क्या E20 Petrol से इंजन खराब हो जाता है? पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने पर सरकार ने दूर किए ये 10 बड़े भ्रम

E20 Ethanol Blended Petrol: अगर आप भी सोशल मीडिया (इंस्टाग्राम, यूट्यूब या एक्स) पर चल रहे उन वीडियो और मैसेज को देखकर परेशान हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने से आपकी गाड़ी का इंजन खराब हो जाएगा या माइलेज आधा हो जाएगा, तो यह खबर आपके लिए है।

अब इन सभी दावों पर केंद्र सरकार ने विस्तार से जवाब दिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने शुक्रवार को 10 अहम बिंदुओं में E20 पेट्रोल से जुड़ी अफवाहों का खंडन किया।

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सरकार का कहना है कि E20 कार्यक्रम वैज्ञानिक शोध, विशेषज्ञों की रिपोर्ट और कई देशों के अनुभव पर आधारित है।

आखिर क्या है E20 पेट्रोल?

E20 पेट्रोल ऐसा ईंधन है जिसमें 20 फीसदी एथेनॉल और 80 फीसदी पेट्रोल मिलाया जाता है। भारत सरकार का उद्देश्य पेट्रोल में एथेनॉल मिलाकर कच्चे तेल के आयात को कम करना, किसानों की आय बढ़ाना और प्रदूषण घटाना है। सरकार के मुताबिक भारत ने दिसंबर 2025 में ही पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य हासिल कर लिया था। यह लक्ष्य तय समय से पहले पूरा हुआ।

1. क्या एथेनॉल से इंजन खराब या जंग लग जाता है?

सरकार का जवाब: बिल्कुल नहीं। सरकार ने साफ किया कि ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), इंडियन ऑयल (IOC) और भारतीय पेट्रोलियम संस्थान के कड़े वैज्ञानिक टेस्ट में यह पाया गया है कि E20 ईंधन से गाड़ी के मेटल (लोहे) या प्लास्टिक के पार्ट्स को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। हाँ, बहुत पुरानी गाड़ियों के कुछ रबर वाले हिस्से (जैसे पाइप) समय से थोड़ा पहले बदलने पड़ सकते हैं, लेकिन इंजन खराब होने का दावा पूरी तरह गलत है।

2. क्या गाड़ी की वारंटी या बीमा (Insurance) खत्म हो जाएगा?

सरकार का जवाब: सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा था कि E20 पेट्रोल डालने से कंपनियां वारंटी देने से मना कर देंगी। सरकार ने ऑटोमोबाइल कंपनियों और इंश्योरेंस कंपनियों के हवाले से साफ किया कि जो गाड़ियां E20 सपोर्ट के लिए बनाई गई हैं, उनके लिए वारंटी या इंश्योरेंस क्लेम कभी भी रद्द नहीं होगा।

3. क्या माइलेज बहुत कम हो जाता है?

सरकार का जवाब: अफवाहों के विपरीत, ARAI ने कारों पर 40,000 किलोमीटर और टू-व्हीलर्स (बाइक/स्कूटर) पर 20,000 किलोमीटर तक का कड़ा ट्रायल रन किया है। इस टेस्ट में पाया गया कि गाड़ी चलाने के अनुभव (Drivability) पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता और माइलेज में बेहद मामूली (न के बराबर) बदलाव आता है। बल्कि, एथेनॉल के हाई ऑक्टेन रेटिंग की वजह से नई गाड़ियों का परफॉर्मेंस और बेहतर होता है।

4. क्या मीठा होने के कारण ईंधन टैंक में चींटियां या कीड़े लग जाते हैं?

सरकार का जवाब: सोशल मीडिया की सबसे मजेदार और अजीब अफवाह यह थी कि चूंकि एथेनॉल गन्ने से बनता है, इसलिए गाड़ी के टैंक में चींटियां और मधुमक्खियां घुस जाती हैं। सरकार ने इस पर कहा कि फैक्ट्रियों में जब एथेनॉल (Fuel-grade ethanol) को साफ किया जाता है, तो उसमें से चीनी या मिठास का एक भी कतरा नहीं बचता।

इसमें कुछ ऐसे केमिकल मिलाए जाते हैं जिससे कीड़े-मकौड़े दूर भागते हैं। वैसे भी, इसमें पेट्रोल की महक इतनी तेज होती है कि कोई कीड़ा आसपास नहीं फटक सकता।

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5. गन्ने का जूस सीधे पेट्रोल में मिलाने वाले वीडियो का सच?

सरकार का जवाब: इंटरनेट पर कुछ ऐसे फर्जी वीडियो वायरल हैं जिनमें दिखाया जा रहा है कि गन्ने का जूस सीधे पेट्रोल में मिलाया जा रहा है। सरकार ने इन्हें पूरी तरह से फर्जी बताया है। गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाला एथेनॉल एक बेहद जटिल औद्योगिक प्रक्रिया से गुजरकर कड़े क्वालिटी मानकों के तहत रिफाइनरी में ब्लेंड किया जाता है।

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6. क्या 1 लीटर एथेनॉल बनाने में 10,000 लीटर पानी बर्बाद होता है?

सरकार का जवाब: यह दावा पूरी तरह गलत है। एथेनॉल बनाने वाली फैक्ट्रियां अब 'जीरो लिक्विड डिस्चार्ज' (ZLD) तकनीक का इस्तेमाल करती हैं, जिससे पानी को बार-बार रीसायकल (साफ करके दोबारा इस्तेमाल) किया जाता है। 1 लीटर एथेनॉल बनाने में केवल 3 से 5 लीटर प्रोसेस्ड वाटर का इस्तेमाल होता है।

इसके अलावा, देश की खाद्य सुरक्षा की जरूरत पूरी होने के बाद जो अतिरिक्त चावल और मक्का बचता है, उसी से एथेनॉल बनाया जा रहा है। मक्के की खेती में धान के मुकाबले बहुत कम पानी लगता है।

7. क्या E20 पेट्रोल केवल एक 'प्रयोग' (Experiment) है?

सरकार का जवाब: बिल्कुल नहीं। अमेरिका, ब्राजील, कनाडा, थाईलैंड, जापान और कई यूरोपीय देशों में पिछले कई दशकों से एथेनॉल मिले हुए पेट्रोल का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट में चल रहा मामला केवल कंपनियों के आपसी कांट्रैक्ट को लेकर था, न कि एथेनॉल के गुण-दोषों पर। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स ने इस खबर को तोड़-मरोड़ कर पेश किया था।

8. क्या एथेनॉल की वजह से पेट्रोल टैंक में पानी घुस जाता है?

सरकार का जवाब: अफवाह थी कि एथेनॉल हवा से नमी सोखकर पेट्रोल टैंक में पानी बना देता है। सरकार ने कहा कि आज की आधुनिक गाड़ियों के फ्यूल टैंक और देश के पेट्रोल पंपों के इंफ्रास्ट्रक्चर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि उसमें बाहर से पानी या नमी अंदर नहीं जा सकती।

9. क्या इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है?

सरकार का जवाब: नहीं, बल्कि यह पर्यावरण के लिए वरदान है। एथेनॉल प्लांट कड़े सरकारी नियमों और पर्यावरण क्लीयरेंस के बाद ही चलते हैं। एथेनॉल ब्लेंडिंग की वजह से भारत ने अब तक 930 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) का उत्सर्जन कम किया है, जिससे प्रदूषण घटा है।

10. एथेनॉल ब्लेंडिंग से देश को क्या फायदा हुआ?

सरकार का जवाब: दिसंबर 2025 में ही भारत ने पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने का अपना ऐतिहासिक लक्ष्य समय से काफी पहले हासिल कर लिया है (साल 2013-14 में यह महज 1.5% था)। इस प्रोग्राम की वजह से:

  • भारत ने कच्चे तेल का आयात कम करके ₹1.9 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा बचाई है।
  • देश के किसानों को सीधे ₹1.6 लाख करोड़ से ज्यादा का भुगतान हुआ है, जिससे उनकी आमदनी बढ़ी है।
  • देश की एथेनॉल उत्पादन क्षमता अब बढ़कर करीब 2,000 करोड़ लीटर तक पहुंच गई है।

इसलिए, अगली बार जब आप पेट्रोल पंप पर जाएं और वहां 'E20' का बोर्ड देखें, तो बिना किसी डर के अपनी गाड़ी में तेल भरवाएं। सोशल मीडिया के झांसे में न आएं, आपकी गाड़ी और देश दोनों सुरक्षित हैं!

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