Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

चावल अधिग्रहण पर छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश का मॉडल अपनाए तेलंगाना सरकार : FCI

आंध्र प्रदेश में और छत्तीसगढ़ में चावल अधिग्रहण शानदार तरीके से हो रहा है। एफसीआई ने कहा है कि तेलंगाना को दोनों राज्यों से प्रेरणा लेते हुए रबी सीजन में चावल अधिग्रहण करना चाहिए।

हैदराबाद : भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने तेलंगाना सरकार को आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ मॉडल अपनाने का सुझाव दिया है। टूटे चावल की समस्या को दूर करने के लिए एफसीआई ने कहा है कि तेलंगाना सरकार विशेष रूप से रबी सीजन के दौरान आंध्र और छत्तीसगढ़ की तरह काम कर सकती है।

telangana cm kcr

फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा है कि आंध्र प्रदेश सरकार मिल मालिकों को टूटे चावल के 110 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान करती है। छत्तीसगढ़ 120 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान करता है। उन्होंने कहा कि अगर तेलंगाना भी इसे अपनाता है, तो टूटे चावल की समस्या और उबले हुए चावल की खरीद न होने की समस्या का समाधान किया जा सकता है।

एफसीआई कैसे लेता है चावल ?
जानकारी के मुताबिक चावल मिलों को एफसीआई को आपूर्ति किए गए प्रत्येक 100 किलो धान के लिए 67 किलो चावल देना होता है। इसमें लगभग 17 किलो (25 प्रतिशत) टूटे हुए चावल एफसीआई स्वीकार कर लेता है। एफसीआई तीन प्रतिशत क्षतिग्रस्त और तीन प्रतिशत फीके धान भी स्वीकार कर लेता है। हालांकि, रबी के मामले में, मिल मालिकों को कच्चे चावल की की खरीद के दौरान लगभग 34 किलोग्राम टूटे चावल मिलेंगे। इसमें एफसीआई केवल 17 किलो टूटे चावल स्वीकार करेगा।

दूसरे राज्यों का मॉडल अपनाए तेलंगाना
एफसीआई की सीमा से अधिक मात्रा में टूटे चावल के लिए, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ के चावल मिल कुछ राशि का भुगतान करते हैं। दोनों राज्यों में एफसीआई को कच्चे चावल की आपूर्ति भी की जा रही है। ऐसे में एफसीआई के सूत्रों ने सुझाव दिया कि तेलंगाना सरकार को भी आंध्र प्रदेश और तेलंगाना का मॉडल अपनाना चाहिए।

फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के सूत्रों ने बताया कि टूटे चावल को मिल मालिक 19 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेच सकते हैं। अगर मिल मालिक कहते हैं कि उन्हें टूटे चावल के लिए मात्र 14 रुपये या 15 रुपये प्रति किलो मिलेंगे, तो ऐसे में 5 रुपये या 4 रुपये प्रति किलो की राशि राज्य सरकार को वहन करनी पड़ेगी।

इस आधार पर राज्य सरकार ने अनुमान लगाया है कि राज्य के खजाने पर लगभग 3,000 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि एफसीआई केवल कच्चे चावल की खरीद कर रहा है। हालांकि, एफसीआई के अधिकारियों ने राज्य सरकार को होने वाले नुकसान के बारे में कहा कि 500 करोड़ रुपये से 1,000 करोड़ रुपये के बीच नुकसान होने की आशंका है, क्योंकि मिल मालिक टूटे हुए चावल, भूसी और अन्य बाईप्रोडक्ट की बिक्री कर सकते हैं।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+