2006 Mumbai Train Blasts: मुंबई ब्लास्ट में 180 मरे 700 घायल फिर भी कैसे बच गए सभी 12 आरोपी?
2006 Mumbai Train Blasts: 19 साल... 6,935 दिन... और 180 अधूरी कहानियां। वो चीखें जो 2006 की एक बरसाती शाम को मुंबई की लोकल ट्रेनों में गूंजीं थीं, शायद अब हमेशा के लिए खामोश हो जाएंगी। जख्म भरे नहीं थे, कि इंसाफ की उम्मीद ने मरहम का काम किया... लेकिन 21 जुलाई 2025 को बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले ने जैसे उस उम्मीद को भी दफना दिया।
180 मौतों का जिम्मैदार कौन?
जिस धमाके ने 180 जिंदगियों को चीर दिया और सैकड़ों परिवारों को हमेशा के लिए अधूरा छोड़ दिया, उसी मामले में अब 12 आरोपियों को 'सबूतों के अभाव' में बरी कर दिया गया। कोर्ट ने कहा - 'अभियोजन पूरी तरह विफल रहा।'

जज का फैसला, उन्हें तुरंत रिहा किया जाएगा
एक तरफ जहां 180 परिवार आज भी अपने खोए हुए लोगों का दर्द लिए बैठे हैं, वहीं दूसरी ओर कोर्ट ने 12 आरोपियों को बरी कर दिया। सोमवार को बॉम्बे हाई कोर्ट की पीठ ने कहा कि वह पांच दोषियों को दी गई मृत्युदंड और शेष सात को आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखने से इनकार करती है और उन्हें बरी करती है। कोर्ट ने आगे यह भी कहा कि अगर आरोपी किसी अन्य मामले में दोषी नहीं हैं, तो उन्हें तुरंत जेल से रिहा कर दिया जाएगा।
सबूत की कमी बनी रिहाई कि वजह
न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति श्याम चांडक की विशेष पीठ ने या भी कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा दिए गए सभी सबूत आरोपियों को दोषी ठहराने के काफी सही नहीं हैं। पीठ ने आगे यह भी कहा कि, यह मानना मुश्किल है कि आरोपियों ने अपराध किया है। इसलिए उनकी दोषसिद्धि रद्द की जाती है।'
2015 में एक विशेष अदालत ने सुनाई थी सजा
2015 में महाराष्ट्र कंट्रोल ऑर्फ ऑर्गनाइज्ड क्राइम्स एक्ट (मकोका) की विशेष अदालत ने इस मामले में 12 लोगों को दोषी ठहराया था, जिनमें से पांच को मृत्युदंड और बाकी सात लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। सोमवार को हाईकोर्ट का फैसला सुनाए जाने के बाद राज्य भर की विभिन्न जेलों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किए गए दोषियों ने अपने वकीलों का धन्यवाद किया।
अदालत के इस फैसले पर आप अपनी राय हमें कॉमेंट में बताएं।












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