5 कारण जिनकी वजह से मनमोहन सिंह नहीं हुए मन-मोहन
नई दिल्ली। अब से थोड़ी देर पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शनिवार को देश की जनता को आखिरी बार संबोधित किया। पीएम पद छोड़ेते हुए उन्हें क्या महसूस हो रहा होगा इसका अंदाजा हर उस व्यक्ति होगा जो कि रिटायर होता है। आज मनमोहन सिंह ने देश की जनता को धन्यवाद दिया और कहा कि वो शुक्रगुजार हैं क्योंकि 'बंटवारे के कारण बेघर हुए एक बच्चे' को प्रधानमंत्री के ऊंचे पद पर बिठाया जो कि उस बच्चे के लिए गर्व की बात है।
मनमोहन सिंह ने कहा कि ईश्वर के अंतिम निर्णय से पहले, सभी चुने गए प्रतिनिधियों और सरकारों के काम पर जनता की अदालत भी फैसला करती है और आज जनता के इस फैसले का हम सम्मान करते हैं। देश के उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए मनमोहन सिंह ने देश के लोगो से बतौर पीएम विदा ले ली और अब से थोड़ी देर बाद वो राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप देंगे।
गौर करिये ..इस्तीफा.. जिसकी मांग पिछले तीन सालों में विपक्ष ( भाजपा) करीब 300 बार कर चुका था। 10 साल तक देश पर राज करने वाले मनमोहन सिंह भारत के इतिहास में पहले पीएम थे जिन्होंने संसद में खड़े होकर कहा था कि लोग यानी बीजेपी उन्हें खुले आम चोर कहती है।
लगातार आलोचनाओं को झेलने वाले मनमोहन सिंह ने तमाम विरोधों के बावजूद आखिरकार 10 साल सरकार तो चला ही ली लेकिन एक बात और है कि जो कि जनता उनसे पूछना चाहती है कि आखिर उनकी नजर में वो कारण क्या हैं जिनकी वजह से उनकी पार्टी ने भारतीय इतिहास में अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन किया है।
आईये जानते हैं वो 5 कारण जिनकी वजह से मनमोहन सिंह नहीं हुए मन-मोहन

मनमोहन सिंह का मौन
चाहे 2जी घोटाला हो या फिर cwg, चाहे लोकपाल बिल हो या फिर दिल्ली गैंगरेप, हर जगह केवल मनमोहन सिंह चुप ही रहे। देश की पीएम होने के नाते उनसे हर सवाल के जवाब की उम्मीद होती थी लेकिन वो हमेशा चुप रहे।

सोनिया गांधी के हाथ में कमान
देश के हर समय लगा की पीएम की कुर्सी पर मनमोहन सिंह बैठे जरूर हैं लेकिन उनके पास कोई अधिकार ही नहीं है। उनके फैसले सोनिया गांधी लेती हैं, देश के लोगों का भरोसा जिसकी वजह से उनसे उठ गया।

बढ़ती महंगाई
मनमोहन सिंह अर्थशास्त्री कहे जाते थे लेकिन पीएम बनने के बाद उन्होंने देश की बढ़ती महंगाई के लिए कुछ नहीं किया। उनकी सरकार की गलत नीतियों ने गरीब तबके के लोगों की थाली से खाना छिन लिया और वो मौन रहे।

जनता के पति मोहब्बत नहीं
बतौर पीएम मनमोहन सिंह कभी सार्वजनिक स्थलों या रैलियों में जनता से मिलते नहीं देखे गये, वो तभी लोगों के सामने आये जब चुनाव हुए जिसकी आम जनता में उनके प्रति कभी भी अपनापन नहीं दिखा।

किसी वादे को पूरा नहीं किया
साल 2009 के घोषणापत्र में कांग्रेस ने जो वादे किये उन सभी को पूरा ना कर पाने के लिए मनमोहन सिंह ने अपनी कमियों को गिनाने के बजाय विरोधियों को जिम्मेदार ठहराया। जिसकी देश की प्रजा अपने राजा को समझ ही नहीं पायी और मनमोहन सिंह केवल नाम के मन-मोहन बन कर रह गये।












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