तेलंगाना लंबित बिल: राज्यपाल के खिलाफ SC पहुंची सरकार, गवर्नर बोलीं- दिल्ली करीब नहीं, CS में शिष्टाचार की कमी

तेलंगाना सरकार ने राज्यपाल सुंदरराजन पर विधेयकों को जानबूझकर लंबित रखने का आरोप लगाया है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और कहा, राज्यपाल ने कथित रूप से विधायिका द्वारा पारित कुछ विधेयकों को लंबित रखा है।

telangana governor vs cm kcr

राज्यपाल और सरकार के कथित टकराव का ताजा मामला दक्षिण भारत से सामने आया है। तेलंगाना में विधानसभा से पारित अहम बिल पर निर्णय नहीं लेने और अपने पास लंबित रखने का आरोप लगाते हुए सीएम के चंद्रशेखर राव की भारत राष्ट्र समिति (BRS) सरकार ने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि गवर्नर तमिलिसाई सुंदरराजन के खिलाफ मुख्य सचिव के माध्यम से दायर राज्य सरकार की याचिका पर होली की छुट्टी के बाद सुनवाई होने की उम्मीद है।

गवर्नर की दो टूक- दिल्ली दूर है

विधेयकों के संबंध में निर्णय लेने में कथित देरी को लेकर राज्य सरकार उच्चतम न्यायालय क्यों पहुंची? इसके जवाब में, राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन ने शुक्रवार को कहा कि इस संबंध में दोस्ताना बातचीत अधिक मददगार होती। राज्यपाल ने तेलंगाना के चीफ सेक्रेटरी (@TelanganaCS) को टैग कर ट्वीट कर कहा कि राजभवन दिल्ली की तुलना में अधिक करीब है।

नियुक्ति के बाद CS ने शिष्टाचार भी नहीं दिखाया!

गवर्नर तमिलिसाई सुंदरराजन ने कहा कि सचिव के रूप में पदभार संभालने के बाद आपको आधिकारिक तौर पर रहभवन आने का समय नहीं मिला। कोई प्रोटोकॉल नहीं है! शिष्टाचार भेंट भी नहीं की गई। दोस्ताना आधिकारिक दौरे और बातचीत अधिक सहायक होती, लेकिन शायद आप ऐसा करने का इरादा भी नहीं रखते।

राज्यपाल ने प्रोटोकॉल पर सवाल उठाए

उन्होंने सचिव और राजभवन के बीच संपर्क पर जोर देते हुए कहा, मैं आपको फिर से याद दिलाती हूं कि दिल्ली के मुकाबले तेलंगाना चीफ सेक्रेट्री से ज्यादा करीब राजभवन है। बता दें कि राजभवन और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) की सरकार के बीच संबंध अच्छे नहीं रहे हैं और सुंदरराजन ने पहले शिकायत की थी कि उनके कार्यालय के संबंध में प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया जा रहा है।

हाईकोर्ट में भी जा चुकी है सरकार

के चंद्रशेखर राव के नेतृत्व वाली सरकार के साथ खुली तकरार देखी गई थी जब राज्यपाल ने पिछले साल नवंबर में संदेह व्यक्त किया कि उनके फोन टैप किए जा रहे हैं। गौरतलब है कि इस साल जनवरी में नाटकीय घटनाक्रम सामने आया था। तेलंगाना सरकार ने बजट पेश करने से संबंधित फाइल को मंजूरी देने के लिए राज्यपाल को निर्देश देने की कवायद करते हुए उच्च न्यायालय के समक्ष लंच मोशन (Lunch Motion) पेश किया था।

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    बजट पर कैसे बनी सहमति

    हालाँकि, अदालत की एक सलाह के बाद, राज्य सरकार और राजभवन के अधिवक्ताओं ने आपस में चर्चा की। बाद में हाईकोर्ट को सूचित किया गया कि दोनों पक्षों में चर्चा के बाद सहमति बन चुकी है इसलिए अदालत याचिका का निस्तारण कर सकती है। चर्चा के दौरान इस बात पर भी सहमति बनी थी कि बजट सत्र के दौरान राज्यपाल का अभिभाषण होगा और भाषण की प्रति राज्य सरकार सभी विधायकों को उपलब्ध कराएगी। बाद में राज्यपाल ने विधानसभा को संबोधित भी किया था।

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