2022 में 2.25 लाख भारतीयों ने छोड़ी नागरिकता

भारतीय पासपोर्ट

भारत सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 2011 के बाद से 16 लाख से अधिक भारतीयों ने अपनी नागरिकता छोड़ दी है, जिसमें पिछले साल 2,25,620 लोग शामिल थे. जबकि भारतीय नागरिकता छोड़ने वाले लोगों की संख्या सबसे कम साल 2020 में 85,256 थी.

विदेश मंत्रालय ने दिया साल दर साल का आंकड़ा

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरूवार को राज्यसभा को बताया- मंत्रालय के पास उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अपनी भारतीय नागरिकता त्यागने वाले भारतीयों की संख्या 2015 में 1,31,48, 2016 में 1,41,603, 2017 में 1,33,049, 2018 में 1,34,561, 2019 में 1,44,017, 2020 में 85,256, 2021 में 1,63,370 और 2022 में 2,25,620 है.

जवाब में कहा गया उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पिछले तीन साल के दौरान 5 भारतीय नागरिकों ने यूएई की नागरिकता हासिल की है. 2011 के बाद से भारतीय नागरिकता छोड़ने वाले भारतीयों की कुल संख्या 16,63,440 है.

कोविड वाले साल में कम लोगों ने छोड़ी नागरिकता

संख्या पर एक नजर डालने से पता चलता है कि 2015 के बाद से नागरिकता छोड़ने वालों की संख्या में केवल वृद्धि हुई है, जबकि 2020 में अचानक गिरावट आई है, यही वह साल है जब कोविड-19 महामारी ने दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया था. उसके बाद 2021 में यह संख्या 1.63 लाख के पार पहुंच गई.

कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में कोविड लॉकडाउन के बाद अपनी सीमाएं खोलने के बाद वर्क वीजा और स्थायी निवास हासिल करने का चलन बढ़ रहा है. जयशंकर ने उन 135 देशों की सूची भी जिनकी नागरिकता भारतीयों ने हासिल की थी.

एक अन्य सवाल के जवाब में विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने कहा कि सरकार हाल के महीनों में अमेरिकी कंपनियों द्वारा पेशेवरों की छंटनी के मुद्दे से अवगत है. उन्होंने कहा, "इनमें से एक निश्चित प्रतिशत एच-1बी और एल1 वीजा पर भारतीय नागरिक होने की संभावना है. भारत सरकार ने अमेरिकी सरकार के साथ आईटी पेशेवरों समेत उच्च कुशल श्रमिकों की आवाजाही से संबंधित मुद्दों को लगातार उठाया है."

धनी लोग छोड़ रहे देश

पिछले साल आई एक रिपोर्ट के मुताबिक ज्यादा से ज्यादा संख्या में भारत के धनी लोग देश छोड़ने के इच्छुक हैं. लोगों को दूसरे देशों की नागरिकता और वीजा दिलाने वाली ब्रिटेन स्थित अंतरराष्ट्रीय कंपनी हेनली ऐंड पार्टनर्स का कहना है कि गोल्डन वीजा यानी निवेश के जरिए किसी देश की नागरिकता चाहने वालों में भारतीयों की संख्या तेजी से बढ़ रही है.

हेनली ग्लोबल सिटिजंस रिपोर्ट के मुताबिक नागरिकता नियमों के बारे में पूछताछ करने वालों में 2020 के मुकाबले 2021 में भारतीयों की संख्या 54 प्रतिशत बढ़ गई. 2020 में भी उससे पिछले साल के मुकाबले यह संख्या 63 प्रतिशत बढ़ी थी.

Source: DW

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