हिमाचल चुनाव 2017: सीट नंबर 68 किन्नौर (आरक्षित अनूसूचित जाति) विधानसभा क्षेत्र के बारे में जानिये
शिमला। किन्नौर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र हिमाचल प्रदेश विधानसभा के 68 निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है। किन्नौर जिले में स्थित यह निर्वाचन क्षेत्र अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। 2012 में इस क्षेत्र में कुल 51,850 मतदाता थे। 2012 के विधानसभा चुनाव में जगत सिंह नेगी इस क्षेत्र के विधायक चुने गए। किन्नौरों की भूमि किन्नौर हिमाचल प्रदेश के उत्तर पूर्व में स्थित एक जिला है। किन्नौर जिले का मुख्याल्य रिकांग पिओ है। ऊंचे-ऊंचे पहाडों और हरे-भरे पेडों से घिरा यह क्षेत्र ऊपरी, मध्य और निचले किन्नौर के भागों में बंटा हुआ है। यहां पहुंचने का मार्ग दुर्गम होने के कारण यह क्षेत्र बहुत लंबे समय तक पर्यटकों से अछूता रहा है, लेकिन अब साहसिक और रोमांचप्रिय पर्यटक यहां बडी संख्या में आने लगे हैं।

प्राकृतिक द्श्यावली से भरपूर इस ज़िले की सीमा तिब्बत से सटी हुई है, जो इसे सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाती है। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से लगभग 250 किलोमीटर दूर राष्ट्रीय राजमार्ग 22 पर यह नगर स्थित है। पहाडों और जंगलों के बीच कलकल ध्वनि से बहती सतलुज और स्पीति नदियों का संगीत यहां की सुंदरता में चार चांद लगा देता है। स्पीति नदी आगे चलकर खाब में सतलुज से मिल जाती है। विश्व की विशालतम जांस्कार और महान हिमालय पर्वत श्रृंखलाओं के आकर्षक दृश्य यहां से देखे जा सकते हैं।

किन्नौर राज्य रामपुर बुशहर रियासत का एक अंग था। यहां पर बहुपति प्रथा पाई जाती है। यहां के प्रसिद्ध राजा थे-प्रतमपाल, चतरसिंह तथा केहरी सिंह, जिसे 'अजान बाहु' नाम से भी जाना जाता था। 13 नवम्बर 1914 को बुशहर रियासत का अंतिम शासक राजा पद्मसिंह गद्दी का बैठा तथा उसने 1947 तक शासन किया। सन् 1948 में बुशहर राज्य केंद्र शासित चीफ कमीश्नर क्षेत्र हिमाचल प्रदेश का हिस्सा बना। 1960 तक वर्तमान किन्नौर जिला, महासू जिला की मिनी तहसील बना। 21 अप्रैल 1960 को किन्नौर हिमाचल प्रदेश का छठा जिला बना। किन्नौर हैंडलूम और हस्तशिल्प के सामानों के लिए प्रसिद्ध है। यहां से शॉल, टोपियां, मफलर, लकड़ी की मूर्तिया और धातुओं से बना बहुत-सा सामान खरीदा जा सकता है। इसके अतिरिक्त किन्नौर फलों और ड्राई फूडस के उत्पादन के लिए भी बहुत जाना जाता है।यहां का नारायण नागनी मंदिर स्थानीय कला का अनुपम उदाहरण है। कल्पा में अनेक प्राचीन बौद्ध मठ बनें हुए हैं। यह गांव 6,050 मीटर ऊंचे किन्नौर कैलाश के बहुत ही निकट स्थित है। किन्नौर कैलाश को भगवान शिव का शीतकालीन आवास माना जाता है।

राजनैतिक तौर पर देखा जाये तो किन्नौर में बर्फबारी की वजह सदा ही चुनाव अलग से होते रहे हैं। जिससे जनजातीय सीटें हमेशा ही सत्तारूढ़ दल के साथ चलती रही हैं। लेकिन इस बार चुनाव एक साथ हो रहे हैं तो मुकाबला यहां दिलचस्प होगा। यह क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ रहा है। क्षेत्र को तीन भागों कल्पा, निचार व पूह में बांटा जा सकता है। इलाका दुर्गम है। यहां जातिगत राजनिति के आगे हमेशा ही व्यक्तिव हावी रहा है। यही वजह है कि जगत सिंह नेगी ने आसानी से चुनाव जीता।
किन्नौर से अभी तक चुने गये विधायक
वर्ष चुने गये विधायक पार्टी संबद्धता
2012 जगत सिंह नेगी कांग्रेस
2007 तेजवंत सिंह भाजपा
2003 जगत सिंह कांग्रेस
1998 चेत राम नेगी भाजपा
1993 देव राज नेगी कांग्रेस
1990 ठाकुर सेन नेगी भाजपा
1985 देव राज नेगी कांग्रेस
1982 ठाकुर सेन नेगी निर्दलीय
1977 ठाकुर सेन नेगी निर्दलीय

जगत सिंह नेगी को विरासत में मिली है राजनीति
विधानसभा के डिप्टी स्पीकर जगत सिंह नेगी किन्नौर के प्रथम विधायक ज्ञान सिंह नेगी के बेटे हैं। 60 वर्षीय जगत सिंह नेगी बीए लॉ स्नातक हैं। उन्होंने 2012 के चुनावों में भाजपा के प्रत्याशी तेजवंत सिंह नेगी को 6368 मतों से हराया। उनका इलाके में अपना प्रभाव है।












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