इंटरनेट वाले प्यार के चक्कर में 16 साल की लड़की सात समंदर पार से भागकर भारत आ गई, जानिए आगे
मुंबई, 12 दिसंबर: स्वीडन की एक नाबालिग लड़की पिछले करीब दो साल से मुंबई के एक युवक के संपर्क में थी। एक दिन उसे क्या सूझा कि उसने अपनी स्कॉलरशिप के पैसों से मुंबई का एयर टिकट खरीदा और उसके घर पर पहुंच गई। किसी विदेशी लड़की को इस तरह से अचानक अपने घर आया देख, लड़के के माता-पिता का माथा ठनक गया। लड़की उन्हीं के घर पर रहना चाहती थी। लेकिन, लड़के के परिवार वालों को यह मंजूर नहीं था। खैर, बाद में किसी तरह से बगल में ही एक फ्लैट में उसे ठहराने का इंतजाम हुआ। उधर लड़की के माता-पिता स्वीडन में उसे तलाशने में जुटे थे। जल्दी उन्हें पता चल गया कि वह तो भारत पहुंच चुकी है और फिर इंटरपोल को अलर्ट कर दिया गया। आखिरकार करीब 15 दिनों बाद लड़की के पिता स्वीडन से भारत पहुंचे और अपनी बेटी को सकुशल वापस लेकर लौट गए।

स्वीडिश लड़की के लिए इंटरपोल ने जारी किया था येलो अलर्ट
16 साल की एक नाबालिग लड़की स्वीडन से टूरिस्ट वीजा पर भागकर भारत चली आई और उसके माता-पिता, उसको लेकर परेशान होते रहे। वह लड़की सोशल मीडिया पर 19 साल के एक भारतीय लड़के की दोस्त बन गई थी और उसी से मिलने के लिए बिना किसी को बताए मुंबई आई थी। वह उसी लड़के के साथ रहना चाहती थी। उसे पुलिस ने ट्रॉम्बे के चीता कैंप से बरामद किया है। 19 साल के जिस लड़के से मिलने वह सात समंदर पार से भारत आई, वह इंजीनियरिंग का छात्र है। उस लड़की के लिए पिछले 4 दिसंबर को इंटरपोल ने अपनी नोडल एजेंसी सीबीआई के जरिए येलो नोटिस जारी किया था। येलो नोटिस तब जारी किया जाता है, जब किसी व्यक्ति की गुमशुदगी के संबंध में ग्लोबल अलर्ट जारी करना हो।

इंस्टाग्राम के दोस्त से मिलने स्वीडन से मुंबई आई थी
येलो नोटिस का मतलब है कि किसी व्यक्ति का या तो अपहण हो गया है और या उसके गायब होने की कोई वजह पता ना हो। मुंबई पुलिस के मुताबिक जब स्वीडन में उसके माता-पिता ने काफी तलाश के बाद उसका सोशल मीडिया अकाउंट चेक किया तो उन्हें शक हुआ कि उनकी बेटी हो सकता है कि भारत चली गई हो। दरअसल, उनकी बेटी लंबे वक्त से इंस्टाग्राम पर एक लड़के की दोस्त थी और एक महीने की टूरिस्ट वीजा पर स्वीडन से मुंबई उससे मिलने के लिए पहुंच गई थी। अधिकारियों ने बताया है कि वह 27 नवंबर को मुंबई आई और अपने इंटरनेट वाले दोस्त के साथ ही रहने की इच्छा जाहिर करने लगी, लेकिन लड़के के परिवार वालों ने इसकी अनुमति नहीं दी। उन्होंने उसके एक महिला रिश्तेदार के साथ ट्रॉम्बे के अलग फ्लैट में रख दिया।

तकनीक की सहायता से लड़की का पता चला
जिस दिन वह किशोरी स्वीडन के अपने घर से गायब हुई थी, उसी दिन उसकी गुमशदगी की शिकायत स्थानीय अधिकारियों में रिपोर्ट कर दी गई थी। जिसने बाद में जाकर इस मामले को सुलझाने के लिए इंटरपोल की मदद मांगी। तब इंटरपोल ने सीबीआई के जरिए मुंबई पुलिस से संपर्क किया। इसके बाद यह केस मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच के इंटरपोल लाइजनिंग ऑफिसर के हवाले कर दिया गया। उसके बाद इंटरपोल और मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच यूनिट 6 उस स्वीडिश लड़की की तलाश में जुटी। डिप्टी पुलिस कमिश्नर नीलोत्पल ने कहा है, 'तकनीक की मदद से हमने लड़की का पता लगा लिया और उसके परिवार वालों को सौंप दिया है।'

भारतीय मूल के हैं स्वीडिश लड़की के माता-पिता
मुंबई पुलिस के मुताबिक लड़की के पिता को जब सूचना दी गई तो वह पहले वहां से दिल्ली पहुंचे और फिर मुंबई आए। इसके बाद उनकी नाबालिग बेटी को उन्हें सौंप दिया गया। पिछले शुक्रवार को ही वह लड़की अपने पिता के साथ वापस स्वीडन लौट चुकी। वैसे जब मुंबई पुलिस ने उसे बरामद कर लिया था तो उसके बाद में उसे डोंगरी के चिल्ड्रन वेलफेयर होम में शिफ्ट कर दिया गया था और वहीं से उसके पिता को उसकी कस्टडी दी गई। उन्होंने इंजीनियरिंग के उस छात्र के खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाया है, जिससे मिलने के लिए उनकी बेटी ने इतना बड़ा कदम उठा लिया था। लड़की के माता-पिता भारतीय मूल के हैं। लड़की स्वीडन की नागरिक है और पिछले साल जनवरी से ही उस इंजीनियरिंग छात्र से लगातार सोशल मीडिया के जरिए संपर्क में रही है।

पिता को देखकर बहुत खुश थी लड़की
वह लड़की स्वीडन में अभी कॉलेज की स्टूडेंट है और उसे जो स्कॉलरशिप वहां मिलती है, उसी से उसने मुंबई का एयर टिकट खरीदा था। लड़की को उसके पिता को सौंपने से पहले चिल्ड्रन वेलफेयर होम में उसकी काउंसलिंग भी की गई है। जानकारों के मुताबिक जब उसने अपने पिता को देखा तो वह बहुत ही खुश हो गई थी। क्योंकि, उसे पता चल गया था कि उससे बड़ी गलती हुई है। जाते-जाते उसके पिता ने मुंबई पुलिस और क्राइम ब्रांच को शुक्रिया कहा है। (पहली तस्वीर में धुंधली तस्वीर सौजन्य सोशल मीडिया के आलावा सारी सांकेतिक)












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