Elections 2020: नए साल में दिल्ली और बिहार में चुनावी दंगल, क्या पार होगी BJP की नैय्या
नई दिल्ली। साल 2019 का अंत झारखंड के चुनावी समर के साथ हुआ जहां, भारतीय जनता पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। झारखंड विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा-कांग्रेस और राजद के गठबंधन ने बहुमत के साथ सत्ता हासिल की, जबकि रघुवर दास के नेतृत्व में भाजपा दोबारा सत्ता में वापसी करने में विफल रही। वहीं, आगामी साल यानी 2020 की बात करें तो राजनीतिक लिहाज से ये साल भी कई मायनों में महत्वपूर्ण साबित होने वाला है। देश में हर साल अलग-अलग राज्यों में विधानसभा चुनाव होते हैं और इस लिहाज से 2020 भी चुनाव से अछूता नहीं रहेगा। नए साल में देश की राजधानी दिल्ली में विधानसभा चुनाव होंगे तो वहीं, बिहार में भी सियासी संग्राम देखने को मिलेगा। दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी सत्ता में है जबकि बिहार में नीतीश कुमार की पार्टी जदयू और भाजपा के गठबंधन वाली सरकार वर्तमान में सत्ता में है।

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020
बात करते हैं दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 की, जहां इलेक्शन के लिए तारीखों का ऐलान अभी नहीं हुआ है। हालांकि, माना जा रहा है कि जल्द ही दिल्ली में चुनाव की तारीख घोषित हो सकती है। जनवरी के अंत या फरवरी के पहले हफ्ते में दिल्ली में चुनाव हो सकते हैं। 70 विधानसभा सीटों वाली दिल्ली में साल 2015 के चुनाव में आम आदमी पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। तब अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने 67 सीटों पर जीत का परचम लहराया था, तो वहीं भाजपा महज तीनों सीटों पर सिमट कर रह गई थी। ये चुनाव परिणाम कांग्रेस के लिए भी याद ना रखने वाले थे, जहां पार्टी का खाता तक ना खुला था। बीजेपी को पिछले चुनाव में महज तीन सीटों मुस्तफाबाद, रोहिणी और विश्वासनगर विधानसभा पर जीत मिली थी, इसके अलावा 67 सीटों पर अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने कब्जा जमाया था।

फरवरी में हो सकते हैं चुनाव
मत प्रतिशत की बात करें तो आम आदमी पार्टी को 54.3 फीसदी वोट मिले थे जबकि भाजपा को 32.3 फीसदी वोट मिले थे। वहीं, कांग्रेस को 9.7 फीसदी वोट मिले थे। इसके अलावा बसपा को 1.3 फीसदी वोट मिले थे तो इनेलो को 0.6 फीसदी और शिरोमणि अकाली दल 0.5 फीसदी वोट मिले थे। दिल्ली में 0.4 फीसदी मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया था। साल 2020 के चुनाव की बात करें तो अरविंद केजरीवाल अपना रिपोर्ट कार्ड पेश कर चुके हैं और वे दावा कर रहे हैं कि उनकी पार्टी 2015 की तरह ही प्रदर्शन करेगी। जबकि भाजपा विधानसभा चुनावों में वापसी की पूरी कोशिश कर रही है। दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष मनोज तिवारी के नेतृत्व में पार्टी अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी को कड़ी टक्कर देने के लिए रणनीति बनाने में जुटी है। तीसरी प्रमुख पार्टी कांग्रेस भी 2015 चुनाव में मिली हार को पीछे छोड़कर वापसी की कोशिश में जुटी है। दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा के लिए आगामी चुनाव किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होंगे।

बिहार विधानसभा चुनाव 2020
दिल्ली के बाद बिहार में विधानसभा चुनाव होंगे जहां जदयू और बीजेपी के गठबंधन वाली सरकार सत्ता में है। पिछले चुनावों की बात करें तो एनडीए के सामने जदयू-राजद और कांग्रेस ने मिलकर (महागठबंधन) चुनाव लड़ा था। इस चुनाव से पहले, एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम में लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार ने एक होकर चुनाव लड़ने का फैसला किया था। विधानसभा चुनावों में लालू प्रसाद यादव की राजद 80 सीटों पर जीत दर्ज कर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। वहीं, 243 सीटों वाली बिहार विधानसभा में नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने 71 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि भाजपा के खाते में 53 सीटें आई थीं। वहीं, कांग्रेस पार्टी ने 27 सीटों पर कब्जा जमाया था। इसके अलावा आरएलएसपी ने 2 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जो इस वक्त राजद के खेमे में है। वहीं, राम विलास पासवान की पार्टी लोजपा को 2, सीपीआई (एम-एल) को 3 और जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा को एक और 4 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत हुई थी। लेकिन इस महागठबंधन सरकार को 2017 में उस वक्त झटका लगा जब सीएम नीतीश कुमार ने तेजस्वी यादव पर लग रहे आरोपों के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस मौके को बीजेपी ने तुरंत भुनाया और नीतीश कुमार को समर्थन दे दिया। इस्तीफा देने के 24 घंटे के भीतर ही नीतीश कुमार दोबारा मुख्यमंत्री बन चुके थे और बिहार में डेढ़ सालों तक विपक्ष में रही भारतीय जनता पार्टी अब सत्ता में भागीदार बन चुकी थी।

अक्टूबर में हो सकते हैं चुनाव
इसके बाद दोनों दलों ने लोकसभा चुनाव भी मिलकर लड़ा और बिहार में एनडीए ने 39 सीटों पर जीत का परचम लहराया, ये चुनाव राजद के लिए बड़ा झटका साबित हुआ क्योंकि उनकी पार्टी का एक उम्मीदवार भी जीत दर्ज नहीं कर सका। केवल एक सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार ने जीत दर्ज की। आगामी विधानसभा चुनाव की बात करें तो, झारखंड के नतीजों के बाद राज्य में एनडीए के घटक दलों पर सभी की नजरें होंगी। झारखंड में जदयू और लोजपा ने बीजेपी से अलग होकर चुनाव लड़ा, तो बीजेपी की हार के बाद जदयू ने पार्टी पर सहयोगियों को साथ ना लेकर चलने का आरोप भी लगाया। दूसरी तरफ, हाल ही में आए संशोधित नागरिकता कानून और एनआरसी को लेकर जदयू के भीतर ही घमासान मचा है। लोकसभा चुनाव के दौरान सीटों के बंटवारे को लेकर एनडीए के घटक दलों के बीच खींचतान सामने आई थी, नतीजन उपेंद्र कुशवाहा एनडीए से अलग हो गए थे। ऐसे में झारखंड में सत्ता गंवाने वाली बीजेपी बिहार में कोई बड़ा रिस्क लेगी, इसकी उम्मीद कम ही नजर आ रही है। हालांकि, राजनीति में किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। दूसरी तरफ, राजद और कांग्रेस पिछले प्रदर्शन को दोहराने की कोशिश करेंगे। बिहार में विधानसभा चुनाव अक्टूबर के अंत तक हो सकते हैं।

3. राज्यसभा चुनाव
राज्य सभा की रिक्त होने वाली 73 सीटों पर अलग-अलग समय में उपचुनाव होंगे। ये उपचुनाव फरवरी, जून, जुलाई और नवंबर 2020 में संपन्न होंगे। अगले साल महाराष्ट्र (7), ओडिशा (4), तमिलनाडु (6), पश्चिम बंगाल (5), आंध्र प्रदेश (4), असम (3), बिहार (5), छत्तीसगढ़ (2), गुजरात (4), हरियाणा (2) , हिमाचल प्रदेश (1), झारखंड (2) , मध्य प्रदेश (3), मणिपुर (1) , राजस्थान (3), तेलंगाना (2), मेघालय (1), अरुणाचल प्रदेश (1), कर्नाटक (4), मिजोरम (1), उत्तर प्रदेश (10) और उत्तराखंड की एक राज्यसभा सीट के लिए उपचुनाव होंगे। इसके अलावा एक सदस्य मनोनीत किए जाएंगे।












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