रॉ से लेकर IB तक हर जगह 1984 के बैच के ही IPS अफसरों को बड़ी जिम्मेदारी
नई दिल्ली। पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से दो सुरक्षा एजेंसियों के अहम पदों पर बड़ी नियुक्तियों का ऐलान किया गया है। इनमें इंटेलीजेंस एजेंसी रॉ और इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) के नए मुखिया का नाम अहम है। आपको जानकर हैरानी होगी कि दो नए नामों के ऐलान के साथ ही देश की बड़ी सुरक्षा एजेंसियों की कमान 1984 बैच के आईपीएस ऑफिसर्स के हाथो में आ गई है। अब इस बैच को 'लकी बैच' कहा जा रहा है।

एक साथ सबने ली ट्रेनिंग
पहला मौका है जब बैच के 16 में से 10 ऑफिसर को केंद्र सरकार की तरफ से जिम्मेदारियां सौपी गई हैं। इन सभी ऑफिसर्स ने एक साथ हैदराबाद स्थित नेशनल पुलिस एकेडमी में ट्रेनिंग ली है। पीएम मोदी कैबिनेट की नियुक्ति समिति के चेयरमैन हैं और उनकी तरफ से ही सुरक्षा एजेंसियों के मुखिया के नाम को मंजूरी दी जाती है। उन्होंने समंत गोयल को देश की इंटेलीजेंस एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) का मुखिया नियुक्त किया। साथ ही अरविंद कुमार को इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) की जिम्मेदारी दी गई है।

गोयल और अरविंद की नई एंट्री
समंत और अरविंद दोनों ही 1984 बैच के आईपीएस ऑफिसर हैं। इन दोनों की नियुक्ति की खबरों को पाकिस्तान की मीडिया ने भी अहम जगह दी। समंत ने बालाकोट एयर स्ट्राइक की प्लानिंग बड़ा रोल अदा किया था। समंत गोयल पंजाब कैडर के आईपीएस हैं तो अरविंद कुमार असम-मेघायल कैडर से आते हैं। रॉ के चीफ के तौर पर नियुक्त होने से पहले समंत गोयल दूसरे देशों से जुड़ी इंटेलीजेंस से जुड़ी एजेंसी के संचालन को संभाल रहे थे।

और कौन-कौन सुरक्षा एजेंसियों का मुखिया
गोयल और अरविंद कुमार के अलावा बीएसएफ के मुखिया रजनीकांत मिश्रा, एनआईए के मुखिया योगेश चंदर मोदी, आईटीबीपी के चीफ एसएस देसवाल, नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (एनएसजी) के चीफ सुदीप लखटकिया, सीआईएसएफ चीफ राजेश रंजन, गृह मंत्रालय में आतंरिक सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले विशेष सचिव आनंद प्रकाश माहेश्वरी, ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (बीएससीएस) के डायरेक्टर राकेश अस्थाना और जावेद अहमद जो इस समय नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिमिनोलॉजी एंड फॉरेंसिक साइंस के डायरेक्टर हैं, 1984 बैच के आईपीएस ऑफिसर्स हैं।

कई राज्यों में पुलिस डिपार्टमेंट की जिम्मेदारी
इसी बैच के एक ऑफिसर की मानें तो उनके बैचमेट्स न सिर्फ आज देश की टॉप सिक्योरिटी एजेंसीज का जिम्मा संभाल रहे हैं बल्कि कई तो कुछ राज्यों जैसे जम्मू कश्मीर, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, असम, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश बिहार और आंध्र प्रदेश बतौर डीजीपी पुलिस फोर्स को लीड कर रहे हैं। इन ऑफिसर की मानें तो कई मायनों में उनका बैच काफी खास और अनोखा है। साथ ही इतने ऑफिसर्स का बड़ी सुरक्षा एजेंसियों को लीड करना अपने आप में एक आश्चर्यजनक बात है। वहीं एक और ऑफिसर की मानें तो 10 ऑफिसर्स का एक साथ सुरक्षा एजेंसियों को लीड करना महज एक संयोग है।












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