Himachal Pradesh: 26 साल बाद घर लौटा ट्रक ड्राइवर पिता, बेटे को यूं मौत के मुंह से निकाला
शिमला, 24 अगस्त: हिमाचल प्रदेश का रहने वाला एक ट्रक ड्राइवर 26 साल बाद अपने घर वापस आया था। उसके जवान बेटे की दोनों किडनी खराब हो चुकी थी। बीते दो वर्षों में कोविड महामारी के चलते किडनी ट्रांसप्लांट करवाना भी आसान नहीं हो पा रहा था। दो वर्षों से उस युवक को किसी तरह से डॉक्टर जिंदा रख रहे थे। शिमला के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के डॉक्टरों ने सोमवार को दो साल बाद पहली बार सफल किडनी ट्रांसप्लांट किया है और यह मरीज कोई और नहीं वही बलदेव नाम का वह युवक है, जिसके पिता ने अपनी किडनी देकर उसे मौत के मुंह में जाने से बचा लिया है।

26 साल बाद घर लौटा था पिता
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा का रहने वाला एक शख्स 26 साल तक अपने परिवार वालों के पास नहीं आया। लेकिन, उसकी घर वापसी उसके बेटे के लिए वरदान साबित हुई है। उसने अपनी एक किडनी देकर अपने 28 साल के बेटे की जान बचाई है। किडनी ट्रांसप्लांट का यह सफल ऑपरेशन सोमवार को शिमला के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में किया गया है। हिमाचल प्रदेश के इस सबसे बड़े सरकारी अस्पताल के अधिकारियों के मुताबिक आईजीएमसी में किडनी ट्रांसप्लांटेशन का काम दो साल के बाद दोबारा शुरू हुआ है।

मां की किडनी मैच नहीं हुई थी
आईजीएमसी के अधिकारियों ने बताया है कि करीब 2 साल पहले 28 साल के मरीज बलदेव की किडनी फेल हो गई थी और तब से डायलिसिस के सहारे उसकी जान बचाई जा रही थी। मरीज की मां कांगड़ा के डिप्टी कमिश्नर के दफ्तर में क्लास फोर की कर्मचारी है, लेकिन बेटे के इलाज के लिए ही वह दो साल पहले कांगड़ा से शिमला चली आई थी। शुरू में मां ने बेटे की जान बचाने के लिए अपनी किडनी देने की पेशकश की थी। लेकिन, दुर्भाग्य से उसकी किडनी बलदेव से मैच नहीं हो पाई।

अपनी किडनी देकर बचाई बेटे की जान
बलदेव के पिता महाराष्ट्र में ट्रक ड्राइविंग का काम करते थे। तीन साल पहले ही वह 26 साल बाद महाराष्ट्र से अपने घर लौटे थे। बलदेव की मां की किडनी तो मेल नहीं खा पाई, लेकिन उसके पिता की किडनी मैच कर गई और सोमवार यानी 23 अगस्त को ही किडनी ट्रांसप्लांट किया गया है। आईजीएमसी के अधिकारियों ने बताया कि 'इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (एम्स), दिल्ली की निगरानी में चंबा के 28 साल के व्यक्ति की पहली किडनी ट्रांसप्लांटेशन की गई।' सीनियर मेडिकल सुप्रिटेंडेंट डॉक्टर जनक राज ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'युवक दो सालों से डायलिसिस पर था। एम्स, दिल्ली के डॉक्टरों के साथ हमने उस युवा का सफलतापूर्वक किडनी ट्रांसप्लांट किया।'(ऊपर की तस्वीर- प्रतीकात्मक)

2019 में दो किडनी ट्रांसप्लांट हुए थे
डॉक्टर जनक के मुताबिक कोरोना वायरस महामारी के बाद शुरू हुई दिक्कतों के बाद यह पहला किडनी ट्रांसप्लांटेशन था। वो बोले, 'हमने 2019 में दो किडनी ट्रांसप्लांट किया था।' अस्पताल के अधिकारियों के मुताबिक इस अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट का खर्च 3 से 3.5 लाख रुपये के बीच आता है, जबकि प्राइवेट अस्पतालों में करीब 15 लाख रुपये लागत आती है। डॉक्टर जनक ने बताया कि उनका अस्पताल किडनी ट्रांसप्लांट के लिए सभी उपकरणों से लैस है। दिल्ली एम्स के डॉक्टर लगातार इस अस्पताल में आते रहेगे और आईजीएमसी के डॉक्टरों के साथ मिलकर किडनी ट्रांसप्लांट करेंगे।












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