हिमाचल चुनाव से पहले सवर्ण आयोग के गठन की मांग ने पकड़ा जोर, भाजपा कांग्रेस विधायकों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन
शिमला, 28 अप्रैल। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में आम आदमी पार्टी के दखल के बाद अब भाजपा व कांग्रेस के लिये आरक्षण विरोधी मोर्चा सिरदर्द बन गया है। इस मोर्चे में सवर्ण समाज और देवभूमि क्षत्रिय संगठन शामिल हैं। यह लोग भाजपा और कांग्रेस के विधायकों व मंत्रियों का जगह-जगह विरोध कर रहे हैं जिससे नेताओं की हालत देखते ही बनती है। सबसे ज्यादा खराब हालत सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की हो रही है।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुरेश कश्यप और पच्छाद से भाजपा विधायक रीना कशयप को सवर्ण समाज के गुस्से का सामना करना पडा। दोनों नेता सड़क के उद्घाटन और शिलान्यास को पहुंचे थे। लेकिन सवर्ण समाज के लोगों ने काले झण्डे दिखाकर विरोध किया। हालात बिगड़ते देख दोनों नेताओं ने यहां रुकना उचित नहीं समझा और पुलिस की मदद से यह लोग निकल सके। इससे पहले रेणुका से कांग्रेस विधायक विनय कुमार जिन्हें एक दिन पहले ही सोनिया गांधी ने प्रदेश कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष मनोनीत किया था, को भी विरोध का सामना करना पडा। उन्हें भी सवर्ण समाज के कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाए।

यह लोग प्रदेश में सवर्ण आयोग के गठन की मांग कर रहे है। कुछ अरसा पहले जब इन लोगों ने प्रदेश विधानसभा के बाहर उग्र प्रदर्शन किया था। तो उस समय सीएम जय राम ठाकुर ने इनकी मांग मानने का भरोसा दिया था। कहा था कि सरकार जल्द ही प्रदेश में सवर्ण आयोग का गठन करेगी। लेकिन करीब छह माह बीत जाने के बाद इस मामले में कोई प्रगति नहीं हुई । और उस दौरान अंदोलन करने वाले कई नेताओं के खिलाफ एक ओर जहां आपराधिक मामले दर्ज हो गये, तो दूसरी ओर कुछ गिरफ्तारियां भी हुईं। इसको लेकर इन लोगों में सरकार के रवैये के प्रति गुस्सा है। संगठन के कार्यकर्ता कांग्रेस नेतओं की ओर उनका समर्थन न करने को लेकर गुस्सा है। अब इस संगठन ने प्रदेश के चुनावों में भाग लेने का निर्णय भी लिया है। और संगठन पक्ष व विपक्ष के विधायकों का जगह-जगह विरोध भी कर रहा है। जिससे नेताओं की परेशानी बढी है। अब कई नेता घर से निकलने में भी संकोच करने लगे हैं।

सवर्ण समाज के अध्यक्ष सुनील ठाकुर ने बताया कि धर्मशाला व शिमला में हमारे सवर्ण भाइयों को काफी परेशान व प्रताड़ित किया गया। किसी भी नेता ने सवर्ण समाज की पैरवी नहीं की यहां तक जब सवर्ण समाज के लोगों को जेलों में डाला गया तब भी किसी ने मुंह तक नहीं खोला। अब समय आ गया है कि इन लोगों को गांव में नही घुसने दिया जाएगा। आगे अभी विस चुनाव आने है तब प्रचार में कई दलों के लोग आएंगे मगर इन लोगों का बहिष्कार किया जाएगा। लोगों ने यह भी कहा कि उन्होंने सवर्णों के साथ भेदभाव किया है।
देवभूमि क्षत्रिय संगठन का सफर प्रदेश में सवर्ण वर्ग आयोग के गठन की मांग से शुरू हुआ था। इसी बीच आरक्षण का विरोध होने लगा। ऐसे में सवाल उठता है कि पार्टी के गठन के बाद 68 विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव लड़ऩे का फैसला तो ले लिया है, मगर उन विधानसभा क्षेत्रों से प्रत्याशी कैसे मिलेंगे जो एससी व एसटी वर्गों के लिए आरक्षित हैं।












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