हिमाचल चुनाव 2017: चुराह (आरक्षित अनूसूचित जाति ) विधानसभा क्षेत्र के बारे में जानिये
2008 के परिसीमन के बाद चुराह विधानसभा सीट बनाया गया। यहां 2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी हंस राज ने हासिल की और विधायक बने। यहां के दुर्गम इलाके अभी भी बहुत पिछड़े हैं।
शिमला। हिमाचल प्रदेश के आखिरी छोर पर जम्मू कश्मीर सीमा से सटा विधानसभा क्षेत्र चुराह कांगड़ा संसदीय चुनाव क्षेत्र में चंबा जिला में है। विधानसभा की सीट नंबर एक चुराह अनूसूचित जाति के लिये आरक्षित है। यह क्षेत्र साल 2008 में, विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आया। 2012 में इस क्षेत्र में कुल 61,120 मतदाता थे।

भाजपा के हंस राज चुराह के पहले विधायक
इससे पहले इसे राजनगर निर्वाचन क्षेत्र के रूप में जाना जाता था। विधानसभा परिसीमन के दौरान चंबा जिला की चुराह तहसील व चंबा तहसील का राजनगर कानूनगो सर्कल का मिलाकर नया चुराह विधानसभा चुनाव क्षेत्र बना। इस सीट पर 2012 में हुये चुनावों में चुराह के पहले विधायक भाजपा के हंस राज चुनाव जीते थे।
हंस राज ने कांग्रेस प्रत्याशी सुरेन्दर भारद्वाज को हराया था। इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी हंस राज को 24978 मत मिले तो कांग्रेस प्रत्याशी सुरेन्दर भारद्वाज को 22767 मत हासिल हुये। कांगड़ा से लोकसभा सांसद शांता कुमार हैं। कांगड़ा व चंबा जिला के भरमौर को छोड़कर कांगड़ा चंबा संसदीय चुनाव क्षेत्र बनाया गया है। यही वजह है कि इसे कांगड़ा चंबा संसदीय चुनाव क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। इससे पहले राजनगर से 2007 में कांग्रेस के सुरेन्दर भारद्वाज व 2003 में कांग्रेस के चुनावों में भी सुरेन्दर भारद्वाज चुनाव जीते थे। 1998 में यहां से भाजपा के मोहन लाल चुनाव जीते। इससे पहले राजनगर में कांग्रेस के विद्याधर विधायक व मंत्री रहे।

बहुत पिछड़ा इलाका है चुराह
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक चुराह विधानसभा क्षेत्र में कुल रजिस्टर्ड मतदाता 66015 हैं। जिनमें पुरुष 33965 मतदाता हैं। जबकि महिला 32050 मतदाता हैं। यहां पोलिंग बूथ 118 हैं।
इलाका आज भी बेहद पिछड़ा है। जम्मू कश्मीर से सटी सीमा तक लोग रहते हैं। लेकिन अंदरूनी इलाके में सड़क मार्ग का अभाव है। लोगों की यहां अपनी अलग जिंदगी है। यहां अनसूचित जाति के अलावा मुस्लिम गुज्जर ,गद्दी व दूसरी जातियों के लोग भी रहते हैं। यहां करीब 26 प्रतिशत अनुसूचित जाति के मतदाता हैं। जबकि 9 प्रतिशत मुसलमान व पांच प्रतिशत गुज्जर मतदाता भी हैं। इलाके की भागौलिक परिस्थितयां ऐसी हैं कि बर्फबारी के दौरान यहां जिंदगी थम सी जाती है।

चुराह विधानसभा सीट पर नजर
साक्षरता दर में कई राज्यों से बढ़त बनाने वाले हिमाचल प्रदेश के दुर्गम इलाके चुराह में आज भी कई बच्चे स्कूल ही नहीं जा रहे। कइयों ने स्कूल जाना छोड़ दिया है। चुराह तहसील के अधिकतर लोग खेती-बाड़ी करते हैं या पशुपालन। लोग पढ़ाई से ज्यादा खेत व घरों के काम को प्राथमिकता देते हैं। इसलिए बच्चों को स्कूल भेजने का रुझान कम है। चुराह तीसा ब्लॉक में आता है। यहां करीब 42 पंचायतों के 264 गांव हैं। हिन्दी व पहाड़ी भाषा लोग बोलते हैं।
चुराह विधानसभा क्षेत्र एक नजर में
- यह विधानसभा सीट नंबर 1 है।
- जिला: कांगड़ा
- लोकसभा क्षेत्र: कांगड़ा चंबा
- जनसंख्या: 70697
- साक्षरता: 51 प्रतिशत
- शहरीकरण: नहीं,इलाका ग्रामीण

एक पाइप फिटर का बेटा जब बना विधायक
2012 के विधानसभा चुनावों में चुराह से चुनाव जीते हंस राज आईपीएच विभाग के पाइप फिटर के बेटे हैं। राजनिति उन्हें विरासत में नहीं मिली। लेकिन उन्होंने सुरेन्दर भारद्वाज जैसे दिगज को धूल चटाई। सुरेन्दर भारद्वाज के पिता विद्याधर प्रदेश के मंत्री रहे थे। खुद भारद्वाज राजनगर से दो बार विधायक चुने जाते रहे। लेकिन 2012 में यहां बदलाव आया। एक साधारण परिवार का बेटा विधायक बन गया। हंस राज समाजशास्त्र में एम फिल हैं। शिक्षक होने के साथ कई अंदोलनों में भाग ले चुके हैं।
गिम्मी हाइड्रो प्रोजेक्ट का आंदोलन हंस राज के जीवन में नया मोड़ लेकर आया, तरेला में एक बहुत बड़ा आंदोलन हुआ जिसमें हंस राज एक जुझाारू नेता के रूप में उभर कर सामने आये। वह उसके बाद जिला परिषद में चुने गये और विधायक का चुनाव भी जीता। हिमाचल विधानसभा में वह सबसे एक्टिव विधायकों में रहे हैं। उन्होंने हर सेशन में करीब 100 सवाल किये।
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