2000 रुपए के बैंक नोट कहां गए, कब से नहीं हुई छपाई ? सरकार ने दिया पूरा हिसाब

मोदी सरकार ने लोकसभा में बताया है कि 2018-19 से 2000 रुपए के बैंक नोट की छपाई नहीं हुई है। भाजपा के सांसद सुशील मोदी ने राज्यसभा में इसपर पाबंदी की मांग की थी। लेकिन, सरकार ने कहा है इसका प्रचलन कम हो गया है।

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2000 रुपए की करेंसी को लेकर आजकल खूब चर्चा हो रही है। एक तो आम आदमी को यह कहीं भी नजर नहीं आती। दूसरा संसद में इसपर पाबंदी लगाने की मांग की गई है और वह भी सत्ताधारी बीजेपी के ही सांसद की ओर से। आखिरकार सरकार 2000 रुपए के नोट का ब्योरा लेकर आई है और सांसदों को उसके बारे में पूरी जानकारी दी है। सरकार ने जो कुछ कहा है, उससे काफी हद तक स्थिति साफ हो रही है कि इसके दिखाई नहीं पड़ने की क्या वजह हो सकते हैं। हालांकि, इसपर पाबंदी लगाए जाने को लेकर सरकार की ओर से कुछ भी नहीं कहा गया है।

2000 रुपए के बैंक नोट कहां गए ?

2000 रुपए के बैंक नोट कहां गए ?

राज्यसभा में भाजपा सांसद सुशील कुमार मोदी ने सोमवार को 2000 रुपए वाले नोट बैन करने की मांग की है। उनका कहना था कि सरकार को चरणबद्ध तरीके से 2000 रुपए वाली करेंसी नोट प्रचलन से हटा लेना चाहिए। मोदी ने यह मुद्दा ऐसे समय में उठाया है, जब आमतौर पर 2000 रुपए नोट प्रचलन में नहीं दिख रहे हैं। ना ही एटीएम से निकलते दिख रहे हैं और ना ही बाजारों में ही नजर आता है। यूं समझ लीजिए कि सबसे बड़े नोट के दर्शन बहुत ही दुर्लभ हो चुके हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आखिर ये नोट गए कहां? क्या इसकी छपाई ही बंद हो चुकी है? या फिर रिजर्व बैंक ने पहले ही धीरे-धीरे उसका प्रचलन बंद करना शरू कर दिया है ?

मार्च 2022 में सिर्फ 13.8% प्रचलन में थे 2000 रुपए वाले नोट

मार्च 2022 में सिर्फ 13.8% प्रचलन में थे 2000 रुपए वाले नोट

केंद्र सरकार ने सोमवार (12 दिसंबर, 2022) को एक प्रश्न के जवाब में लोकसभा में बताया है कि 2018-19 से 2000 रुपए वाले नोटों की छपाई नहीं हुई है। इसकी वजह से 2020 में जो 2000 के नोटों की संख्या कुल नोटों के मुकाबले 22.65% थी, वह मार्च 2022 में घटकर सिर्फ 13.8% रह गई है। इसके ठीक उलट 500 रुपए के जो नोट 2020 में 29.7% प्रचलन में थे, वह 2022 में बढ़कर 73.3% पहंच गए।

2000 रुपए के नोट की कब से नहीं हुई छपाई ?

2000 रुपए के नोट की कब से नहीं हुई छपाई ?

केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने संसद में कहा कि 'विशेष मूल्यवर्ग के बैंकनोंटो की छपाई का फैसला भारत सरकार भारतीय रिजर्व बैंक की सलाह से करती है ताकि पब्लिक की आवश्यकतानुसार मिले-जुले मूल्यवर्ग के नोटों की वांछित संख्या बरकरार रहे। 2018-19 के बाद से 2000 रुपए मूल्यवर्ग के नोटों की छपाई के लिए प्रेस को नहीं कहा गया है। इसके साथ ही मैले/विकृत होने के बाद बैंकनोट सर्कुलेशन से बाहर हो जाते हैं।'

कई चीजों पर निर्भर नोटों की छपाई

कई चीजों पर निर्भर नोटों की छपाई

केंद्रीय मंत्री ने संसद को बताया कि 'करेंसी की डिमांड कई तरह के मैक्रो-इकोनॉमिक फैक्टर पर निर्भर करते हैं, जिसमें आर्थिक विकास और ब्याज दर का स्तर भी शामिल है। डिजिटल ट्रांजैक्शन में बढ़ोतरी से भी करेंसी की आवश्यकता प्रभावित होती है।' केंद्रीय मंत्री ने यह भी जानकारी उपलब्ध कराई कि रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक 31 मार्च, 2022 तक 2000 रुपए के 21,420 लाख मुद्रा प्रचलन में थे।

इस वजह से 2000 के नोट बैन की मांग की गई है

इस वजह से 2000 के नोट बैन की मांग की गई है

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और भाजपा से राज्यसभा सांसद सुशील मोदी ने राज्यसभा में शून्य काल में 2000 रुपए के नोट पर प्रतिबंध लगाने की मांग के बाद न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा था कि ऐसी सूचनाएं हैं कि लोगों ने 2000 रुपए के नोट जमा कर रखे हैं और उसका इस्तेमाल 'आतंकी फंडिंग, ड्रग ट्रैफिकिंग और कालाधन जमा करने' के लिए किया जा रहा है। मोदी ने अमेरिका, चीन और जर्मनी का हवाला देकर कहा था कि वहां 100 से ऊपर के नोट नहीं होते। इसलिए केंद्र सरकार को इसपर प्रतिबंध लगाने का विचार करना चाहिए। उन्होंने इसे चरणबद्ध तरीके से बंद करने का सुझाव दिया है, ताकि लोगों को उसे बदलने के लिए पर्याप्त समय मिले।

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