'पीएम मोदी मुझे खुला मंच प्रदान करें, मैं बनाऊंगा भारत को विश्वगुरु'

जाने माने वैज्ञानिक अजय शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से न्यूटन की गति के नियम को गलत साबित करने के लिए खुला मंच प्रदान करने की मांग की है ताकि वह सर्वाजनिक तौर पर अपने दावों को सही साबित कर सके

शिमला। जाने माने वैज्ञानिक अजय शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से न्यूटन की गति के नियम को गलत साबित करने के लिए खुला मंच प्रदान करने की मांग की है ताकि वह सर्वाजनिक तौर पर अपने दावों को सही साबित कर सकें। शर्मा ने दावा किया कि वे साबित कर देंगे नौवीं क्लास से पढ़ाया जाने वाला 'न्यूटन की गति दूसरा नियम ' (F =ma) न्यूटन ने नहीं दिया था। यह नियम स्विटजरलैंड के वैज्ञानिक लियोनहार्ड यूलर ने न्यूटन की मृत्यु के बाद 1775 में 48 साल बाद दिया था।

न्यूटन का तीसरा नियम भी गलत है

न्यूटन का तीसरा नियम भी गलत है

वैज्ञानिक अजय शर्मा ने बताया कि इस तरह न्यूटन का तीसरा नियम भी अधूरा एवं गलत है। मैथेमैटिकल ऐसोसिऐशन ऑफ अमेरिका, वाशिंगटन की वेबसाइट पर इसके स्पष्ट प्रमाण है। अजय शर्मा के शोधकार्य को अमेरिका/यूरोप की शोध पत्रिकाओं, सेमिनारों में वैज्ञानिकों की मान्यता मिल चुकी है। इनके अनुसार एन.सी.ई.आर.टी (NCERT), नई दिल्ली की पुस्तकों में संबंधित जानकारी अधूरी एवं गलत है।

34 सालों से कर रहे हैं शोध

34 सालों से कर रहे हैं शोध

हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग के सहायक निदेशक, अजय शर्मा पिछले 34 वर्षों से सरकार और परिवार के सहयोग से 2266 वर्ष पुराने आर्किमिडीज के सिद्धान्त, 311 वर्ष पुराने न्यूटन के नियमों और 112 वर्ष पुराने आइंस्टीन के समीकरण E=Mc2 को संशोधित कर चुके हैं। उनके शोधपत्र अमेरिका और यूरोप की कई शोध् पत्रिकाओं और सेमिनारों में पूरी जांच पड़ताल के बाद प्रकाशित हो चुके हैं। यह शर्मा के दावे एवं विश्वास का आधार है। अजय शर्मा का कहना है कि मोदी सरकार खुले मंच पर ‘न्यूटन की गति के नियमों' पर सेमिनार करवाएं। इस सेमिनार में वे अपने प्रकाशित शोधपत्रों के आधार पर सिद्ध कर देंगे कि ‘न्यूटन की गति का दूसरा नियम' ( F =ma या बल = द्रव्यमान x त्वरण) ने नहीं, बल्कि यूलर ने दिया था। साथ ही‘न्यूटन का तीसरा नियम' भी पूरी तरह अधूरा एवं गलत है।

गलत पाए जाने पर हर सजा मंजूर

गलत पाए जाने पर हर सजा मंजूर

सेमिनार के बाद चर्चा को यू-टयूब और वैबसाइट पर डाला जाए ताकि विश्व भर के लोग इस पर कमैंट कर सकें। इस पर बहुत कम खर्च आएगा । शर्मा ने कहा कि उनके दावे और शोधपत्र गलत पाए तो वे जो चाहे सजा दे उन्हें मंजूर होगी। सेमिनारों के माध्यम से 134 करोड़ भारतवासियों को दुर्लभ सम्मान मिलेगा। शर्मा के लेख, लाखों लोगों ने सोशल मीडिया में पढ़े हैं। इसी से प्रभावित होकर दिल्ली के फिल्म निदेशक ने उन पर 40 मिनट की डाक्यूमैंट्री बनाई है। जिसे नेशनल फिल्म फेस्टिवल में इस साल दिखाया जाएगा। इसमें सीधे ढंग से ‘न्यूटन के नियमों' पर सारे रिकार्ड सहित चर्चा है। अजय शर्मा ने 19 वर्ष की आयु में बी.एस.सी. सैकिंड ईयर में ही नियमों की खामियां बतानी शुरु कर दी थीं।

भारत बनेगा विश्वगुरू

भारत बनेगा विश्वगुरू

इस मामले में विज्ञान एवं तकनीक मंत्री डा. हर्षवर्धन ने भी दो वर्ष पहले अजय की दो पुस्तकों को जांच हेतु ‘नैशनल अकादमी आफ साईंसिस, इंडिया' को मुल्यांकन के लिये भेजा है। शर्मा की दो पुस्तकें ‘बियोंड न्यूटन एंड आर्किमिडीज ' 2013 में और ‘बियांड आइंस्टीन एंड E=mc2' 2015 में कैम्ब्रिज, इंग्लैण्ड से प्रकाशित हो चुकी है। अजय शर्मा ने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी सेमिनार करवाकर 134 करोड़ भारतीयों के लिए सम्मान अर्जित करने का अवसर प्रदान करेंगे। इस शोध से भारत आधारभूत नियमों में सुपरपावर (विश्व गुरु) बनेगा।

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