ISIS से जुड़ी पांच बातें जिनके सामने बेबस हो जाता है भारत
मुंबई। अभी आपने पढ़ा (CLICK ON PREVIOUS) कि कैसे कल्याण के आरीफ मजीद ने महाराष्ट्र के इस एतिहासिक शहर का नाम पूरी दुनिया में खराब कर रखा है। अब पढ़िए कि आरीफ के भारत लौटने के साथ ही साथ सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान उन पांच वजहों पर गया है, जो आईएसआईएस के खिलाफ उनकी लड़ाई को और मुश्किल बना रही हैं।

आईएसआईएस और भिवंडी का कनेक्शन
एनआईए का सारा ध्यान इस समय पूरे महाराष्ट्र के अलावा ठाणे के एक इलाके भिवंडी पर खासतौर पर है। सूत्रों की मानें तो भिवंडी के तीन व्यक्तियों के साथ मजिद संपर्क में था और इन तीनों ने ही मजीद को हर जरूर जानकारी मुहैया कराई।
इस बात का भी अंदेशा है कि इन्होंने मजीद की मदद की और जिनकी वजह से मजीद इराक के करबला पहुंचा। यहीं से फिर मजीद को मोसुल स्थित हिंद कैंप ले जाया गया।
भिवंडी के रहने वाले यह तीनों ही व्यक्ति पिछले एक वर्ष से इस संचालन में लगे हुए हैं। एनआईए का कहना है कि यह तीनों व्यक्ति भारत में आईएसआईएस के लिए लड़ाकों की भर्ती में एक अहम रोल अदा करते आ रहे हैं।
एनआईए की मानें तो भिवंडी के यह तीनों ही व्यक्ति आईएसआईएस में शामिल होने वाले व्यक्तियों को दक्षिण मुंबई स्थित डोंगरी भेजते हैं। यहां एक ट्रैवेल एजेंट से संपर्क किया जाता है। वह सभी जरूरी ट्रैवेल डॉक्यूमेंट्स तैयार कर देता है।
आईएसआईएस और अंसार-उल-तवाहिद
भारत में आईएसआईएस की अंसार-उल-तावहिद नाम से अपने संचालन को अंजाम दे रही है। इस संगठन को इंडियन मुजाहिद्दीन से जुड़ा रहा व्यक्ति सुल्तान अहमद अरमार हेड करता है।
अरमार कर्नाटक भटकल का रहने वाला है। फिलहाल यह सऊदी अरब में रह रहा है और कई सारी ऐसी वेबसाइट्स को चला रहा है जो सिर्फ भारतीयों के लिए ही बनाई गई हैं। अरमार ने आईएसआईएस के साथ ही तहरीक-ए-तालिबान के साथ भी हाथ मिला लिए हैं।
अब अंसार-उल-वाहिद भारत में अल-कायदा का संगठन बन गया है। साथ ही साथ इसके सिमी और जमात-उल-मुजाहिद्दीन बांग्लादेश (जेएमबी) के साथ भी रिश्ते हैं।
इंटेलीजेंस ब्यूरो की ओर से दी गई जानकारी की मानें तो अंसार अब धीरे-धीरे अपने पैर पसार रहा है और फिलहाल वह सिर्फ लोगों की भर्ती पर अपना ध्यान लगाना चाहता है।
उनका एजेंडा सिर्फ एक ही है और वह है ग्लोबल इस्लामिक काउंसिल की स्थापना और भारत का एक बड़ा रोल तय करना। अंसार फिलहाल अफगानिस्तान से नाटो सेना के जाने का इंतजार कर रहा है।
वीजा स्कैम और आईएसआईएस
आरीफ मजीद को जो वीजा दिया गया वह तीर्थयात्रा के लिए था। इराक में जो माहौल इस समय है वहां पर सिर्फ और सिर्फ तीर्थयात्रा की मंजूरी ही लोगों को दी गई है। आईएसआईएस इसका पूरा फायदा उठा रहा है।
वहीं दूसरी ओर हाजा फखरुद्दीन नामक शख्स जो आईएसआईएस के लिए लड़ते हुए सीरिया में मारा गया, उसे भी तमिलनाडु से संगठन में भर्ती दी गई थी। कहीं न कहीं पहली नजर में यह वीजा स्कैम का मामला नजर आता है। हाजा को इंटरनेट के जरिए शिक्षा दी गई थी।
हाजा ने सिंगापुर में एक व्यक्ति से संपर्क किया और उसने हाजा के लिए वर्क परमिट का इंतजाम किया था। हाजा को 15 दिनों के लिए सिंगापुर ले जाया गया और यहां से फिर वह सीरिया में आईएसआईएस के कैंप तक पहुंचा।
इंटरनेट और आईएसआईएस
इंटेलीजेंस ब्यूरों के मुताबिक उसके सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती आईएसआईएस की ऑन लाइन रिक्रूटमेंट प्रोसेस पर लगाम लगाना है। हर 10 दिन में कम से कम 3000 ऐसी साइट्स आती हैं जिनके खिलाफ आईबी को एक्शन लेना होता है।
आईबी के मुताबिक आईएसआईएस इस समय उनके साथ लुका छिपी का खेल खेल रहा है।आईबी जब इन साइट्स को ब्लॉक कर देती है तो आईएसआईएस दो दिनों तक इंतजार करता है और फिर वह उसी कंटेंट के साथ एक नई साइट ऑपरेट करने लगता है।
वाहाबी और ISIS
जहां एक तरफ इंटरनेट के जरिए भारतीय युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है तो वहीं सऊदी अरब से आने वाली वाहाबी छात्र भी हैं। यह छात्र ज्यादातर महाराष्ट्र में रहते हैं जहां पर इनके लिए स्पेशल कैंप्स लगाए जाते हैं।
पूरे देश में इस समय 10, 00,00 युवाओं को इन कैंपों में शिक्षा दी गई है और इनमें से 25,000 छात्र अकेले महाराष्ट्र के हैं जिन्होंने इन कैंपों में शिरकत की। ऐसे में युवाओं पर इनका असर भारी संख्या में है। वाहाबियों की ओर से कैंपों में युवाओं को शरिया लॉ की अहमियत पर खासा जोर दिया जाता है।
आईएसआईएस आज इसी को प्रपोगेट कर रही है। आईबी की मानें तो इन कैंपों ने बड़ी संख्या में युवाओं के दिमाग पर अपना असर डाला है।












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