औसत से कम हुई प्री-मानसून की बारिश, 21 राज्यों में सूखे जैसे हालात

नई दिल्ली। चक्रवात फानी शुक्रवार को देश के पूर्वी तट से टकरा गया, जिसके चलते पूर्वी तटीय राज्यों में भारी वर्षा का अनुमान है। वहीं दूसरी ओर इस दौरान होने वाली प्री मानसून बारिश की स्थिति काफी बिगड़ गई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मार्च और अप्रैल के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारत के 21 राज्यों में इस दौरान कम बारिश हुई है, जबकि इनमें से चार राज्यों में औसत से काफी कम बारिश दर्ज की गई है। मार्च से मई के बीच की अवधि को प्री-मानसून सीज़न के रूप में जाना जाता है, यह आमतौर पर जून के पहले सप्ताह तक रहता है।

विदर्भ, मराठवाड़ा, तमिलनाडु, गुजरात, गोवा में इसका बड़ा असर

विदर्भ, मराठवाड़ा, तमिलनाडु, गुजरात, गोवा में इसका बड़ा असर

इस मौसम में आमतौर पर समुद्र में हवा के संचलन और दबाव में बदलाव के कारण बारिश होती है। जो पूरे देश में गर्मी के मौसम में तापमान को कम करने में मदद करती है। यह देश के कुछ हिस्सों में अपर्याप्त पानी के स्तर को स्थिर करने में भी मदद करता है। यही नहीं देश के कई हिस्सों में कृषि के लिए प्री-मानसून की बारिश काफी अहम मानी जाती है। इसका विदर्भ, मराठवाड़ा, तमिलनाडु, गुजरात, गोवा और उत्तर-पूर्व भारत जैसे क्षेत्रों पर बड़ा प्रभाव पड़ा है।

प्री मानसून की बारिश में कमी का सबसे बड़ा असर तमिलनाडु में

प्री मानसून की बारिश में कमी का सबसे बड़ा असर तमिलनाडु में

दूसरी ओर, पूर्वी भारत में इस मौसम में सामान्य से अधिक बारिश हुई है। गंगीय पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड में सामान्य प्री-मॉनसून की बारिश सामान्य से अधिक दर्ज की गई है। और अब यह चक्रवात भारी बारिश लेकर आया है। जिससे कई जगहों पर बाढ़ जैसे हालात बन सकते हैं। प्री मानसून की बारिश में कमी का सबसे बड़ा असर तमिलनाडु और पुडुचेरी में देखने को मिल रहा है। तमिलनाडु में इस मौसम में 59.5 मिमी बारिश का अनुमान लगाया गया था, लेकिन अभी तक केवल 22 मिमी बारिश हुए है। जो सामान्य में 65 फीसदी तक कम है।

चेन्नई में पानी की भारी किल्लत

चेन्नई में पानी की भारी किल्लत

प्री मानसून की बारिश कम होने के कारण तमिलनाडु का सबसे बड़ा शहर और राजधानी चेन्नई भारी जल संकट से गुजर रहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक, तमिलनाडु के प्रमुख जलाशयों का भंडारण घटकर 18% रह गया है और तमिलनाडु जल आपूर्ति और निकासी बोर्ड (टीडब्ल्यूएडी) अगले तीन महीनों तक ही केवल शहर में पानी की आपूर्ति कर सकता है। राज्य को उम्मीद थी कि, चक्रवात फानी के कारण राज्य में पर्याप्त बारिश हो जाएगी, लेकिन फानी तमिलनाडु में बारिश किए बिना ही ओडिशा की ओर मुड़ गया।

इन राज्यों में प्री मानसून की बारिश सबसे कम हुई

इन राज्यों में प्री मानसून की बारिश सबसे कम हुई

इस अवधि में गोवा में भी उम्मीद से 78% कम बारिश हुई है। प्री-मॉनसून में मिज़ोरम में 236.6 मिमी बारिश होने की संभावना थी, लेकिन अभी तर केवल 71.5 मिमी बारिश हुई है जो कि, सामान्य से 70% कम है। जिसके चलते मिजोरम गंभीर सूखे की श्रेणी वाले राज्य में आता है। अगर बात महाराष्ट्र के विदर्भ की करें तो यहां पर 19.6 मिमी बारिश का अनुमान लगाया गया था, जबकि यहां अभी तक 6.5 मिमी ही बारिश हुई है। जो कि सामान्य से 67 फीसदी कम है। जिसके चलते ये इलाका भारी जल संकट का सामना कर रहा है। बात अगर गुजरात के सौराष्ट्र और कच्छ की करें तो यहां पर सामान्य से 77 फीसदी कम बारिश हुई है। भारत में साल दर साल जल संकट गहराता जा रहा है। इस साल भारत में जल उपलब्धता में 26 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है।

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