अब कांग्रेस आलाकमान से सीधे टकराव के मूड में आये वीरभद्र सिंह
वहीं वीरभद्र हैं कि वह अपने फैसले पर अडिग हैं। बीते कल राहुल गांधी की बुलाई बैठक का बॉयकाट करने के बाद उन्होंने पार्टी प्रभारी शिन्दे को भी अपनी ताकत का एहसास कराया।
शिमला। कांग्रेस आलाकमान के आगे मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की दवाब की राजनीति शायद कोई असर नहीं डाल पाई है। यही वजह है कि पार्टी ने साफ संकेत दे दिया है कि इस नाजुक दौर में पार्टी अध्यक्ष नहीं बदला जायेगा। वहीं वीरभद्र हैं कि वह अपने फैसले पर अडिग हैं। बीते कल राहुल गांधी की बुलाई बैठक का बॉयकाट करने के बाद उन्होंने पार्टी प्रभारी शिन्दे को भी अपनी ताकत का एहसास कराया।

गुरूवार को राहुल गांधी ने प्रदेश के मामले पर विचार के लिये जो बैठक बुलाई थी, उसमें भी वीरभद्र सिंह नहीं गये। न ही पार्टी प्रभारी सुशील कुमार शिन्दे के स्वागत के लिये कांगड़ा एयरपोर्ट पहुंचे। हलांकि सीएम आज कांगड़ा जिला के प्रवास पर ही हैं लेकिन न तो सीएम न ही उनके सर्मथक यहां पहुंचे। शिंदे के स्वागत के लिए कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू और परिवहन मंत्री जीएस बाली मौजदू रहे। वीरभद्र खेमे के माने जाने वाले शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा भी शिंदे के स्वागत के लिए नहीं आए। कुल मिलाकर वीरभद्र खेमे ने इस कार्यक्रम से दूरी बनाकर रखी। पार्टी का विवाद खत्म करने के लिये आलाकमान ने शिन्दे को हिमाचल भेजा है। लेकिन पहले ही दिन वीरभद्र सिंह ने अपने तेवर दिखा दिये।
इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष सुखविन्दर सिंह सुक्खू ने दिल्ली में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की और सियासी हालात की जानकारी दी। पार्टी के प्रदेश प्रभारी सुशील कुमार शिंदे और सह प्रभारी रंजीता रंजन ने भी राहुल गांधी से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि पार्टी का विवाद सुलझाने के लिए शिंदे शुक्रवार से हिमाचल प्रवास पर जाएंगे। हिमाचल में 3 महीने के बाद विधानसभा चुनाव हैं।

दरअसल कांग्रेस प्रभारी सुशील कुमार शिंदे ने ऐलान किया है कि संगठन में कोई फेरबदल नहीं होगा। यानी सुक्खू कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष बने रहेंगे। शिन्दे का यह ऐलान न तो वीरभद्र सिंह न ही उनके समर्थकों को रास आ रहा है। ऐसे में अब सवाल उठ रहे हैं कि सीएम वीरभद्र सिंह का अगला कदम क्या होगा । क्योंकि उन्होंने पहले ही ऐलान कर दिया था कि अगर सुक्खू को कुर्सी से नहीं हटाया गया तो वे चुनाव नहीं लड़ेंगे। अब सबकी नजरें सीएम के अगले कदम पर टिकी हैं।
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह चुनाव से पहले पार्टी की कमान अपने हाथों में चाहते हैं। उन्होंने अपनी मंशा से पिछले दिनों न सिर्फ पार्टी हाईकमान सोनिया गांधी को अवगत करवा दिया बल्कि तल्ख तेवर दिखाते हुए यह भी कह दिया था कि अगर सुक्खू को चुनाव से पहले नहीं हटाया गया तो वे न चुनाव लड़ेंगे और न ही लड़वाएंगे। उनके इस रुख ने कांग्रेस हाईकमान की चिंता बढ़ा दी है। वीरभद्र सिंह की चेतावनी को हल्के में लेने से पार्टी को चुनावी नुक्सान उठाना पड़ सकता है लेकिन हाईकमान यह भी नहीं दिखने देना चाहता कि वह कमजोर है। लिहाजा हर पहलू पर विचार कर रहा है।
वीरभद्र सिंह जिस दिन सोनिया गांधी से मिले थे, राहुल विदेश में थे। हिमाचल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष को राहुल गांधी का करीबी कहा जाता है इसलिए दिल्ली वापस आने के साथ ही राहुल गांधी ने हिमाचल प्रदेश के मामले पर पार्टी नेताओं से विचार-विमर्श शुरू कर दिया है। सूत्र बता रहे हैं कि लंबी चर्चा के बाद राहुल गांधी ने सुक्खू को फिलहाल हटाए जाने का कोई संकेत नहीं दिया है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि 3 महीने बाद जब चुनाव में उतरना है तो संगठन में किसी भी तरह का बदलाव पार्टी के लिए नुक्सानदेह साबित हो सकता है।
वहीं समाधान के लिए यह सुझाव आया है कि अध्यक्ष सुक्खू ही रहें, चुनावी रणनीति, प्रत्याशी चयन और प्रचार कार्यों में वीरभद्र सिंह की भूमिका को थोड़ा बढ़ा कर मामले को सुलझा लिया जाए लेकिन इस बारे में वीरभद्र सिंह और उनके समर्थकों से अभी बात होनी है। चुनाव को लेकर गठित की जाने वाली प्रचार, घोषणा पत्र व अन्य कमेटियों के गठन पर भी चर्चा हुई है। सूत्रों की मानें तो इसके तहत मुख्यमंत्री को चुनावी प्रचार कमेटी का जिम्मा तथा घोषणा कमेटी का जिम्मा आई.पी.एच. मंत्री विद्या स्टोक्स को दिया जा सकता है। इसके साथ ही घोषणा पत्र कमेटी में जी.एस. बाली को भी शामिल किया जाएगा।
इस बीच शिन्दे ने मीडिया के सवालों पर पार्टी के भीतर किसी भी तरह के मतभेद और मनमुटाव से इंकार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी से हुई मुलाकात के दौरान आने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर चर्चा हुई। वीरभद्र की नाराजगी से जुड़े सवाल पर कांग्रेस नेता ने कहा कि वे 6 बार के मुख्यमंत्री हैं, कांग्रेस में उनका सभी सम्मान करते हैं। यह कोई गंभीर बात नहीं है, सभी मिलकर चुनाव लड़ेंगे।












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