हिमाचल: दो निर्दलीय विधायकों को भाजपा में शामिल कराकर सीएम जय राम ने दिया अनुराग ठाकुर को झटका
शिमला, 9 जून। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के बीच आने वाले चुनावों में प्रत्याशी चयन को लेकर तकरार अभी खत्म भी नहीं हुई थी कि सीएम जय राम ठाकुर ने दो निर्दलीय विधायकों को भाजपा में शामिल कराकर धूमल खेमे को नया झटका दे दिया। जिससे भाजपा की राजनीति में एक बार फिर जय राम ठाकुर अपना दबदबा कायम करने में कामयाब हो गये। हिमाचल भाजपा में इन दिनों सबकुछ ठीक नहीं चल रहा। हिमाचल भाजपा में वर्चस्व कायम करने के लिये पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल व उनके बेटे केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर और सीएम जय राम ठाकुर के बीच शीतयुद्ध चल रहा है। गाहे बगाहे दोनों ही नेता इन दिनों एक दूसरे को चुनौती देने में कोई गुरेज नहीं कर रहे हैं जिससे मामला रोचक हो गया है।

इसी के चलते सीएम जय राम ठाकुर ने धूमल खेमे को नया झटका देते हुये देहरा से निर्दलीय विधायक होशियार सिंह व जोगिन्दर नगर के विधायक प्रकाश राणा को भाजपा में शामिल करवा कर धूमल खेमे को नया झटका दे दिया है। अब दोनों ही चुनाव क्षेत्रों में टिकट की लड़ाई तेज हो जायेगी। पिछले चुनावों में देहरा में धूमल व अनुराग ठाकुर के खास सिपहसालार पूर्व मंत्री रविंद्र सिंह रवि को हराकर होशियार सिंह ने निर्दलीय चुनाव जीता था। इसी तरह प्रेम कुमार धूमल के समधी और अनुराग ठाकुर के ससुर गुलाब सिंह को निर्दलीय प्रत्याशी प्रकाश राणा के हाथों हार मिली थी। प्रकाश राणा व होशियार सिंह की भाजपा में एंट्री से धूमल खेमे के दोनों नेताओं को अब नई चुनौती मिल गई है। माना जा रहा है कि इस बार दोनों ही नेताओं को चुनावी मैदान से बाहर होना पड़ सकता है। लेकिन इस घटनाक्रम से एक ओर सीएम समर्थकों में जहां उत्साह का माहौल है। वहीं धूमल खेमे में चिंता का माहौल देखने को मिल रहा है।

इससे पहले आने वाले चुनावों में टिकट आवंटन के लिए मापदंड तय करने को लेकर भी सीएम और अनुराग ठाकुर के बीच तकरार शुरू हो चुकी है। एक ओर सीएम जय राम ठाकुर ने आने वाले चुनावों में मौजूदा विधायकों के टिकट काटे जाने की बात कही, तो चल रही चर्चाओं के बीच केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर खुलकर सामने आ गये । केन्द्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने इस मामले पर चल रही बहस को गैर जरूरी करार देते हुये कहा कि यह मामला पार्टी आलाकमान के अधिकार क्षेत्र का है। उन्होंने सीएम जय राम ठाकुर के बयान के विपरीत कहा कि पार्टी टिकट मांगना हर नेता का अधिकार है। और जो नेता चुनाव जीत सकता हो तो पार्टी आलाकमान उसे टिकट दे सकती है।और टिकट का निर्णय पार्टी का आला नेतृत्व ही तय करेगा। उन्होंने कहा कि पार्टी आलाकमान स्थानीय नेतृत्व व संगठन के साथ विचार करके ही टिकट तय करता है। और इसमें प्रत्याशी की लोकप्रियता और चुनाव जीतने की क्षमता का अपना अलग महत्व है। लिहाजा ऐसा जरूरी नहीं है कि टिकट ही काटा जायेगा।

सीएम जय राम ठाकुर की ओर से उठाये कदमों और अनुराग ठाकुर की बयानबाजी के बाद दोनों नेताओं में चल रही कशमकश जाहिर हो गई हे। प्रदेश में 1985 के बाद से चले आ रहे सत्ता विरोधी रुझान को खत्म करने की कोशिश में भाजपा लगी है। सत्तारूढ़ भाजपा इस साल के अंत में होने वाले राज्य चुनावों में बड़ी संख्या में विधायकों को बदलने के मामले पर नई बहस छिड़ गई है। अनुराग ठाकुर व सीएम जय राम ठाकुर के बीच अक्सर कशमकश देखने को मिलती रही है। प्रदेश भाजपा जहां एक ओर चुनावों की तैयारी में जुटी है, वहीं दोनों नेताओं की नजर सीएम की कुर्सी पर है। सीएम जय राम ठाकुर जो कि भाजपा के राष्टरीय अध्यक्ष जे पी नड्डा के करीबी हैं, एक बार फिर से अगले सीएम के तौर पर खुद को पेश करने लगे हैं। लेकिन केन्द्रिय मंत्री अनुराग ठाकुर की चाहत भी सीएम बनने की है। कई मौजूदा विधायक जिन पर टिकट कटने का खतरा मंडरा रहा है। वह अब धूमल गुट से अपने आपको जोडकर अनुराग ठाकुर के साथ कदमताल करते दिखाई दे रहे है।
अब एक बार फिर से नेताओं कीं आपसी कशमकश जाहिर होने से सवाल उठने लगा है कि क्या पार्टी में गुटबाजी खत्म हो पायेगी। हालांकि गुटबाजी को मिटाने के लिये पिछले दिनों से लगातार धर्मशाला से लेकर शिमला और हमीरपुर तक बैठकों का दौर चल रहा है। उसी के तहत पिछले दिनों प्रेम कुमार धूमल को राज्यपाल बनाये जाने की पेशकश रखी गई है। लेकिन लगता यह काम आसान नहीं है। चूंकि एक ओर सीएम जय राम ठाकुर अपने विराकधियों को सबक सिखाने के मूड में हैं, तो दूसरी ओर अनुराग ठाकुर उनके विरोधियों के कंधे पर हाथ रखकर चुनौती दे रहे हैं कि यह काम आसान नहीं है। लेकिन अब अनुराग ठाकुर को ही चुनौती मिल गई है।












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