हत्यारे ब्वॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड पर कसेगा कानूनी शिकंजा

घरेलू हिंसा की प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली, 30 अगस्त। उस दिन निकीशा थॉमस घर से काम पर जाने के लिए निकली थी. रास्ते में अपनी बहन से फोन पर बात करते हुए उसने बताया कि उसे घरेलू हिंसा से बचने के लिए कुछ कदम उटाने की जरूरत महसूस हो रही है. यह बात उसकी बहन कीडा थॉमस को खटकी क्योंकि उसके पहले कभी भी उनके बीच ऐसी कोई बात नहीं हुई थी. हालांकि उन्हें पता था कि निकीशा ने कुछ ही दिन पहले कोर्ट में अपने एक्स-ब्वॉयफ्रेंड को दूर रखने के लिए अर्जी लगाई थी.

दोनों बहनों के बीच वो आखिरी बातचीत थी. फोन कॉल के एक घंटे के अंदर राजधानी वॉशिंगटन डीसी में दिनदहाड़े जब निकीशा अपनी कार पार्क कर रही थी, उसके एक्स-ब्वॉयफ्रेंड ने पैसेंजर सीट की खिड़की से उस पर बंदूक से हमला किया और 33 साल की निकीशा की जान ले ली.

घरेलू हिंसा से लेकर स्कूल तक

ऐसे और भी कई मामले हैं जिनमें पहले से कुछ चेतावनियां मिलती हैं. कई मामलों में तो कानूनी लड़ाइयां छिड़ चुकी होती हैं. लेकिन फिर भी डर के साये में जीने को मजबूर लोगों को कानूनी मदद नहीं मिल पाती. पिछले कुछ महीनों से अमेरिका में कानून बनाने वाले इस कमी को दूर करने की ओर सोच रहे हैं. दशकों से चली आ रही मांग को मानते हुए इस जून में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने बंदूक हिंसा के मद्देनजर गन लॉ में सुधार लाने की मंशा जताई है.

अमेरिकीस्कूलों में हमले होते आए हैं जिनमें दर्जनों बच्चे मारे जाते हैं. राष्ट्रपति बाइडेन ने जिन कदमों को मंजूरी दी है उनमें बंदूक खरीदने वाले कम उम्र के लोगों का बैकग्राउंड और कड़ाई से चेक करना शामिल है. इसके अलावा राज्यों में ऐसी व्यवस्था भी की जानी है जिससे बंदूक रखने वाले किसी व्यक्ति पर अगर खुद ही खतरा बनने का शक मंडराए तो प्रशासन आसानी से उसकी बंदूक जब्त कर सके.

'ब्वॉयफ्रेंड लूपहोल'

कानून में यह प्रस्ताव भी है कि अगर किसी इंसान पर घरेलू हिंसा का आरोप साबित हो चुका है तो फिर उसे किसी भी तरह का हथियार ना बेचा जाए. ध्यान देने वाली बात यह है कि इस कानून में दोषी व्यक्ति का पार्टनर के साथ बच्चा होना, साथ रहना या शादी के रिश्ते में होना जरूरी नहीं है.

करीब एक दशक से कानून में इस लूपहोल को बंद करने की मांग उठती रही कि ब्वॉयफ्रेंड-गलर्फ्रेंड को भी इसमें शामिल किया जाए. अब कानूनविद् और सामाजिक कार्यकर्ताओं को इन प्रस्तावों से काफी उम्मीद लगी है. उनका मानना है कि इस छेद को भरने वाला हिस्से के कारण यह कानून लंबे वक्त तक याद किया जाएगा.

लंबे समय से ऐसे कदमों के लिए प्रयास करने वाली डेमोक्रैट सेनेटर एमी क्लोबुकर कहती हैं, "इतनी सारी महिलाओं को जान से मार डाला जाता है - हर 14 घंटे में एक महिला की इस देश में घरेलू हिंसा में बंदूक से जान जाती है.'' उन्होंने इस पर खास तौर पर ध्यान दिलाया था कि हत्यारों में "करीब आधे ऐसे मामले होते हैं जिसमें शादीशुदा नहीं बल्कि डेट करने वाले पार्टनर होतें हैं."

'गन लॉ' में बड़ा सुधार

अमेरिका में लागू संघीय कानून में ऐसे लोगों के लिए कोर्ट से रिस्ट्रेनिंग ऑर्डर मिलता आया है जो घरेलू हिंसा का आरोप लगने के बाद बंदूक खरीदना चाह रहे हों. हालांकि इसमें सिर्फ वही लोग शामिल हैं जो या तो पीड़ित/पीड़िता के साथ शादीशुदा हों, साझा बच्चे हों या एक ही घर में साथ रहते हों. उसमें मौजूदा या पूर्व प्रेमियों को नहीं गिना जाता जो कि अकसर ऐसे अपराध को अंजाम देते हैं.

सामाजिक कार्यकर्ता और सुधारों की मांग कर रहे हैं. निकीशा जैसे मामले फिर से हो सकते हैं. लीगल मोमेंटम नाम की कंपनी में सीनियर एटॉर्नी जेनिफर बेकर कहती हैं, "इससे जानें तो जरूर बचेंगी लेकिन यह भी साफ है कि इससे ब्वॉयफ्रेंड लूपहोल थोड़ा सा ही बंद होता है.''

संघीय अपराध डाटा 2020 से पता चलता है कि करीबी पार्टनरों के हाथों जान से मारे गए सभी पीड़ितों में 37 फीसदी गर्लफ्रेंड्स की जान गई थी और 34 फीसदी पत्नियों की. वहीं केवल 13 फीसदी ब्वॉयफ्रेंड्स की हत्या की गई थी और केवल सात फीसदी पतियों की. इन आंकड़ों में तलाकशुदा और समलैंगिक जोड़े भी शामिल हैं.

सन 2018 में रिसर्चरों के एक समूह ने करीबी पार्टनरों के हाथों मारे गए लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया. इसके लिए उन्होंने 45 राज्यों का 1980 से 2013 तक का डाटा देखा. रिसर्च में पाया गया कि जब जब ऐसे मामलों में डोमेस्टिक रिस्ट्रेनिंग ऑडर्र जारी हुए, ऐसी मौतों की तादाद में 13 फीसदी की कमी आई. इस स्टडी की हिस्सा रहीं मिशिगन यूनिवर्सिटी की रिसर्चर एप्रिल जेओली बताती हैं, "इससे पता चला है कि जब भी हम इतना बड़ा जाल फैलाते हैं, जिसमें ब्वॉयफ्रेंड भी शामिल हों, तो ज्यादा खतरनाक लोगों को उस दायरे में ला पाते हैं और इससे और जानें बचने की संभावना बढ़ती है."

इधर थॉमस परिवार उम्मीद कर रहा है कि निकीशा की मौत बेकार ना जाए और कानून में ऐसे ठोस बदलाव लाये जायें.

आरपी/एनआर (एपी)

Source: DW

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