इराक में मारे गये 39 भारतीयों में 4 हिमाचली युवक, सीएम जयराम ने जताया दुख
शिमला। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इराक के मोसुल शहर में जिन 39 भारतीयों के मारे जाने की बात कबूली है उनमें से चार युवक हिमाचल के भी हैं। जैसे ही यह खबर आई कि इराक में बंधक बनाये गये 39 भारतीय मारे जा चुके हैं, हिमाचल में भी मातम की लहर दौड़ पड़ी। बंधकों के परिजनों की आखिरी उम्मीद भी खत्म हो गई। हलांकि इससे पहले यह आस लगाये बैठे थे कि सरकार के भरोसे के अनुरूप इनकी जल्द वापसी होगी लेकिन अब शायद ऐसा नहीं होगा। इराक में हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा से तीन युवक तो मंडी जिला से एक युवक पिछले अरसे से लापता थे। बाद में बताया गया कि यह चारों युवक भी उन 39 भारतीयों में शामिल हैं जिन्हें आईएसआईएस ने इराक के मोसुल शहर में बंधक बना रखा है। इनमें एक युवक संदीप कुमार जिला कांगड़ा के फतेहपुर धमेटा से था जबकि इंद्रजीत कुमार कांगड़ा के शाहपुर के लंज का रहने वाले था। अमन कुमार धर्मशाला के पासो गांव का रहने वाला था। वहीं हेमराज मंडी के सुंदरनगर का रहने वाला था।

हिमाचल में मातम
2013 में ये चारों रोजगार की तलाश में इराक गए थे जहां से अब इनकी मौत की खबर आ रही है। बता दें कि संसद में मंगलवार विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इनकी मौत की पुष्टि की है। मंडी जिला के सुंदरनगर उपमंडल के बायला गांव का हेमराज पिछले 4 सालों से इराक में लापता है। 31 जुलाई 2013 को हेमराज इराक गया था और वहां पर कुक का काम करता था। हेमराज के साथ 40 भारतीयों का दल था। जब इराक में युद्ध जारी हुआ तो उस समय 14 जून 2014 को हेमराज सहित 39 अन्य भारतीय लापता हो गए। हेमराज की पत्नी निर्मला देवी के अनुसार 14 जून को उनके पति का आखिरी फोन आया था जिसमें उन्होंने बताया कि बम ब्लास्ट के कारण उसकी टांग पर चोट लगी और उन्हें बंधक बना लिया गया है। इसके बाद न तो कोई फोन आया और न ही आज दिन तक हेमराज का पता चल पाया।
यह मामला भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के ध्यान में था और जब सदन में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने 39 शवों के मिलने की बात कही तो पूरे देश में हड़कंप मच गया। हलांकि अभी तक मंडी जिला प्रशासन या फिर लापता हेमराज के परिवार को कोई अधिकारिक सूचना नहीं मिली है। हेमराज के दो बच्चे हैं जिसमें एक बेटा और एक बेटी है। दोनों अभी छोटे हैं और इनकी परवरिश का सारा जिम्मा निर्मला देवी पर है। अब जब वहां पर शव मिलने की जानकारी आई है तो इससे परिवार की बेचैनी और भी बढ़ गई है क्योंकि परिवार को इधर-उधर से ही सूचनाएं मिल रही हैं जबकि अधिकारिक तौर पर कोई सूचना प्राप्त नहीं हो सकी है।

39 भारतीय कामगार किए थे किडनैप
वहीं फतेहपुर के धमेटा के संदीप का डीएनए मैच हो गया है। संदीप के मौत की खबर मिलते ही पूरे गांव में मातम छा गया। वह रोजी-रोटी की तलाश में 16 सितंबर 2013 को संदीप इराक गया था। वह मोसूल शहर में टीएनएच कंपनी में कार्यरत था। 15 जून 2014 को आतंकियों ने उन्हें अन्य 38 भारतीयों के साथ बंधक बना लिया। उसी दिन उन्होंने परिजनों को भी दूरभाष पर सूचित किया था और उसके बाद से संदीप का कोई पता नहीं लग पाया है। उसके घर पर पत्नी चंद्रेश के अलावा बुजुर्ग माता-पिता व आठ साल का बेटा व 11 साल की बेटी की भी है। वह अपने घर का इकलौता सहारा था।
उल्लेखनीय है कि इराक में 2014 में आईएसआईएस आतंकवादियों ने मोसुल के एक कारखाने में काम करने वाले 39 भारतीय कामगारों को किडनैप कर लिया था। तब से सभी भारतीयों की तलाश जारी थी। इन लोगों के जीवित रहने को लेकर भी तरह-तरह के कयास लगाए गए थे। वहीं सरकार ने भी कहा था कि लापता सभी भारतीय जीवित हैं। वीके सिंह खुद इराक गए थे और इस पूरे मामले में उन्होंने इराक में भारत के राजदूत और इरबिल में भारत के महावाणिज्य दूत के साथ मिलकर भारतीयों के बारे में पूरी जानकारी हासिल की थी।

इराक में भारतीयों की कब्र
पिछले तीन वर्षों से भारतीय सरकार की ओर से यह कहा जाता रहा था कि आईएसआईएस की कैद में जो 39 भारतीय हैं वह पूरी तरह से सुरक्षित हैं और जिंदा हैं। वहीं कुर्दिश अथॉरिटीज की ओर से साल 2014 में ही भारतीय मीडिया को यह जानकारी दे दी थी कि उनके पास इस बात के सुबूत हैं कि इस इलाके में एक कब्रें खोदी जा रही हैं। कुर्दिश अथॉरिटीज का मानना था कि ये कब्रें इन्हीं भारतीयों की हो सकती हैं। कुर्दिश इंटेलीजेंस के मुताबिक भारतीय कामगारों को मोसुल में स्थानीय मिलिट्री ने बंदी बनाया गया। इसके बाद मिलिट्री ने उन्हें सद्दाम हुसैन की बाथ पार्टी को सत्ता से बेदखल करने का जिम्मेदार मानते हुए आईएसआईएस के हाथों सजा देने के लिए सौंप दिया।

मुख्यमंत्री ने किया शोक व्यक्त
मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने ईराक के मसूल में 39 बन्धक भारतीयों की मृत्यु पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। इनमें चार हिमाचल प्रदेश से थे। यह सभी भारतीय वर्ष 2014 से लापता थे और केन्द्र सरकार के प्रयासों के बावजूद उनका पता नहीं लगाया जा सका और न ही उन्हें सुरक्षित वापिस लाया जा सका। मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिजनों के प्रति गहरी संवेदनाएं प्रकट करते हुए कहा कि राज्य सरकार दुःख की इस घड़ी में उनके साथ है। जय राम ठाकुर ने कहा कि यह घटना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि क्रूरतापूर्ण व एक अमानवीय कृत्य है, जिसकी प्रत्येक व्यक्ति द्वारा निंदा की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि चार हिमाचलीयों में से तीन कांगड़ा जिले तथा एक मण्डी जिले से था।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने उनके अवशेषों को शीघ्र वापिस लाने के लिए केन्द्र सरकार से सम्पर्क किया है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने सूचित किया है कि पंजाब तथा हिमाचल प्रदेश से सम्बन्ध रखने वाले मृतकों के अवशेष अमृतसर लाए जाएंगे और उसके पश्चात राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश के मृतकों के अवशेषों को उनके जन्म स्थान तक पहुंचाने के लिए सभी प्रबन्ध करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि विदेशों में यदि कोई हिमाचली लापता है, तो राज्य सरकार उसका पता लगाने के लिए मामला केन्द्र सरकार से उठाएगी।
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