सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में पहली बार 3 महिलाओं ने ली जस्टिस पद की शपथ, जानें उनके बारे में
नई दिल्ली, अगस्त 31: सुप्रीम कोर्ट के लिए आज एतिहासिक दिन है। पहली बार एकसाथ 9 जजों ने शपथ ली, जिसमें तीन महिला जज भी शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट में आज से पहले कभी नौ जजों ने एक साथ शपथ नहीं ली थी। इसी के साथ अब सुप्रीम कोर्ट में 4 महिला जज शामिल हैं। जिन तीन महिला जजों ने आज शपथ ली है उनमें जस्टिस हीमा कोहली, बीवी नागरत्ना और बेला एम त्रिवेदी शामिल हैं। कुल 33 जजों में 4 महिला जजों का शामिल होना अपने आप में ऐतिहासिक है। सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में अब तक 11 महिला न्यायाधीश (नई नियुक्तियों सहित) हो चुकी हैं।
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जस्टिस हीमा कोहली
जस्टिस हीमा कोहली को तेलंगाना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस पोस्ट से पदोन्नत किया गया है। इससे पहले वे 2006 में दिल्ली हाईकोर्ट में एडिशनल जज नियुक्त की गई थीं। ठीक एक साल बाद उन्हें परमानेंट जज बना दिया गया था। इस साल जनवरी में उन्हें तेलंगाना हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाया गया था। सुप्रीम कोर्ट में उनका कार्यकाल 2 सितंबर, 2024 तक होगा।
जस्टिस बी वी नागरत्ना
जस्टिस बी वी नागरत्ना ने मंगलवार को शपथ लेते ही कर्नाटक हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट की जज बनते ही एक साथ कई इतिहास रच दिए। जस्टिस बीवी नागरत्ना वरिष्ठता के क्रम में 2027 में देश की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनेंगी। इसी के साथ भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा जब चीफ जस्टिस के पद पर कोई महिला जज आसीन होगी। हालांकि उनका कार्यकाल सिर्फ 36 दिनों का होगा। जस्टिस नागरत्ना के पिता ई एस वेंकटरमैया भी 1989 में चीफ जस्टिस बने थे। इसके साथ ही ये पहली बार होगा कि पिता-पुत्री सुप्रीम कोर्ट के जज बनेंगे।
जस्टिस नागरत्ना ने 1987 में कर्नाटक हाईकोर्ट में वकालत शुरू की थी। इसके बाद 2008 में हाईकोर्ट में जस्टिस बनीं। अब 2021 में सुप्रीम कोर्ट में उन्हें नियुक्त किया गया है।
जस्टिस बेला एम त्रिवेदी
जस्टिस बेला एम त्रिवेदी गुजरात उच्च न्यायालय की पहली महिला न्यायाधीश, जिन्हें उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया है। बेला एम त्रिवेदी 17 फरवरी, 2011 को एक अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में उच्च न्यायालय में पदोन्नत किया गया था। जून 2011 में, उन्हें एक राजस्थान उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में स्थानांतरित किया गया था। फरवरी 2016 में उन्हें वापस गुजरात उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया। 2003 से 2006 तक उन्होंने गुजरात हाईकोर्ट में लॉ सेक्रेटरी के पद पर अपनी सेवाएं दी हैं। सुप्रीम कोर्ट में उनका कार्यकाल 10 जून, 2025 तक रहेगा।












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