हिमाचल: गद्दी समुदाय पर हुये लाठीचार्ज के बाद हंगामा क्यों है बरपा?

प्रदेश के चंबा व कांगड़ा जिलों में करीब 13 विधानसभा क्षेत्रों में गद्दी समुदाय के मतदाता हैं जो किसी भी राजनैतिक दल की तकदीर व तस्वीर बदलने का माद्दा रखते हैं।

शिमला। चुनावी मौसम में सीएम वीरभद्र सिंह की जुबान क्या फिसली, विपक्षी दल भाजपा को कांग्रेस को चित्त करने का एक अच्छा-खासा हथियार मिल गया। प्रदेश के चंबा व कांगड़ा जिलों में करीब 13 विधानसभा क्षेत्रों में गद्दी समुदाय के मतदाता हैं जो किसी भी राजनैतिक दल की तकदीर व तस्वीर बदलने का माद्दा रखते हैं। यही वजह है कि वीरभद्र सिंह की ओर से गद्दी समुदाय के ऊपर की गई टिपणी पर प्रदेश में खासा बवाल मचा है व धर्मशाला में इस मामले पर इन दिनों धरने प्रदर्शन हो रहे हैं।

गद्दी समुदाय में आक्रोश, विरोध प्रदर्शन

गद्दी समुदाय में आक्रोश, विरोध प्रदर्शन

मुख्यमंत्री के बयान के बाद किशन कपूर गद्दी समुदाय के साथ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे कि पुलिस ने यहां लाठीचार्ज कर दिया जिसके बाद मामला इस कदर भड़का कि आज तक माहौल शांत नहीं हो पाया है। भाजपा इस मामले को चुनावों तक जिन्दा रखना चाह रही है। यही वजह है कि भाजपा के राष्ट्रीय स्तर के नेता भी लगातार धर्मशाला पहुंच रहे हैं। इस मामले में कांग्रेस भी पीछे नहीं है।

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने लिया जायजा

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने लिया जायजा

गद्दी समुदाय के ऊपर हुए लाठीचार्ज मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने घटनास्थल का जायजा लिया। इस दौरान आयोग के चेयरपर्सन नन्द कुमार राय व उनके साथ आई 4 सदस्यीय टीम ने लाठीचार्ज में घायल हुए गद्दी समुदाय के लोगों का पक्ष सर्किट हाऊस में रिकॉर्ड किया व कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी अभिव्यक्ति की आजादी है लेकिन जिस तरह पहले गद्दी समुदाय पर बयानबाजी की गई और बाद में लाठीचार्ज किया गया, वह निंदनीय है। उन्होंने कहा कि आयोग ऐसा कदम उठाएगा, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और शासन व प्रशासन जनजाति के लोगों की आवाज को दबाने का प्रयास न करे। आयोग इस संबंध में गंभीर है। उन्होंने कहा कि मैंने घटना स्थल का दौरा कर समाज के पीड़ित लोगों से तथ्य जानने का प्रयास किया, उससे नहीं लगता है कि यह लाठीचार्ज है, यह तो एक निहत्थे लोगों पर हमला किया गया है और ऐसे दोषी अधिकारियों व कर्मियों पर कानून को सख्त कार्रवाई अमल में लानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि लाठीचार्ज करने के नियम निर्धारित हैं। किसी भी तरह के समूह द्वारा प्रदर्शन द्वारा अगर वह समूह नियंत्रण से बाहर हो जाए तो उन पर पहले चेतावनी के तौर पर पानी की बौछार करनी होती है, उसके बाद भी भीड़ नियंत्रित न हो तो आंसू गैस का प्रयोग किया जाता है और फिर भी भीड़ न माने तो पुलिस पीछे से टांगों पर वार करती है। पीड़ित लोगों ने बताया कि घटनास्थल पर बिना नंबर के वाहन व सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी भारी संख्या में तैनात किए गए थे। नंद लाल ने कहा कि इन्हीं तथ्यों के आधार पर मैं यह कह सकता हूं कि यह एक हमला है और दोषियों पर कार्रवाई हो।

'गद्दी समुदाय के उपहास का लेंगे बदला'

'गद्दी समुदाय के उपहास का लेंगे बदला'

धर्मशाला आये भाजपा अनुसूचित जनजाति प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राम विचार नेताम ने कहा कि गद्दी समुदाय के उड़ाए उपहास व लाठीचार्ज का बदला आगामी विधानसभा चुनाव में लिया जाएगा। गद्दी समुदाय के लोग उनके साथ हुई इस घटना को अपनी गांठ में बांधकर रखें और इस बारे घर-घर जाकर बताएं। कांग्रेस की नैया डूबने वाली है और देश व हिमाचल कांग्रेस का कांग्रेस नेतृत्व विचलित हो चुका है, तभी ऐसा काम कर रहा है।

वहीं सांसद शांता कुमार ने कहा कि हिमाचल के सबसे अनुभवी नेता व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह द्वारा गद्दी समुदाय का पहले अपमान करना बाद में लाठीचार्ज करवाना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि घटना के बाद मुख्यमंत्री ने आज तक समुदाय के लोगों से माफी भी नहीं मांगी है। उन्होंने कहा कि वह इस कृत्य की निंदा करते हैं। दरअसल, मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की तथाकथित विवादास्पद टिप्पणी पर हंगामा इसलिए मचा, क्योंकि कांगड़ा-चंबा और मंडी संसदीय क्षेत्र की करीब 13 विधानसभा सीटों पर गद्दी वोट बैंक जीत और हार के लिए सीधा प्रभाव डालता है। कांगड़ा और मंडी संसदीय क्षेत्र में गद्दी समुदाय का करीब साढ़े 3 से 4 लाख का वोट बैंक है।

चुनावी समीकरण के हिसाब से गद्दी समुदाय अहम

चुनावी समीकरण के हिसाब से गद्दी समुदाय अहम

मंडी संसदीय क्षेत्र के तहत चंबा जिले का भरमौर विधानसभा क्षेत्र पूरी तरह गद्दी बहुल है। भाजपा एसटी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं गद्दी नेता त्रिलोक कपूर की मानें तो भटियात में गद्दी समुदाय के करीब 25 हजार वोटर हैं। डलहौजी में करीब 18 हजार, चुराह में 16 हजार, चंबा में करीब 25 हजार वोट बैंक गद्दी समुदाय का है। कांगड़ा जिले की सभी सीटों पर समुदाय का प्रभाव है। पालमपुर विस क्षेत्र में गद्दी समुदाय के सबसे अधिक करीब 21 हजार वोटर हैं। बैजनाथ और सुलह में करीब 10-10 हजार, धर्मशाला में करीब 12 हजार, शाहपुर में करीब 14-14 हजार, नूरपुर में करीब 15 हजार, जवाली में करीब 8 हजार गद्दी वोट बैंक है। मंडी संसदीय क्षेत्र के जोगिंद्रनगर विस क्षेत्र में करीब 8 हजार वोट गद्दी समुदाय से है। इन विस क्षेत्रों में गद्दी समुदाय का बड़ा वोट बैंक चुनाव में क्या असर डालेगा, यह तो वक्त ही बताएगा। इतना जरूर है कि मामला गर्माने के बाद दोनों दलों की धुकधुकी जरूर बढ़ गई है।

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