INDIA: वो जगहें जो हैं टूरिस्ट्स की नजरों से दूर, कहीं जहरीले पेड़ों वाली चोटी, कहीं न डूबने वाले पत्थर
दार्जिलिंग। दुनिया के 7वें सबसे बड़े देश भारत में हर साल लाखों विदेशी टूरिस्ट्स आते हैं। टूरिस्ट्स के लिए यहां ऐसी बहुत-सी जगहें हैं, जो अलग-अलग वजहों से जानी-पहचानी जाती हैं। कुछ ऐसी खास जगहें भी हैं, जिनके बारे में विदेशी तो दूर, देशी टूरिस्ट्स भी नहीं जानते। ये जगहें काफी टूरिस्ट्स की नजरों से ओझल हैं। यदि आप रोमांचक सफर के प्रेमी हैं, तो हम आपको इन जगहों के बारे में बताएंगे। एक बार इन जगहों पर जाएं और, एडवेंचर का एक्सपीरियंस करें..।

1. संदाकफू (दार्जिलिंग), जहरीले पेड़ों का जंगल:
यह जगह पूर्वोत्तर भारत में पड़ती है। पश्चिम बंगाल के बिल्कुल उत्तरी हिस्से में दार्जिलिंग-सिक्किम रूट पर, संदाकफू का सिंगालीला रेंज ट्रैकिंग के लिए उपयुक्त माना जाता है। यह समुद्र तल से 3,636 मीटर की ऊंचाई पर है। असल में संदाकफू का मतलब जहरीले पेड़-पौधों से है। यहां पहाड़ों की चोटियों पर जहरीले एकोनाइट पेड़ पाए जाते हैं। टूरिस्ट्स इन पेड़ों से बचते हुए ट्रेकिंग करते हैं। ऊंची चोटियों से बादल ऐसे नजर आते हैं, जैसे आप किसी और दुनिया में पहुंच गए हों। और जो पेड़-पौधे हैं..वे भी अलग तरह के हैं। यहां से एवरेस्ट, कंचनजंघा, मकालू और ल्ओत्से की ऊंची चोटियों को देखा जा सकता है। इस जगह को "पैराडाइज ऑफ ट्रैकर्स" के नाम से भी जाना जाता है।

2. पानी पर तैरते पत्थर, धनुषकोटि:
देश के सबसे दक्षिणी राज्य तमिलनाडु में यह जगह घोस्ट टाउन के रूप में चर्चित है। धनुषकोटि, दरअसल श्रीलंका से महज 18 किलोमीटर पहले पड़ता है। जलडमरू मध्य का इलाका है, जिसके दोनों ओर समुद्र है। जो सैटेलाइट इमेज में पगडंडी जैसी भूमि पर स्थित छोटा-सा गांव नजर आता है। यहां रामायणकाल के राम सेतु के अवशेष हैं। यही वजह है, पानी में पत्थर डूबते नहीं हैं। यहां घने जंगल नहीं है, फिर भी सूर्य की रोशनी से प्राकृतिक छटा नजर आती है। यह इलाका बिना आबादी वाला है, जो खाली-खाली सा रहता है। इसलिए इसे घोस्ट टाउन भी कहते हैं।
खबरों के मुताबिक, वर्ष 1964 में आए चक्रवाती तूफान में यहां एक ट्रेन ही बह गई थी। यहां सड़क के एक ओर बंगाल की खाड़ी तो दूसरी और अरब सागर है।

3. देश में बहुत ही ठंडी जगह, द्रास
लद्दाख में मरखा घाटी घूमने वालों की तादाद ज्यादा होगी, लेकिन द्रास घूमने वाले कम ही होंगे। द्रास कारगिल युद्ध के समय चर्चा में आया। हालांकि, यह एक खूबसूरत घाटी है, जो जोजीला पास से शुरू होती है। कुछ लोग इसे गेटवे ऑफ लद्दाख भी कहते हैं, जो जम्मू-कश्मीर के कारगिल जिले में ही स्थित है। द्रास में नदी के किनारे बगीचा भी हैं। यह घाटी समुद्र तल से 10990 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और यहां के पहाड़ों की ऊंचाई 16,000 से 21,000 फीट तक है।
लोगों की नजरों से दूर इस जगह को दुनिया की दूसरी सबसे ठंडी जगह के तौर पर जाना जाता है। यहां सर्दियों में टेंपरेचर -45 डिग्री सेंटीग्रेड तक गिर जाता है।

4. बिना पिलर की इमारत, लखनऊ:
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को नवाबों की नगरी कहा जाता है। हालांकि, यहां की एक जगह लोगों के लिए आज भी रहस्यमयी है। यहां ऐसी इमारत है, जिसमें खंबे नहीं हैं। जो बिना पिलर की इमारत है..उसके बारे में कहा जाता है कि 18वीं शताब्दी में नवाब असफुद्दौला ने यूरोपियन और अरेबियन आर्किटेक्चर को ध्यान में रखकर बनवाई थी। इस इमारत के केंद्र में 50 मीटर लंबा हॉल है। इसमें कोई खंभा और बीम नहीं है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस मेन हॉल को खासतौर पर इंटर लॉकिंग ब्रिक वर्क से बनाया गया है जिसे भूलभुलैया के नाम से जाना जाता है। 1,000 सीढ़ियों से होकर जाने वाला एक गुप्त रास्ता भी है, जिसे किसी मुसीबत से बचने के लिहाज से बनाया गया है। इस इमारत के अलावा यहां का गार्डन भी देखने लायक है। हालांकि, लोग इमारत के रहस्य जानने आते हैं।

5. यहां ठंड-गर्मी दोनों ही ज्यादा:
क्षेत्रफल के लिहाज से देश में राजस्थान सबसे बड़ा राज्य है। यहां किले-महल और झीलें ज्यादा हैं। इसके अलावा यहां पश्चिमी हिस्से में बसा चूरू, एक ऐसा जिला है जो गर्मी और सर्दी, दोनों के लिए मशहूर है। यहां गर्मियों में तापमान 50 डिग्री और सर्दियों में 0 डिग्री तक पहुंच जाता है। ऐसा देश के अन्य हिस्सों में शायद नहीं होता। चुरू की हवेलियां देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। इन हवेलियों खूबसूरती की भी अलग पहचान है। इसके आसपास के इलाके को देश की ओपन आर्ट गैलरी कहा जाता है।

6. यहां रहते हैं शाकाहारी मगरमच्छ
मगरमच्छ पानी में रहने वाले मांसाहारी प्राणी हैं। हालांकि, देश में एक जगह ऐसी भी है, जहां मगरमच्द वेजिटेरियन हैं। लोग इन्हें वेजिटेरियन फूड खिलाते हैं। यह जगह है केरल के कसरगोड़ जिले में स्थित अनंतपुरा लेक मंदिर। जी हां, इस मंदिर के परिसर में बने छोटे से तालाब में ऐसे मगरमच्छ रहते हैं जो वेजिटेरियन की कैटेगरी में शामिल हैं। ये मंदिर 9वीं शताब्दी में बना था। यहां जाने के लिए अनोखे पुल से होकर गुजरना पड़ता है। उत्तर भारत के कम ही लोग इसके बारे में जानते होंगे।












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