'52 प्रतिशत आबादी को मिल रहा सिर्फ 27% आरक्षण', जाति जनगणना पर क्या बोले असदुद्दीन ओवैसी
Asaduddin Owaisi on Caste Census: एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने जाति जनगणना पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जो 42 मांगें रखी गई हैं हम उनका समर्थन करते हैं। इसके साथ ही हम मांग करते हैं कि पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को तुरंत जाति जनगणना करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि ये जो 50 परसेंट का कोटा है, उसे ब्रीच किया जाए। कई महत्वपूर्ण मांगें हैं जिन पर सरकार को तुरंत काम शुरू करना चाहिए। क्योंकि 52 प्रतिशत आबादी को 27 प्रतिशत आरक्षण मिल रहा है। जो आबादी 10 प्रतिशत है उसे 50 प्रतिशत आरक्षण मिल रहा है, जो गलत है। इसे ठीक करने की जरूरत है।

उधर, बिहार की नीतीश सरकार को पटना हाई कोर्ट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट से भी बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बिहार में जाति आधारित गणना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि वह 14 अगस्त को पटना हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसने सर्वे को आगे बढ़ाया था। ऐसे में बिहार में जारी जातीय गणना पर फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की ओर से रोक नहीं लगाई गई है। दरअसल, पटना हाईकोर्ट की तरफ से जातीय गणना पर रोक नहीं लगाए जाने के फैसले बाद सुप्रीम कोर्ट में उसे चुनौती दी गई थी।
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जानिए सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी अदालत में पेश हुए, जहां उन्होंने कहा कि वह जाति आधारित सर्वे पर रोक चाहते हैं, जो बिहार में चल रहा है। इस पर जस्टिस खन्ना ने जवाब देते हुए कहा कि सर्वे को कुछ समय तक चलने दीजिए। इसमें अति-आवश्यकता क्या है। अगर यह 80 फीसदी पूरा हो गया है तो इसे 90 फीसदी तक पहुंचने दीजिए। इसके बाद उन्होंने आगे कहा कि हम इस याचिका पर सोमवार 14 अगस्त को विस्तार से सुनवाई करेंगे।












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