हिमाचल प्रदेश चुनाव 2017: सीट नंबर 50 अर्की (अनारक्षित) विधानसभा क्षेत्र के बारे में जानिये

शिमला। अर्की विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र हिमाचल प्रदेश विधानसभा में सीट नंबर 50 है। सोलन जिले में स्थित यह निर्वाचन क्षेत्र अनारक्षित है। 2017 में इस क्षेत्र में कुल 84834 मतदाता है। 2012 के विधानसभा चुनाव में गोविन्द राम शर्मा इस क्षेत्र के विधायक चुने गए। स्वतन्त्रता पूर्व अर्की बाघल रियासत के नाम से प्रसिद्ध थी। उपमण्डल में प्राचीन मन्दिरों व गुफाओं की भरमार है। यहां नगर के शीश पर पवित्र लुटरू महादेव गुफा स्थित है। लुटरू महादेव रूद्र रूप शिवजी की आदि गुफा है। आदि काल से प्राकृतिक स्वनिर्मित शिवलिंग के कारण बाघल रियासत की स्थापना से पूर्व साधु सन्त यहां एकान्त वास करते रहे हैं।

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डेरा बाबा लुटरू ऊना की तरह यह भी रूद्र शिव का पावन स्थल है। लुटरू शब्द रूद्र ,रूदर, लुदर, लुदरू और लुटरू में भाषा परिवर्तन से अस्तित्व में आया। प्राचीन लुटरू महादेव गुफा एक प्राकृतिक चमत्कार की तरह है। आग्रेय चट्टानों से निर्मित इस गुफा की लम्बाई पूर्व से पश्चिम की तरफ लगभग 25 फूट तथा उत्तर से दक्षिण की ओर 42 फूट है । गुफा की ऊंचाई तल से 6 फूट से 30 फूट तक है। यह इस प्रकार स्वनिर्मित है कि वर्षाकाल में पानी की बौछारे आसमान से इसमें प्रवेश नहीं कर सकती। गुफा के ऊपर ढलुआ चट्टान के रूप में एक कोने से प्रकाश अन्दर आ सकता है।

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गुफा की ऊंचाई समुद्र तल से लगभग 5500 फूट है तथा इसके चारों ओर 150 फूट का क्षेत्र एक विस्तृत चट्टान के रूप में फैला है। गुफा के अन्दर मध्य भाग में 8 ईन्च लम्बी प्राचीन प्राकृतिक शिव की पिंडी विद्यमान है। गुफा की छत में परतदार चट्टानों के रूप में भिन्न-भिन्न लम्बाईयों के छोटे-बड़े गाय के थनों के आकार के शिवलिंग दिखाई पड़ते हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार इनसे दूध की धारा बहती थी लेकिल अब वर्तमान में इन प्राकृतिक थनों से पानी की कुछ बुन्दे टपकती रहती हैं जिन्हें देख कर आज भी मानव आश्चर्यचकित हो जाता है।

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लुटरू गुफा को भगवान परशुराम की कर्म स्थली भी कहा जाता है। सहस्र बाहु को मारने के बाद जब परशुराम पिता के आदेश से शिव की अराधना करने हिमालय में आए थे तो उनके चरण यहां पड़े थे। पौराणिक मान्यता के अनुसार राजा भागीरथ के प्रयत्न से गंगा स्वर्ग में शिवजी की जटाओं में सिमटी थी तो इसके छींटे यहां लुटरू धार पर भी पड़े थे जो आज भी शकनी गंगा के रूप में विद्यमान है तथा यही से अर्की नगर के लिए पानी की आपूर्ति की जाती है ।

1805 ई. में गोरखों ने जब बाघल रियासत पर आक्रमण किया था तो गुफा को उस समय उन्होंने अपना आवास बनाया था। गोरखा सेनापति अमर सिंह राणा ने अर्की नगर को बाघल रियासत की राजधानी बनाया था। आज से 40 वर्ष पूर्व बाबा शीलनाथ जी यहां बैठा करते थे जो पंजाब के चमकौर साहिब के शिव मन्दिर के महान महात्माओं में से एक थे। वर्ष 1982 में केरल राज्य में जन्में महात्मा सन्मोगानन्द सरस्वती जी महाराज का यहां आगमन हुआ था जिन्होंने इसका विस्तार करने में खासी रूचि दिखाई थी। आज यहां उनकी समाधि बनी है। यहां आज भी लोग दूर-दूर से गुफा के दर्शन करने आते हैं। हर वर्ष महाशिवरात्रि के पर्व को यहां विशाल मेला लगता है। राजनीतिक तौर पर देखा जाये ,तो ब्राहम्ण बहुल्य चुनाव क्षेत्र है। अर्की पिछले दिनों उस समय सुर्खियों में आया, जब खुद वीरभद्र सिंह ने कहा कि अर्की के लोग चाहते हैं कि वह अर्की से चुनाव लड़ें। हालांकि अब वीरभद्र सिंह ठियोग से चुनाव लडऩे जा रहे हैं।

अर्की से अभी तक चुने गये विधायक
वर्ष चुने गये विधायक पार्टी संबद्धता
2012 गोविन्द राम शर्मा भाजपा
2007 गोबिंद राम भाजपा
2003 धरम पाल ठाकुर कांग्रेस
1998 धरम पाल ठाकुर कांग्रेस
1993 धरम पाल कांग्रेस
1990 नगीन चन्द्र पाल भाजपा
1985 हीरा सिंह पाल कांग्रेस
1982 नगीन चन्द्र पाल भाजपा
1977 नागिन चन्द्र पाल जनता पार्टी

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साधारण परिवार से राजनिति में आये गोविन्द राम शर्मा
साधारण परिवार से राजनिति में आये 62 वर्षीय गोविन्दर राम शर्मा मैटरिक तक शिक्षा हासिल की है। उनके दो बेटे व एक बेटी है। उन्होंने 2007 में अर्की से विधायक चुने गये। बाद में 2012 में भी चुनाव जीता। 2012 में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी संजय अवस्थी को 2075 मतों से हराया था। अपने चुनाव क्षेत्र में गोविन्द खासे लोकप्रिय नेता हैं। उन्हें लोग शरीफ नेता मानते हैं।
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