केरल में धार्मिक कारणों के चलते 2300 टीचर्स ने नहीं लगवाई कोरोना वैक्सीन
तिरुवनंतपुरम, 02नवंबर: देशभर में कोरोना वायरस के खिलाफ वैक्सीनेशन चल रहा है। लेकिन कुछ जगहों पर लोग भ्रम के चलते वैक्सीन लेने से इनकार कर रहे हैं। ऐसी ही एक चौंकाने वाली खबर केरल से सामने आई है। केरल में 2,300 शिक्षकों और 300 गैर-शिक्षण कर्मचारियों ने धार्मिक कारणों का हवाला देते हुए वैक्सीन लेने से इनकार कर दिया है। वहीं सरकार द्वारा भी इन्हें छूट देने पर विवाद खड़ा हो गया है।

कुछ समूह ने चिकित्सा आधार का हवाला देते हुए वैक्सीन से दूरी बना रखी है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बहाने ज्यादातर अस्थिर होते हैं और विज्ञान की भावना के खिलाफ होते हैं। केरल सरकार ने वैक्सीन ना लेने वाले शिक्षकों को छूट दी है। सरकार ने कहा कि उन्हें पहले दो सप्ताह तक स्कूल नहीं आना चाहिए और कुछ समय के लिए ऑनलाइन कक्षाएं जारी रखनी चाहिए। जिसके चलते वे घर पर ही रहे हैं।
केरल में ये घटना ऐसे समय सामने आई है जब अन्य राज्यों और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में धार्मिक समूहों ने अनुयायियों को टीका लेने के लिए कहा है। अमेरिका, इजराइल, रूस, इंडोनेशिया, सऊदी अरब, मिस्र, यूएई आदि में प्रमुख धार्मिक परंपराओं, संप्रदायों और संस्थानों द्वारा टीकाकरण का विरोध झेलना पड़ा था। लेकिन अब उन संप्रदायों और संगठनों ने लोगों को वैक्सीन लेने की सलाह दी है।
छद्म विज्ञान के खिलाफ अभियान चलाने वाले डॉ नंदकुमार नायर ने कहा कि, किसी भी धर्म ने आधिकारिक तौर पर टीकाकरण का विरोध नहीं किया है। इसका निरीक्षण किया गया और उन जगहों पर सफाई दी गई जहां टीके की सामग्री पर संदेह था। इसलिए हम स्वीकार नहीं कर सकते जब लोग कहते हैं कि उनकी अनिच्छा धार्मिक आधार पर थी। यह धर्म के साथ कुछ करने की तुलना में व्यक्तिगत विश्वास से अधिक है।
इससे पहले केरल सरकार ने अपनी गाइडलाइन में छात्रों के आसपास के सभी लोगों के लिए टीकाकरण सुनिश्चित करने के लिए कहा था। जिसमें माता-पिता, शिक्षक, गैर-शिक्षण कर्मचारी और बस चालक शामिल थे।












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