मनी लॉन्ड्रिंग केस: वीरभद्र सिंह को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत, लगा झटका

शिमला। लगता है मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ चल रहा आय से अधिक संपत्ति का मामला अभी उनका पीछा नहीं छोड़ेगा। इस मामले में दर्ज एफआईआर रद्द कराने के लिये वीरभद्र सिंह सुप्रीम कोर्ट में पहुंचे थे, लेकिन उन्हें वहां झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर रद्द करने की वीरभद्र सिंह की याचिका को आज खारिज कर दिया है जिससे अब तय हो गया है कि इस मामले में चल रही कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता ने वीरभद्र की याचिका यह देखते हुए खारिज कर दी कि उसमें खामियां दूर नहीं की गईं और न ही उनकी ओर से कोई वकील कोर्ट में पेश हुआ। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें किसी तरह की राहत देने से इनकार कर दिया था।

Supreme court rejected plea of Virbhadra Singh in Money laundering case

गौरतलब है कि इस मामले में पिछली 28 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान वीरभद्र सिंह पत्नी प्रतिभा सिंह सहित सात अन्य ने आवेदन दायर करके आरोप पत्र के साथ-साथ कुछ अन्य कागजात मांगे थे। कोर्ट ने इस दौरान जहां सीबीआई द्वारा दायर की गई चार्जशीट के दस्तावेजों की पड़ताल की, वहीं वकीलों द्वारा पेश की गई दलीलों के बाद मामले की सुनवाई 30 अगस्त के लिए निर्धारित की थी। 30 अगस्त को जब सुनवाई हुई तो कोर्ट ने इस मामले की डेट 31 अक्टूबर तक टाल दी। क्योंकि सीबीआई की दलील थी कि जांच अधिकारी कोर्ट में उपस्थित नहीं हैं, ऐसे में कागजात हैंडओवर नहीं किए जा सकते। इसके चलते कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 31 अक्टूबर तक टाल दी थी। लेकिन अब इस मामले की सुनवाई 26 अक्टूबर को हुई।

यह है पूरा मामला
सी.बी.आई. का आरोप पत्र 500 से अधिक पन्नों का है जिसमें दावा किया गया है कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह तथा अन्य आय के ज्ञात स्रोत से 10 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति के मामले में फंसे हैं। सीबीआई ने अपने आरोप पत्र में कहा है कि मुख्यमंत्री ने ये संपत्ति तब अर्जित की जब वे केंद्र के मंत्री थे। साल 2009 से 2012 तक वीरभद्र ने करीब 6.03 करोड़ रुपए अधिक की संपत्ति जमा की थी। ये संपत्ति वीरभद्र ने यूपीए शासन में केंद्रीय इस्पात मंत्री के रूप में अपने और अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर कथित तौर पर एकत्र की।

हालांकि वीरभद्र सिंह ने इन आरोपों से इनकार किया है। आई.पी.सी. की धाराएं 109 (उकसाने) और 465 (फर्जीवाड़ा के लिए सजा) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दंडनीय अपराधों को लेकर वीरभद्र सिंह और 8 अन्य के खिलाफ दाखिल रिपोर्ट में 225 गवाहों और 442 दस्तावेजों का जिक्र है। रिपोर्ट में आरोपी एल.आई.सी. एजैंट आनंद चौहान भी नामजद है जो फिलहाल न्यायिक हिरासत में है। चौहान को धन शोधन से जुड़े एक अलग मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने पिछले साल 9 जुलाई को गिरफ्तार किया था। यह विषय उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय को हस्तांतरित कर दिया था, जिसने 6 अप्रैल, 2016 को सी.बी.आई. को वीरभद्र को गिरफ्तार नहीं करने का निर्देश दिया था और उन्हें जांच में शामिल होने का आदेश दिया था।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+