है क्योंकि यहां मुस्लिम बहुंसख्यंक है। हालांकि, अक्टूबर 1947 में महाराजा हरि सिंह ने जम्मू-कश्मीर का विलय भारत में कर दिया।

बंटवारा पाकिस्तान के लिए सौगात बन गया

बंटवारा पाकिस्तान के लिए सौगात बन गया

बंटवारे के बाद पाकिस्तान को एक तिहाई भारतीय सेना मिली और कुल छह में से दो महानगर मिले। साथ ही पाकिस्तान के खाते में 40 प्रतिशत इंडियन रेलवे लाइव आई। वहीं, भारत के हाथ में जर्जर अवस्था वाली रेल लाइन आई।

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