ड्रैगन का नया फरमान, तिब्बती बच्चों पर लगाई ये बंदिश
धर्मशाला, 22 सितंबर: चीन अपनी योजना के मुताबिक तिब्बत की सांस्कृतिक विरासत को पूरी तरह से मिटाने पर लगा हुआ है। शायद कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना को लगता है कि सांस्कृतिक रूप से तोड़ देने के बाद तिब्बत से आजादी की मांग उठने का खतरा हमेशा-हमेशा के लिए टल जाएगा। इसलिए अब उसने तिब्बत की भाषा पर चोट कर दिया है। जिनपिंग सरकार ने हुक्म दिया है कि तिब्बत में भी प्री-प्राइमरी और केजी क्लास के बच्चों से ही मंदारिन भाषा में पढ़ाई अनिवार्य रूप से शुरू कर दी जाए। चीन ऐसा राष्ट्र में भाषा की एकरूपता के नाम पर कर रहा है, लेकिन उसकी चालबाजियों का दर्द झेल रहे तिब्बत के लोग उसके असल इरादे को भांप कर सिहर उठे हैं।

तिब्बती भाषा में बच्चों की शिक्षा बंद
तिब्बती सेंटर फॉर ह्यूमैन राइट्स एंड डेमोक्रेसी (टीसीएचआरडी) के हवाले से खबर है कि चीन ने प्री-स्कूल और केजी के बच्चों को चीन की मुख्य भाषा मंदारिन में सिखाने का फरमान जारी कर दिया है। यह फरमान सभी तरह के जातीय इलाकों और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए है, जिसके तहत सभी स्कूली गतिविधियों में बच्चों को मंदारिन में सिखाना अनिवार्य होगा। रिपोर्ट के मुताबिक यह फरमान जुलाई ही में जारी हो चुका था, लेकिन इस महीने से लागू कर दिया गया है। इस फरमान के मुताबिक '2021 के शुरुआती सेमेस्टर से, सभी जातीय क्षेत्रों और ग्रामीण इलाकों में केजी तक बच्चों की देखभाल और शैक्षिक गतिविधियों के लिए राष्ट्रीय स्तर की भाषा का जहां इस्तेमाल नहीं होता था, वे राष्ट्रीय स्तर की भाषा का ही इस्तेमाल करेंगे, ताकि बच्चों के लिए अच्छी मंदारिन शिक्षा का माहौल बनाया जा सके।' सोमवार को तिब्बत-केंद्रित न्यूज पोर्टल फयूल ने यह रिपोर्ट दी है।

ऐक्टिवस्ट ने चीन के इरादों पर उठाए सवाल
इस पोर्टल के मुताबिक बीजिंग चाहता है कि सभी बच्चे प्री-स्कूल के स्तर से ही एक स्तर की चीनी भाषा सीख सकें, जिससे कि चीनी राष्ट्र के लिए शुरुआती उम्र से ही एक समुदाय का रूप देने में मदद मिल सके। लेकिन, तिब्बती ऐक्टिविस्ट ने इस फरमान को जातीय और ग्रामीण इलाकों की शिक्षा व्यवस्था को एक तरह से कलंकित करने का प्रयास बताया है। फयूल के मुताबिक टीसीएचआरडी के रिसर्चर तेंजिन सांगमो ने कहा है, 'यह योजना इसलिए डिजाइन की गई है ताकि बच्चों के पहले ही कुछ वर्षों में मातृभाषा पर पकड़ को कमजोर किया जा सके। हालांकि, अध्यन से पता चला है कि बच्चे शुरुआती उम्र में एक से अधिक भाषा पकड़ने में सक्षम होते हैं और काफी कुछ उनके माता-पिता पर भी निर्भर करता है। लेकिन, हमें यह निश्चित याद रखना होगा कि इस दृष्टिकोण से अनिवार्य रूप से मंदारिन शिक्षा थोपना पाठ और सांस्कृतिक मूल्यों के लिए भाषा का परिचय पाप कर्म जैसा होगा।'

भाषा का अधिकार जताने पर चीन करता है प्रताड़ित
2021-25 तक की अवधि के बैचों में टीचरों को भी नेशनल कॉमन लैंग्वेज एप्लिकेशन एबिलिटी ट्रेनिंग से गुजरना होगा। ऐक्टिविस्ट को चिंता है कि इस तरह के फरमानों से तिब्बती भाषा का बच पाना मुश्किल होगा। फयूल की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पिछले महीने शराब दोर्जी नाम के एक किशोर को पुलिस ने इसलिए हिरासत में ले लिया था, क्योंकि उसने नगाबा काउंटी के त्रोत्सिक टाउनशिप में स्थानीय सरकार में यह आवेदन दे दिया था कि स्कूली शिक्षा में तिब्बती भाषा को प्राथमिकता मिले।

एक शख्स को पांच साल बाद मिली जेल से रिहाई
यही नहीं चीन ने ताशी वांग्चुक नाम के एक तिब्बती को इसलिए पांच साल तक जेल में डाल दिया था, क्योंकि उसने भाषा के अधिकार को लेकर प्रदर्शन किया था। वह इसी साल जनवरी में सजा पूरी करके निकला है। तिब्बत में भाषा के अधिकार के लिए आवाज उठाना अब असुरक्षित हो चुका है। शी जिनपिंग की सरकार तिब्बत के ऐसे ऐक्टिविस्ट पर सीधे अलगाववाद को भड़काने का आरोप लगाकर सख्त कदम उठाती है। (तस्वीरें- सांकेतिक)












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