कुल्लू के नशे की विदेशों में भारी मांग, जानिए इस काले कारोबार की सच्चाई
हिमाचल प्रदेश की कुल्लू घाटी की मनोरम वादियां इन दिनों नशे के काले कारोबार का गढ़ बन गई हैं।
शिमला। हिमाचल प्रदेश की कुल्लू घाटी की मनोरम वादियां इन दिनों नशे के काले कारोबार का गढ़ बन गई हैं। साल दर साल फल फूल रहे इस कारोबार में न केवल स्थानीय लोग जुड़े हैं बल्कि यह सात संमदर पार यूरोप तक फैलता जा रहा है जिससे हालात विकट होते जा रहे हैं।

पचास हजार एकड़ में गांजे की खेती
कुल्लू में कई स्थानों पर चरस व अफीम उगाई जाती है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि यह इलाका गांजे और अफीम की पैदावार के मामले में देश में पहले स्थान पर है और यहां से इन्हें यूरोप भेजा जा रहा है। मादक पदार्थ और आनन-फानन में कमाई की चाहत विदेशियों को हिमाचल के इन अनजान इलाकों की तरफ खींच रही है। विदेशी यहां मादक पदार्थों के असंगठित कारोबार का हिस्सा बन गए हैं। पुलिस के मुताबिक, अकेले कुल्लू घाटी में पचास हजार एकड़ में गांजे की खेती हो रही है। पिछले पांच सालों में 70 विदेशी मादक पदार्थ निरोधी कानून के तहत यहां पकड़े जा चुके हैं।

कारोबार के पीछे विदेशी ताकत
जाहिर है हिमाचल प्रदेश में नशे का कारोबार विदेशी ताकत के जरिये चलाया जा रहा है। माना जा रहा है कि मणिकर्ण घाटी में विदेशी इस काम को बड़े पैमाने पर कर रहे हैं। यह घाटी विदेशियों की पनाहगाह बन गई है और यहां महीनों तक विदेशी डेरा जमाये रहते हैं। हर पूर्णिमा को यहां होने वाली रेव पार्टियां इस कारोबार को आगे बढ़ाने का साधन बन गई हैं। दिल्ली, मुंबई से लेकर विदेशों तक यह कारोबार चल रहा है।

मलाणा क्रीम नाम की चरस
सस्ते और बढ़िया किस्म के गांजे की चाहत विदेशियों को बड़ी संख्या में यहां खींच रही है। गरीब स्थानीय लोगों के लिए यह फसल सर्वाधिक फायदे का सौदा साबित हो रही है। सरकार जितना इस पर रोक लगाने की कोशिश कर रही है, उतनी ही ज्यादा इनकी खेती बढ़ रही है। बताया जाता है कि मणिकर्ण घाटी में ही मलाणा क्रीम नामक चरस उगाई जाती है। यह चरस इतनी तेज गति से विकसित होती है कि इसका पेड़ 15 से 20 दिनों में ही 20 से 25 फुट तक बड़ा हो जाता है। इस प्रकार इस घाटी में बेतहाशा मलाणा क्रीम उगाई जाती है जिसकी किसी को खबर तक नहीं होती।

नशे का कारोबार करते हुए बस गए कई विदेशी
कुल्लू से पचास किलोमीटर दूर मलाना की वादियों में मलाना क्रीम बनती है। यह गांजे से बनाई गई उम्दा किस्म की हशीश होती है और इसकी पश्चिमी देशों में काफी मांग है। कुल्लू-मनाली में मादक पदार्थों के धंधे में विदेशियों की भागीदारी नई बात नहीं है। कुछ यहां से जाते ही नहीं। कुछ स्थानीय महिलाओं से विवाह कर यहीं बस जाते हैं। एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि पर्याप्त संख्या बल न होने की वजह से इन विदेशियों पर पुलिस काबू नहीं पा सकी है। नारकोटिक्स ब्यूरो के पूर्व अफसर ओ पी शर्मा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स माफिया हॉलैंड और रूस से ज्यादा पैदावार वाले गांजे के बीज स्थानीय किसानों को देते हैं। गांजे और इससे बनी चीजों को फिर यहां से इजरायल, इटली, हालैंड और अन्य यूरोपीय देशों को भेज दिया जाता है।

कई विदेशी हिमाचल की जेलों में बंद
हालात इस कदर बिगड़ते जा रहे हैं कि कुल्लू मनाली में कई वर्षों से सैंकड़ो विदेशी नशा तस्करी के मामले में जेल में बंद हैं। इतना ही नहीं बीते छह माह में 9 विदेशी तस्करों को बड़ी खेप के साथ कुल्लू पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इसी साल कुल्लू पुलिस ने नाइजेरियन के पास डेढ़ किलो हेरोइन पकड़ी और अमेरिकी नागरिक के कब्जे से 12 किलो हशीश नशीला ऑयल के साथ 125 किलो गांजा बरामद किया था। कुल्लू जिला के पर्यटन स्थलों में सिंथेटिक ड्रग्स का प्रचलन बढ़ रहा है। यहां नशा का सेवन करने दिल्ली, चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा से युवा पर्यटक आते हैं। यही वजह है कि कुल्लू पुलिस के नशा मुक्ति के जोरदार अभियान के बावजूद यहां नशा के कारोबार में तेजी आ रही है। कुल्लू के एसपी पदम चंद के मुताबिक, अब तक के आकड़ों की बात करें तो हर साल अवैध तरीके से नशा कारोबार के मामले बढ़ रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर विदेशी तस्करों की गिरफ्तारी में बढ़ोतरी हो रही है।
पिछले चार वर्ष के आंकड़ें
2014 में 110 केस, 122 गिरफ्तारी, 13 विदेशी गिरफ्तार
2015 मे 120 केस, 147 गिरफ्तारी, 6 विदेशी गिरफ्तार
2016 में 122 केस, 142 गिरफ्तारी, 9 विदेशी गिरफ्तार
2017 में अब तक 61 मामले दर्ज, 78 की गिरफ्तारी, 9 विदेशी गिरफ्तार












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