बहनों ने तेजाब डालकर जफां का खूबसूरत चेहरा जलाया, सेना के जवान ने की शादी
शिमला। हुस्न के तो सब दीवाने होते हैं लेकिन हुस्न जब बेनूर हो जाये तो कम ही लोग ऐसे होते हैं जो पीछे नहीं हटते। कुछ ऐसा ही वाकया हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा का है जहां एक सुंदर युवती पर अपने ही लोगों ने तेजाब से हमलाकर उसकी खूबसूरती को बेनूर कर दिया लेकिन उसे चाहने वाले युवक में उसके प्रति दीवानगी कम नहीं हुई। युवक ने युवती को अपनाया उसके साथ निकाह कर उसे अपने घर ले आया।

जफां के चेहरे पर तेजाब हमला
हिमाचल प्रदेश में जाकिर व जफां की प्रेम कहानी आज हर जुबान पर है। सरहद पर देश की रक्षा करने के लिए पूरे जज्बे के साथ डटे रहने वाले कांगड़ा जिला के खुंडियां के रहने वाले जाकिर ने समाज के लिए भी एक मिसाल कायम करते हुये जफां (शालू) पर तेजाब हमले में चेहरे झुलसने के बाद भी उसके मंगेतर ने जफां के साथ निकाह किया।

मंगेतर ने कराया इलाज
दरअसल बीते माह 6 नवंबर को जाकिर व जफां की निकाह होना तय था लेकिन 26 अक्तूबर को लंज के चकवन डूहकी में दो चचेरी बहनों ने विवाद के बाद अपने ही चाचा की लड़की जफां पर तेजाब फेंक दिया था। इस हमले में जफां काफी गंभीर हो गईं व निकाह को एन वक्त पर मुल्तवी करना पड़ा। जाकिर के मन में अपनी मंगेतर के प्रति प्रेम कम नहीं हुआ। उन दिनों चीन सीमा पर सेवाएं दे रहे जफां के मंगेतर जाकिर घर छुट्टी पर आए थे। जब उसको इस वारदात का पता चला तो वह अपने आपको रोक नहीं पाये व अपनी मंगेतर जफां का इलाज कराने के लिए कांगड़ा के टांडा मेडिकल कॉलेज ले आये। वहां वह कांगड़ा से लेकर आईजीएमसी शिमला और पीजीआई चंडीगढ़ तक अपनी मंगेतर जफां की देखरेख करता रहा। इस दौरान हमले के सिलसिले में फिलहाल शालू की दोनों चचेरी बहनें और सगी ताई पुलिस हिरासत में हैं।

जफांं से किया निकाह
जफां अब बदला हुआ नाम शालू का पति जाकिर चीन सीमा पर तैनात है। जाकिर ने शालू पर हुए इस हमले में कहा कि अगर निकाह के बाद तेजाब वाली घटना होती तो क्या वह अपनी पत्नी का इलाज नहीं कराता। उसने कहा कि निकाह ही दो दिलों का बंधन होता है। इलाज के दौरान वह अपनी पत्नी के साथ ही हर पल रहा।

जाकिर ने दी नई जिंदगी
वहीं जफां के पिता मुन्शीद्दीन ने बताया कि जाकिर ने किसी की परवाह किए बिना उनकी बेटी का साथ दिया। उसने इस हमले के बाद भी जफां से निकाह करने की बात कही, जिसे हम भी नकार नहीं सके। दोनों का निकाह बड़ी सादगी के साथ कर दिया गया। अभी भी जफां का इलाज चल रहा है। हर रोज मरहम पट्टी के लिए ज्वालामुखी अस्पताल जाना पड़ता है। जफां मानती है कि उसे जाकिर ने नई जिंदगी दी है।












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