तीन वर्षों में सेना पर 38 हमले और 156 सैनिकों की शहादत, कब जागेगी मोदी सरकार
जम्मू कश्मीर में एक बार फिर से घुसपैठ का आंकड़ा बढ़ने को तैयार। इस वर्ष फरवरी तक हो चुकी हैं घुसपैठ की 127 कोशिशें तो सेना पर हुए हैं 38 बार हमले।
नई दिल्ली। गुरुवार की तड़के नॉर्थ कश्मीर के कुपवाड़ा में आर्मी कैंप पर हमला हुआ और इस हमले के साथ ही सरकार की पाकिस्तान की नीति पर सवाल उठने लगे हैं। हमले के बाद अंदाजा लगाया है कि इसे जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने अंजाम दिया है। हालांकि अभी इसकी पुष्टि होनी बाकी है। इस हमले में 312 मीडियम रेजीमेंट के 25 वर्ष के कैप्टन आयुष यादव, 155 मीडियम रेजीमेंट के सूबेदार भूप सिंह और 16 मद्रास रेजीमेंट के नायक बीवी रमन्ना शहीद हो गए वहीं पांच जवान घायल हैं।

घुसपैठ की 127 कोशिशें
इस हमले ने एक बार फिर से जम्मू कश्मीर में हो रही घुसपैठ की कोशिशों की ओर ध्यान दिलाया है। रक्षा मंत्रालय के पास जो आंकड़ें मौजूद हैं उनसे इस बात की जानकारी मिलती है कि फरवरी 2017 तक घुसपैठ की 127 कोशिशें हो चुकी हैं इनमें से 88 कोशिशें वर्ष 2016 में की गई। यह आंकड़ें पिछले 15 माह के हैं। इन आंकड़ों इस बात की जानकारी भी मिलती है कि पिछले तीन वर्षों में सेना पर 38 हमले हो चुके हैं। इन हमलों में सेना ने अपने 156 सैनिकों की शहादत दी है। इनमें से ज्यादातर हमले जम्मू कश्मीर में ही हुए हैं। वर्ष 2016 में घुसपैठियों से लड़ते हुए नौ सैनिक शहीद हो गए तो वहीं 40 सैनिक काउंटर इनसर्जेंसी ऑपरेशंस में शहीद हुए। गृह मंत्रालय ने नवंबर 2016 में राज्य सभा को बताया था कि घाटी में करीब 200 सैनिक सक्रिय हैं। ये आंकड़ें उरी आतंकी हमले के बाद मुहैया कराए गए थे जिनमें चार आतंकवादी मारे गए तो वहीं 17 सैनिक शहीद हो गए थे।
गर्मियों में बढ़ने वाली हैं चुनौतियां
अब जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है सेना और ज्यादा हमलों के लिए खुद को तैयार कर रही है। सर्दियों के दौरान घुसपैठ के आंकड़ें में कमी आती है। हालांकि इस दौरान पाकिस्तान घुसपैठियों को तैयार करता है। इससे भी ज्यादा अब इस बात की इंटेलीजेंस है जो इस तरफ इशारा करती है कि पाकिस्तान इन गर्मियों में कश्मीर में बड़े पैमाने पर अशांति फैलान की साजिश कर चुका है। पाकिस्तान यूनाइटेड जेहाद के जरिए कश्मीर में हलचल मचाने को तैयार है। यूनाइटेड जेहाद के तहत लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद एक साथ आ एग हैं। सिर्फ सेना पर हमले उन निर्देशों के तहत हो रहे हैं जो आईएसआई की ओर से दिए गए हैं।












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