बेजान हिमाचल कांग्रेस में क्या जान फूंक पाएंगी अध्यक्ष प्रतिभा सिंह?

शिमला, 29 अप्रैल। कुछ दिन पहले मंडी की सांसद प्रतिभा सिंह ने अपने आवास शिमला के हालीलाज में अपने लोकसभा चुनाव की जीत पर प्रदेश कांग्रेस के विधायकों व पूर्व विधायकों को प्रीतिभोज पर आमंत्रित किया, तो शायद खुद प्रतिभा सिंह को भी आभाष नहीं रहा होगा कि कुछ दिनों बाद कांग्रेस आलाकमान उनके प्रति विश्वास जता कर प्रदेश कांग्रेस की कमान उन्हें सौंप देगी। कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी ने 65 वर्षीय लोकसभा सांसद प्रतिभा सिंह , जो कि तीसरी बार सांसद बनी हैं , को इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी के बडे चेहरे के तौर पर पेश किया है।

Pratibha Singh has many challenges in Himachal congress

कांग्रेस के कद्दावर नेता दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह जिनका निधन बीते साल जुलाई माह में हुआ था , कि पत्नी प्रतिभा सिंह के सामने सबसे बड़ी चुनौती गुटों में बंटी हिमाचल कांग्रेस को एकजुट कर विधानसभा चुनावों में सत्तारूढ भारतीय जनता पार्टी से मुकाबले के लायक बनाना है। हालांकि मौजूदा हालातों में हिमाचल कांग्रेस की हालत किसी से छिपी नहीं है। पार्टी बेजान हो चुकी है। कार्यकर्ता निराश है। गुटबाजी के चलते नेता अपनी डफली अपना राग अलापने में जुटे है। जिससे चलते लोग समझने लगे हैं कि आम आदमी पार्टी ही अब भाजपा से यहां मुकाबला कर सकती है।

Pratibha Singh has many challenges in Himachal congress

जमीनी चुनौतियों से मुकाबला करने को तैयार मंडी की सांसद प्रतिभा सिंह ने इस संवाददाता से बातचीत में कहा कि पार्टी ने जो जिम्मेवारी मुझे सौंपी है, उसे मैं बखूबी निभाने को तैयार हूं। मेरे कंधों पर जिम्मेवारी दी गई है। उसे निभाना मेरी जिम्मेवारी हैं। प्रतिभा सिंह को कांग्रेस की कमान मिलने के बाद अब शिमला का हाली लाज नये शक्ति केन्द्र के रूप में उभर गया है। यहां जश्न का माहौल है। व प्रदेश के दूर दराज इलाकों से वीरभद्र सिंह समर्थक कांग्रेस कार्यकर्ता लगातार यहां आ रहे है। और प्रतिभा सिंह को बधाइयां दे रहे हैं।

वीरभद्र सिंह की विरासत आज प्रतिभा सिंह की ताकत बन गई है। खुद प्रतिभा सिंह मानती हैं कि हिमाचल की राजनीति में वीरभद्र सिंह जैसा कद्दावर नेता नहीं है। उन्हें जनता का अपार स्नेह हासिल था। हम उनके मुकाबले कुछ भी नहीं हैं। उन्होंने माना कि मैंने मंडी लोकसभा चुनाव वीरभद्र सिंह के निधन से लोगों में उमडी सहानुभूति के दम पर जीता था। उस दौरान भाजपा के कर्मठ कार्यकर्ता भी कहते थे कि वह राजा साहिब को ही वोट देंगे ,चूंकि प्रदेश को उन्होंने बहुत कुछ दिया है। यह राजा साहब को श्रद्धांजलि का वोट था और जनता से मिले अपार स्नेह से हम चुनाव जीत गये।

हिमाचल कांग्रेस की उपाध्यक्ष रहीं , प्रतिभा सिंह 2004 और 2013 में भी मंडी से लोकसभा सांसद बनीं थीं। हालांकि राजनीति में उन्हें कोई खास अनुभव नहीं रहा। लेकिन कुछ हालात ही ऐसे बने कि उनकी शादी एक राजनीतिक परिवार में हुई और वीरभद्र सिंह की पत्नी के नाते वह राजनीति में भी अपनी जगह बनाने में सफल रहीं है। अपनी भावी रणनीति पर प्रतिभा सिंह ने कहा कि यह धारणा गलत है कि प्रदेश में कांग्रेस सिमट रही है। उन्होंने कहा कि आने वाले चुनावों में सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी दल कांग्रेस के बीच ही मुकाबला होगा। यहां आम आदमी पार्टी को कोई अस्तित्व नहीं है। यहां पहले भी भाजपा व कांग्रेस का मुकाबला रहा है। व तीसरे विकल्प की बात को प्रदेश के लोगों ने नकारा है। प्रतिभा सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह शिमला ग्रामीण से विधायक हैं, उनके मामले में वह चाहती हैं उनका बेटा अपनी मंजिल खुद तय करे। वह बताती हैं कि उन्हें मेहनत करनी होगी व लोगों का विश्वास जीतना होगा।

राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार रविन्दर सूद मानते हैं कि प्रतिभा सिंह को कमान मिलने से कांग्रेस में नई उर्जा का संचार हुआ है। जो कार्यकर्ता हताश था, वह अब सक्रिय होगा और प्रतिभा सिंह को वीरभद्र सिंह का लाभ तो होगा। लेकिन जिन्हें टिकट नहीं मिलेगा, उन्हें अपने साथ चलाना भी तो आसान नहीं है। उनका मानना है कि कांग्रेस को मंडी व सोलन में भले ही लाभ रहेगा। लेकिन कांगडा में पार्टी की मुश्किलें कम नहीं होगी। बदलते हालात में लोगों का आप के प्रति झुकाव और कांग्रेस नेताओं के प्रति घटता विशवास बड़ी चुनौती है। सूद मानते हैं कि कांग्रेस व खुद प्रतिभा सिंह को टिकट आवंटन के समय उभरने वाली चुनौती से पार पाना आसान नहीं होगा। देखना होगा प्रतिभा सिंह चुनावों के लिये क्या रोडमैप लेकर सामने आती हैं।

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