शैलबाला हत्याकांड: पांच लाख की आर्थिक मदद लेने से परिवार का इंकार, की फांसी की मांग
शिमला। कसौली गोलीकांड की शिकार हुई शैल बाला के परिजनों को हिमाचल सरकार पांच रूपये देने में नाकाम रही है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि यह राशी शैल बाला के परिजनों को दी जाए। लेकिन सरकार की इस राशी को परिवार ने ठुकरा दिया है। व कातिल के लिये फांसी की मांग की है। वहीं हिमाचल कैबिनेट की बैठक में आज अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए अपने प्राणों का त्याग करने वाली सहायक शहरी एवं ग्राम नियोजक स्व. श्रीमती शैल बाला को श्रद्धांजलि देते हुए जिला मंडी की राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बलद्वाड़ा का नाम श्रीमती शैल बाला राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बलद्वाड़ा रखने का निर्णय लिया गया है।

दरअसल प्रदेश के मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर अपने कैबिनेट के सहयोगियों के साथ शैल बाला के घर शोक संतप्त परिजनों से मिले तो उन्होंने इस राहत राशी का चेक भी उन्हें सौंपने की कोशिश की। लेकिन उन्हें व उनके मंत्रियों को परिजनों के गुस्से का सामना करना पड़ा व परिवार ने सरकार की इस पेशकश को ठुकरा दी। जिससे सीएम को भी यहां विकट परिस्थितयों का सामना करना पड़ा। मुख्यमंत्री के सामने ही मृतका के पति और पुत्र ने सरकार की इस नाकामी पर खूब खरी-खोटी सुनाई।
शैल बाला के पति डा. वेद प्रकाश ने कहा कि यह प्लांड मर्डर था। फायर होने पर पुलिस दुम दबाकर भाग गई। बड़ी हैरानी है कि कातिल 24 घंटे एक जगह छुपा रहा, लेकिन पुलिस उसे पकड़ नहीं सकी। उनकी पत्नी को ईमानदारी का ईनाम मिला है। उसका स्वास्थ्य ठीक नहीं था और वह मेडीकल लीव पर भी जा सकती थी, लेकिन उसमे ईमानदारी का जज्बा भरा था। उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा कि इस केस में कोई भी आरोपी छूटना नहीं चाहिए और सभी लापरवाह अधिकारियों को सस्पैंड किया जाए।
शैल बाला के 82 वर्षीय पिता जगदीश दत्त शर्मा को इस बात का गर्व है कि उनके तीन बेटे और एक बेटी कभी भ्रष्टाचार की राह पर नहीं चले और ईमानदारी से अपना कर्तव्य निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज प्रशासन इस घटना के बाद जागा है और इसके लिए उन्हें अपने परिवार की इकलौती बेटी की कुर्बानी देनी पड़ी। उन्होंने इस घटना के लिए जिला प्रशासन को पूरी तरह से जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि इस हादसे को चूक कहा जा रहा है जबकि यह पूरी तरह से प्रशासन की लापरवाही के कारण हुआ है। उन्होंने कहा कि जब इतनी बड़ी कार्रवाई होने जा रही थी तो क्या वह उस वक्त सोया हुआ था।
उन्होंने कहा कि वह इस घटना को किसी भी लिहाज से चूक नहीं मान सकते क्योंकि यह उनकी गलती है जो वहां पर तैनात किए गए थे। जगदीश ने बताया कि घटना से 2 दिन पहले ही उन्होंने अपनी बेटी को आगाह कर दिया था और कसौली में कार्रवाई करने के दौरान संभल कर काम करने की सलाह दी थी। उन्होंने बताया कि घटना से पहले उनकी बेटी का उन्हें फोन आया था। पिता को तजुर्बा था कि यह काम कोई आसान बात नहीं इसलिए उन्होंने अपनी बेटी को चेता दिया था। शर्मा ने कहा कि उनकी बेटी शेरनी की तरह थी और उसकी तरह ही वह मैदान में चली गई। इनके अनुसार उनकी बेटी को वहां खरीदने की कोशिश भी की गई लेकिन उसने ऐसा कोई भी काम करने से इनकार कर दिया।
मृतका के पिता जगदीश दत्त शर्मा ने कहा कि उनकी बेटी बहादुर थी और उसे अतिक्रमण हटाए जाने से रोके जाने को लेकर कई प्रलोभन भी दिए गए, लेकिन वह ईमानदारी से अपनी ड्यूटी करते हुए शहीद हुई। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी की मौत की जिम्मेदार अफसरशाही रही है। ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो, सरकार इस बारे में सोचे। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि जिस स्कूल में उसकी मेधावी बेटी पढ़ी है, उस स्कूल का नामकरण शैल बाला के नाम से किया जाए।
इस अवसर पर सीएम जय राम ठाकुर ने कहा कि शैल बाला ने होटल मालिकों द्वारा अवैध निर्माण के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार अपने दायित्व का पालन करते हुए अपने प्राण गंवाए हैं। दुख की इस घड़ी में राज्य सरकार शोक संतप्त परिवार के साथ है और उन्होंने सरकार की ओर से हरसंभव सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया। उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि इस केस में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। सरकार अपना काम कर रही है। कोर्ट अपना काम कर रहा है और हम उसका पालन कर रहे हैं। दोबारा ऐसी घटना न हो, इस बारे भी सरकार कार्य कर रही है।












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