अगर त्रिशंकु विधानसभा हुई तो क्या मिथुन चक्रवर्ती होंगे भाजपा की अल्पमत सरकार के सीएम?
अगर त्रिशंकु विधानसभा हुई तो क्या मिथुन होंगे भाजपा के सीएम?
कोलकाता, अप्रैल 16: मशहूर अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती के भाजपा में आने का असर पश्चिम बंगाल चुनाव में साफ दिख रहा है। उनकी सभाओं में भारी उमड़ रही है। रोड शो में भी उनका जलवा है। नरेन्द्र मोदी और अमित शाह बेशक बड़े नाम हैं लेकिन मिथुन चक्रवर्ती ही वह नेता हैं जो आम बंगालियों को भाजपा से जोड़ रहे हैं। गरीब और मध्यम वर्ग के लोग बढ़-चढ़ कर उनके रोड शो में शामिल हो रहे हैं। वे गरीबों को सम्मान दिलाने और राज्य को हिंसा से मुक्ति दिलाने की बात कर रहे हैं।

उनकी बात लोगों को भा रही है। जब वे कहते हैं कि पिछले 44 साल से पश्चिम बंगाल ने अपनी सारी शक्ति केन्द्र सरकार से लड़ने में लगा कर युवकों का भविष्य बर्बाद कर दिया, तो लोग जोश में चिल्लाने लगते है। मिथुन चक्रवर्ती का खुद चुनाव नहीं लड़ना अब उनके हक में जा रहा है। इससे लोग समझ रहे हैं कि वे राजनीति में दौलत या शोहरत कमाने नहीं आये हैं। माना जा रहा है कि भाजपा मिथुन चक्रवर्ती के बारे में कुछ बड़ा सोच रही है। इसी बात को ध्यान में रख कर उन्हें पश्चिम बंगाल का वोटर बनाया गया है। इसके पहले वे उनका नाम महाराष्ट्र की मतदाता सूची में शामिल था।

70 साल के मिथुन के एक दिन में चार रोड शो
डिस्को डांसर मिथुन की उम्र 70 साल हो चुकी है। बॉम्बे जिमखाना में बनायी हुई बॉडी अब उनके राजनीति अभियानों में काम आ रही है। वे एक दिन में तीन से चार विधानसभा क्षेत्रों के लिए रोड शो या चुनावी सभाएं कर रहे हैं। पहले चरण के चुनाव में उन्होंने एक दिन में चार-चार रोड शो किये। बिना थके दिन रात चुनाव प्रचार में जुटे हुए हैं। सुबह 11 बजे से जो सिलसिला शुरू होता है वो देर शाम तक चलते रहता है। गुरुवार को उन्होंने नैहाटी, जगदल और भाटा पाड़ा विधानसभा क्षेत्रों में रोड शो किये। इनमें जुटी भीड़ को देख कर भाजपा गदगद है। मिथुन चक्रवर्ती एक तपेतपाये नेता की तरह भाषण कर रहे हैं। वे चुनावी सभा में कहते हैं, यहां मौजूद भारी भीड़ से मेरा फैन और एक्टर का रिश्ता नहीं है। मैंने गरीबी देखी है। लोग जानते हैं कि मैं एक गरीब का बेटा हूं। इन्हें लगता है कि मैं गरीबों को सम्मान दिला सकता हूं। दिल से भी मैं यही सोचता हूं। आज अगर मैं बंगाल की गलियों की खाक छान रहा हूं तो इसकी वजह मेरे गरीब भाई-बहन ही हैं। मैं फिल्मी एक्टर हूं और इसलिए लोग मुझे देखने आये हैं, ये सच नहीं है। ये भीड़ पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बदलाव के लिए जुट रही है।

मिथुन को क्यों बनाया गया कोलकाता का वोटर ?
भाजपा में शामिल होने के बाद मिथुन चक्रवर्ती उत्तरी कोलकाता से मतदाता बने हैं। इसके पहले वे महाराष्ट्र से वोटर थे। उनकी बहन शर्मिष्ठा सरकार उत्तरी कोलकाता के राजा महेन्द्र राय रोड में रहती हैं। मिथुन ने कोलकाता से वोटर बनने के लिए अपनी बहन के घर का ही पता दिया है। पहले यह माना जा रहा था कि उन्हें चुनाव लड़ाने के लिए पश्चिम बंगाल से वोटर बनाया गया है। लेकिन जब वे उम्मीदवार नहीं बने तो यह अनुमान निराधार साबित हुआ। मिथुन अपनी चुनावी सभाओं में बता चुके हैं कि वे चुनाव में क्यों नहीं खड़ा हुए । उनका कहना है, अगर में चुनाव लड़ता तो मतलबी कहलाता। लोग यही समझते कि मैं किसी पद की लालच में बंगाल आया हूं। मैं तो यहां केवल इसलिए आया हूं ताकि लोगों के जीवन में कुछ नया हो। भाजपा में इस बात की चर्चा है कि अगर चुनाव में बड़ी पार्टी बनने के बाद भी वह बहुमत से दूर रह जाती है तो मिथुन चक्रवर्ती को सीएम उम्मीदवार बनाया जा सकता है। अगर मिथुन के नेतृत्व में भाजपा की अल्पमत सरकार बन जाती है तो उसे तृणमूल या कांग्रेस के लिए गिराना आसान नहीं होगा। धरतीपुत्र मिथुन की सरकार को गिरा कर ये दोनों दल जनता की नजरों में गिरना नहीं चाहेंगे। तब बंगाल से वोटर होना मिथुन की ताकत बन जाएगा।

गैरराजनीतिक होना क्या मिथुन के लिए फायदेमंद होगा ?
मिथुन चक्रवर्ती परम्परागत राजनीतिज्ञ नहीं हैं। वे नफा-नुकासन देख कर कोई फैसला नहीं करते। जो उनके दिल को अच्छा लगता है, वही करते हैं। इसलिए उन्होंने तृणमूल कांग्रेस दी हुई राज्यसभा सांसदी बीच में ही छोड़ दी थी। सुपर स्टार बनने के बाद भी मिथुन 25 साल तक मजदूर यूनियन के अध्यक्ष रहे। उनका दावा है कि उन्होंने सात हजार सदस्यों वाले यूनियन को 30 करोड़ तक पहुंचा दिया था। फिल्मों में पैसा कमाया तो वाजिब जगह पर खर्च भी किया। मजदूरों के बच्चों की पढाई और उनकी बच्चियों की शादी के लिए पैसे खर्च किये। संगठन से अधिक गरीबों का हित के लिए लड़े। पश्चिम बंगाल के लोग इस बात को जानते हैं। मिथुन चक्रवर्ती की यह छवि उन्हें अन्य नेताओं से बिल्कुल अलग कर देती है। इसको ध्यान में रख कर ही भाजपा भविष्य के सपने बुन रही है।












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