जानिए कैसे अटैक हेलीकॉप्टर एएच-64 बन गया 'अपाचे'
बैंगलोर। भारत और अमेरिका के बीच 22 अपाचे डील को मंजूरी मिल गई है। इंडियन एयरफोर्स के जाबांज अब इस अटैक हेलीकॉप्टर की मदद से दुश्मन पर निशाना साधेंगे।
क्या आप जानते हैं कि प्रिंस हैरी इस हेलीकॉप्टर को उड़ा चुके हैं। जिस समय प्रिंस हैरी अफगानिस्तान में डेप्लॉयड थे, उस समय वह इसी हेलीकॉप्टर के पायलट थे। प्रिंस हैरी की मानें तो दुश्मनों में दहशत पैदा करने के लिए इस हेलीकॉप्टर का सिर्फ नाम ही काफी है।
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इससे अलग अपाचे की कुछ ऐसी बातें भी हैं जो इसे बाकी हेलीकॉप्टरों से अलग खड़ा करती हैं। एक नजर डालिए इस हेलीकॉप्टर से जुड़ी कुछ ऐसी ही बातों पर।

चार ब्लेड वाला अपाचे
बोइंग का अपाचे चार ब्लेड वाला और ट्विन इंजन वाला हेलीकॉप्टर है। इसके कॉकपिट में दो लोगों के क्रू की जगह है।

1975 में पहली उड़ान
अपाचे को अमेरिकी सेना के एडवांस्ड अटैक हेलीकॉप्टर प्रोग्राम के लिए डेवलप किया गया था। उस समय अमेरिकी सेना एएच-1 कोबरा हेलीकॉप्टर को प्रयोग करती थी। अपाचे ने पहली उड़ान 30 सितंबर 1975 को भरी थी।

1981 में एएच-64 बना अपाचे
अपाचे को 1981 तक एएच-64 नाम से जाना जाता था। इसे 1981 के अंत में अपाचे नाम दिया गया। अमेरिकी सेना में उस समय अपने हेलीकॉप्टरों का नाम अमेरिकी भारतीय जनजातीय नामों पर रखती थी।

अमेरिकी सेना का हिस्सा
अप्रैल 1986 में अपाचे को अमेरिकी सेना में शामिल किया गया।

रात में दुश्मन न करे कोई हिमाकत
अपाचे में फिट सेंसर की मदद से यह अपने दुश्मनों को आसानी से तलाश कर उन्हें खत्म कर सकता है। साथ ही इसमें नाइट विजन सिस्टम भी इंस्टॉल हैं।

अपाचे के हथियार
अपाचे में 30 मिलिमीटर की एक एम230 चेन गन को मेन लैंडिंग गियर के बीच इंस्टॉल किया गया है और यह हेलीकॉप्टर की स्ट्राइकिंग कैपेसिटी को दोगुना करती है।

मिसाइल और रॉकेट पॉड्स
अपाचे के चार अहम बिंदु इसके पंखों के ऊपर स्थित हैं। इनमें एक एजीएम-114 हेलफायर मिसाइल और हाइड्रा 70 रॉकेट पॉड्स को फिट किया गया है।

वॉर जोन में अपाचे
अपाचे को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह वॉर जोन में लड़ाई के समय जरा भी फेल न हो।

हर मौसम में हमले को तैयार
अपाचे दुनिया के उन चुनिंदा हेलीकॉप्टर में शामिल है जो किसी भी मौसम या किसी भी स्थिति में दुश्मन पर हमला कर सकता है।

मिसाइल हमले से सुरक्षा
हेलीकॉप्टर में इंस्टॉल एयरफ्रेम में कुछ का वजन करीब 2,500 पौंड यानी 1,100 किलो है। यह एयरफ्रेम इसे किसी भी बैलेस्टिक हमले से सुरक्षित रखता है।












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