लूना-25 के क्रैश के बाद चंद्रयान-3 के सामने 3 चुनौतियां, इंजन फेल होने पर भी करेगा सफल लैंडिंग
रूस और भारत के बीच चंद्रमा की सतह पर पहले पहुंचने की रेस जारी थी, लेकिन इसमें रविवार को अहम मोड़ आया। रूसी स्पेस एजेंसी का स्पेसक्रॉफ्ट लूना-25 लैंडिंग के वक्त क्रैश हो गया। ऐसे में अब दुनियाभर की नजर चंद्रयान-3 पर है, जो लैंडिंग की अंतिम प्रक्रिया में है। उसके सामने अभी तीन अहम चुनौतियां बाकी हैं।

1. स्पीड और दिशा की चुनौती
इसरो के मुताबिक विक्रम लैंडर की लैंडिंग में सबसे अहम चीज यान की दिशा है। इसके बाद यान की स्पीड को कम करने की चुनौती रहेगी। अभी ये करीब 1.68 किमी प्रति सेकंड है, जिसको इंजन की मदद से और कम किया जाएगा। इसको कम से कम 2 मीटर प्रति सेकंड तक लाने की कोशिश है। अगर स्पीड ज्यादा रही, तो चंद्रयान-3 को नुकसान पहुंच सकता है।
2. सही लैंडिंग साइट की पहचान करना
चंद्रयान-2 सॉफ्ट लैंडिंग के वक्त क्रैश हुआ था। ऐसे में चंद्रयान-3 के सामने सही लैंडिंग साइट की पहचान करना बहुत जरूरी है। पिछली बार लैंडिंग साइट को 500 मीटर x 500 मीटर रखा गया था, लेकिन इस बार इसे बढ़ाकर 2.5 किमी x 4 किमी कर दिया गया है, ताकि विक्रम लैंडर को दिक्कत ना हो।
3. कम्यूनिकेशन बनाए रखना
चंद्रयान के विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर के सामने सबसे बड़ी चुनौती इसरो के कंट्रोल सेंटर से संपर्क बनाए रखने की है। लूना-25 का संपर्क आखिरी वक्त में टूट गया था। इसरो के मुताबिक चंद्रायन का प्रोपल्शन मॉड्यूल अच्छे से काम कर रहा। इसके अलावा चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर भी सक्रिय है। वो भी विक्रम के मैसेज को डिकोड कर कमांड सेंटर में भेजेगा।
लूना के क्रैश की वजह क्या?
रूसी स्पेस एजेंसी के मुताबिक लूना-25 एक अप्रत्याशित ऑर्बिट में चला गया था। उसने प्री-लैंडिंग के लिए ऑर्बिट में भेजने के लिए थ्रस्ट जारी किया था, लेकिन तभी ऑटोमैटिक स्टेशन पर इमरजेंसी हालात पैदा हुए। इस वजह से यान क्रैश हो गया।
इंजन फेल होने पर भी करेगा लैंड
इसरो चीफ सोमनाथ के मुताबिक इस बार चंद्रयान को ऐसे डिजाइन किया गया है कि अगर सब कुछ विफल हो जाता है, तो भी वो लैंड करेगा। सेंसर नाकाम हुए या फिर इंजन फेल हो गया, तो भी विक्रम चांद की सतह पर उतरेगा, बस उसकी प्रणोदन प्रणाली (Propulsion System) अच्छी तरह से काम करनी चाहिए।












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