दागी सांसद विधायकों के खिलाफ केंद्र का बड़ा फैसला, 12 विशेष अदालतें बनाएगी सरकार
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नई दिल्ली। दागी जनप्रतिनिधियों (सांसद और विधायकों) पर चल रह आपराधिक मामलों के निपटारे के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने इन सभी मामलों को निपटाने के लिए एक साल तक 12 विशेष अदालत चलाने की सहमति दी है। इन विशेष अदालतों में करीब 1571 आपराधिक मामलों की सुनवाई होगी। ये मामले 2014 तक सभी नेताओं की ओर से दायर किए गए हलफनामे के आधार पर हैं।

7.8 करोड़ रुपए आवंटित
सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए आदेश के मुताबिक 1 साल के भीतर सारे मामले निपटा दिए जाएं। सरकार ने आज सुप्रीम कोर्ट से कहा कि इसके लिए 7.8 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

अदालत ने कहा था...
2014 तक पूरे देश में सांसदों के खिलाफ लंबित 1500 से अधिक मामलों के साथ अदालत ने केंद्र से विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों के लिए एक योजना तैयार करने और मामलों के त्वरित निपटान के लिए धन की व्यवस्था करने को कहा था।

भाजपा नेता ने दायर की है याचिका
शीर्ष अदालत ने एक वकील और भाजपा के एक सदस्य अश्विनी कुमार उपाध्याय से याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसने मौजूदा व्यवस्था के खिलाफ भी तर्क दिया है कि छह साल के लिए ही नहीं बल्कि आजीवन चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता है।

केंद्र ने मांगा और समय
अंतिम सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने केंद्र से 2014 से 1,581 सांसदों और विधायको के खिलाफ दर्ज मामलों की स्थिति के बारे में अपडेट करने के लिए भी कहा था। न्यायाधीशों ने पूछा था कि कितने मामलों का निपटारा एक वर्ष के भीतर किया गया था और कितने सजा में या बरी किए गए या फिर मामला समाप्त हो गया था। अपने शपथ पत्र में, केंद्र ने कहा कि इस पर डेटा एकत्र करने के लिए अधिक समय की आवश्यकता है।

13,500 मुकदमे दर्ज
2014 के आंकड़ों के अनुसार देश भर में 1,581 सांसदों और विधायकों पर संगीन अपराधों में 13,500 मुकदमे दर्ज हैं तीन साल बाद इस आंकड़े के और बढ़ने की उम्मीद है।












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