सोशल मीडिया के जरिए इस महिला ने कुछ ऐसा कर दिखाया जो सरकार भी नहीं कर पाई

शिमला। करीब दो साल पहले हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा के पालमपुर कस्बे की रहने वाली ऋतु शर्मा उन पीड़ित महिलाओं में से एक हैं,जिनके पति भारत में शादी करने के बाद उन्हें छोड़कर विदेश चले गए और अब उनकी आखें पति के इंतजार में पथरा गई हैं। ऋतु को जब अपने सुसराल से भी कोई मदद नहीं मिली तो उन्होंने भारतीय विदेश सुषमा स्वराज से मदद लेने की ठानी। बता दें कि एनआरआई पतियों से पीड़ित 40 हजार महिलाओं में 23 हजार से अधिक पंजाब की हैं जबकि करीब 6500 हरियाणा और चंडीगढ़ व दो हजार उत्तर प्रदेश की महिलाएं हैं।

ritu sharma is helping 40 thousand women who are cheated by their nri husband

करीब दो साल उन्होंने अपनी आपबीती से विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को अवगत करवाया व सारे घटनाक्रम की जानकारी ट्वीट कर दी। उन्होंने बताया कि किस तरह एनआरआई पति भारत में आकर शादी रचाकर धोखा देकर विदेश वापिस भाग जाते हैं। कैसे वो भी एनआरआई पतियों की सताई भारतीय महिलाएं संघर्षपूर्ण जिंदगी जी रही हैं। बदकिस्मती से ऋतु शर्मा की बात विदेश मंत्रालय ने तो अनसुनी कर दी। लेकिन ऋतु ने इन पीड़ित महिलाओं के लिए आवाज उठाने का संकल्प लिया। उसके बाद उन्होंने इन महिलाओं को ट्विटर व वाट्सएप के जरिए आमंत्रित किया। करीब 150 पीड़ित महिलाएं उनके सोशल मिडिया प्लेटफार्म से जुड़ गईं।

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लेकिन ऋतु शर्मा ने हिम्मत नहीं हारी व इसके बाद ऋतु शर्मा व सुमेरा पारकर ने बिना हारे माने अपना नेटवर्क बढ़ाना शुरू कर दिया। ऋतु ने अप्रैल 2018 में टू गेदर वी कैन नाम से व्हाट्सएप ग्रुप बनाया। ऋतु शर्मा 14 नाम से ट्विटर अकाउंट बनाया। देखते ही देखते अगस्त माह तक लगभग 40 हजार महिलाएं जुड़ गईं। अब यह महिलायें अक्तूबर माह में दिल्ली और चंडीगढ़ में रैलियां कर सरकार को जगाने के लिये अंदोलन का बिगूल फूंकने जा रही हैं। इनके अलावा महाराष्ट्र, बिहार, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश, दिल्ली, आंध्रप्रदेश आदि प्रदेशों की पीडि़त महिलाएं भी इस लड़ाई में सहयोग दे रही हैं। पतियों को सबक सिखाने के लिए उन्होंने पासपोर्ट रद्द करवाने शुरू कर दिए। पंजाब, हरियाणा व चंडीगढ़ समेत पूरे देश में तीन हजार से अधिक एनआरआई पतियों के पासपोर्ट ये रद्द करा चुकी हैं।

हिमाचल प्रदेश के पालमपुर की रहने वाली ऋतु शर्मा की शादी 6 मई 2013 में संजय सिंह से हुई। वह अटलांटा पुलिस में हैं। शादी के एक माह तक वह ऋतु के साथ रहे उसके बाद वह अमेरिका चले गया। चार साल बीत गए लेकिन पति की कोई खबर नहीं मिली। इसके बाद ऋतु ने पति को सबक सिखाने के साथ ही अपनी जैसी अन्य पीड़ितों को भी न्याय दिलाने का संकल्प लिया। प्रथम कार्रवाई करवाने के लिए महिलाओं ने पतियों के खिलाफ सुबूत पेश किए। उसी आधार पर आरोपी एनआरआई पतियों के पासपोर्ट रद किए जा रहे हैं।

इन महिलाओं ने नेशनल कमीशन फॉर वुमन की चेयरमैन रेखा शर्मा ने संपर्क साधा। सरकार के साथ बैठक कराने की मांग रखी। बात तय हो गई। 28 मार्च 2018 को पूरे कोरम से बैठक हुई। विदेश मंत्रालय, महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय, एनआरआई कमीशन के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक हुई, मदद का आश्वासन मिला लेकिन किसी निर्णय तक नहीं पहुंच पाए।

ऋतु शर्मा बताती हैं कि चंडीगढ़ के तत्कालीन पासपोर्ट अधिकारी परमजीत सिंह से पीडि़त महिलाओं ने संपर्क किया। उन्होंने सुझाव दिए। सही रास्ता भी दिखाया। अभी भी वह महिलाओं की मदद कर रहे हैं। एनआरआई कमीशन के चेयरपर्सन राकेश गर्ग ने भी मदद की। इसी तरह वर्तमान क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी शिबास कबिराज (आईपीएस) भी उनके मार्गदर्शक बने। सुबूत महिलाओं ने पेश किए तो उनके पतियों के पासपोर्ट रद्द किए।

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