हिमाचल चुनाव 2017: सीट नंबर 65 जुब्बल कोटखाई (अनारक्षित) विधानसभा क्षेत्र के बारे में जानिये
शिमला। जुब्बल कोटखाई विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र हिमाचल प्रदेश विधानसभा में सीट नंबर 65 है। शिमला जिले में स्थित यह निर्वाचन क्षेत्र अनारक्षित है। 2012 में इस क्षेत्र में कुल 64,121 मतदाता थे। 2012 के विधानसभा चुनाव में रोहित ठाकुर इस क्षेत्र के विधायक चुने गए। जिला शिमला की हॉट सीट जुब्बल कोटखाई भी इस बार सुर्खियों में है। कि कोटखाई गैंगरेप मर्डर केस में भडक़े अंदोलन के दौरान सबसे ज्यादा डिस्टर्ब इलाका यह ही रहा। यहां के लोग साधन संपन्न् हैं। जिनके जातिवाद कोई मायने नहीं रख यह विधानसभा क्षेत्र इसलिए भी चर्चा में चल रहा है क्योंकि पिछले विधानसभा चुनाव में यहां पर भाजपा को काफी बड़ी हार का सामना करना पड़ा था।

पुनर्सीमांकन के बाद रोहडू विधानसभा क्षेत्र से कटी नावर की करीब 11 पंचायतों को मिलाकर भौगोलिक दृष्टि से जुब्बल कोटखाई नावर नया विधानसभा क्षेत्र सामने आया है और 2012 को चुनाव भी इसी डीलिमिटेशन के आधार पर हुआ था। वैसे यहां पर 1952 में पहला विधानसभा चुनाव हुआ था, जिसमें कांग्रेस के प्रत्याशी बालानंद चौहान ने चुनाव जीता था। इसके बाद 1957 में ठाकुर रामलाल ने चुनाव लड़ा और कांग्रेस टिकट पर वह चुनाव जीते थे। वर्ष 1983 में यहां से मुख्यमंत्री वीरभद्र सिहं ने भी चुनाव लड़ा था और 1990 तक वह यहां से विधायक रहे, जबकि इसके बाद 2002 तक फिर ठाकुर रामलाल ने जुब्बल कोटखाई से लगातार चुनाव जीते, लेकिन इस बीच उनकी मृत्यु हो गई। 2003 के विधानसभा चुनाव में उनके ठाकुर रामलाल के पोते व वर्तमान विधायक रोहित ठाकुर तथा नरेंद्र बरागटा के बीच चुनाव हुआ,जिसमें रोहित ठाकुर ने 6800 वोटों से चुनाव जीता था। इसके बाद 2007 में फिर विधानसभा चुनाव हुए जिसमें नरेंद्र बरागटा ने रोहित ठाकुर को 2800 वोटों से हरा दिया था।
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इसके बाद 2012 के विधानसभा चुनाव में रोहित ठाकुर ने पूर्व बागबानी मंत्री रहे नरेंद्र बरागटा को 9300 वोटों से हरा दिया था। जुब्बल कोटखाई विधानसभा क्षेत्र में इस बार भी मुकबाला सीधे तौर पर कांग्रेस व भाजपा के बीच है। पिछले आंकड़ों पर गौर किया जाए तो इस विधानसभा क्षेत्र से 1952 के लेकर अब तक कांग्रेस ही जीतती आई है,मात्र एक बार 2007 में नरेंद्र बरागटा ने भाजपा की सीट जीती है। यानी भाजपा एक बार ही अभी तक चुनाव जीत पाई है। पिछले चुनाव में जीत का अंतर अधिक होने से इस क्षेत्र में भाजपा के लिए वापसी करना भी सबसे बड़ी चुनौती है।

इस विधानसभा क्षेत्र का इतिहास एक बड़ा रोचक भी है कि यहां से एक बार मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह विधानसभा का चुनाव हार गए थे, उनका मुकाबला ठाकुर रामलाल के साथ हुआ था जिसमें ठाकुर रामलाल चुनाव जीत गए थे। हालांकि वीरभद्र सिंह ने उस दौरान रोहडू व जुब्बल कोटखाई दो विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ा था, जिसमें वह रोहडू की सीट तो जीत गए थे लेकिन जुब्बल कोटखाई से वह चुनाव हार गए थे। सेब बाहुल क्षेत्र होने से यहां के लोग साधन संपन्न हैं, इसलिए यहां पर राजनीतिक रूप से माहौल गरमाया रहता है। पुनर्सीमांकन के बाद इस क्षेत्र में नए समीकरण उभर कर सामने आए हैं और इस बार इस विधानसभा क्षेत्र पर भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
जुब्बल कोटखाई से अभी तक चुने गये विधायक
वर्ष चुने गये विधायक
2012 रोहित ठाकुर कांग्रेस
2007 नरेंदर बरागटा भाजपा
2003 रोहित ठाकुर कांग्रेस
1998 राम लाल कांग्रेस
1993 राम लाल कांग्रेस
1990 राम लाल जनता दल
1985 वीरभद्र सिंह कांग्रेस
1982 राम लाल कांग्रेस
1977 राम लाल कांग्रेस

रोहित को विरासत में मिली राजनिति
रोहित ठाकुर को राजनिति विरासत में मिली। उनके दादा राम लाल ठाकुर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री व आंध्र प्रदेश के गर्वनर रहे हैं। 14 अगस्त 1974 को जन्मे रोहित ठाकुर ग्रेजूयेट हैं। 2012 में पूर्व बागबानी मंत्री नरेंद्र बरागटा को 9095 मतों से हराकर कांग्रेस टिकट पर चुनाव जीतकर आए रोहित ठाकुर सरकार में मुख्य संसदीय सचिव बने। व इस बार फिर चुनावी मैदान में हैं।












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