हिमाचल चुनाव के लिए भाजपा ने बनाई यह रणनीति, सीएम पर लिया फैसला
अब चुनाव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता को आगे रखकर ही लड़े जायेंगे। जेपी नड्डा फिलहाल केन्द्रीय मंत्री बने रहेंगे।
शिमला। हिमाचल प्रदेश में इस साल के अंत तक होने जा रहे विधानसभा चुनावों में भाजपा चुनाव से पहले अपना सीएम प्रत्याशी घोषित नहीं करेगी। अब चुनाव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता को आगे रखकर ही लड़े जायेंगे। जेपी नड्डा फिलहाल केन्द्रीय मंत्री बने रहेंगे। सभी नेताओं को चुनावों में सामूहिक तौर पर काम करना होगा।

प्रदेश के नेताओं के रवैये से आलाकमान नाखुश
दरअसल प्रदेश के नेताओं की राजनैतिक महत्वाकांक्षा व मनमाने रवैये के चलते ही पार्टी ने अपना फैसला अब बदल लिया है। हिमाचल में भी भाजपा उत्तराखंड की नीति पर चलते हुये किसी भी नेता को सीएम उम्मीदवार चुनावों से पहले घोषित नहीं करेगी। न ही जेपी नड्डा को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनाया जायेगा। बताया जा रहा है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हिमाचल से मिल रहे फीडबैक को लेकर खासे नाखुश हैं व सूत्र बताते हैं कि अमित शाह ने इसका नोटिस लेते हुये संदेश दिया है कि सब एकजुट होकर चुनाव मैदान में जुटें।

22 सितंबर को आएंगे अमित शाह
अमित शाह 22 सितंबर को कांगड़ा आ रहे हैं। जिला कांगड़ा में सबसे अधिक 15 चुनाव क्षेत्र हैं। भाजपा कांगड़ा पर अपनी राजनीति फोकस कर रही है। चूंकि पिछले चुनावों में कांगड़ा में पार्टी के ज्यादातर प्रत्याशी चुनाव हार गये थे जिसके चलते इस बार गलती नहीं दोहराना चाहती। अमित शाह का कांगड़ा का इस साल में दूसरा दौरा है। माना जा रहा है कि पार्टी उसी दिन अपने प्रत्याशियों की पहली सूची भी जारी कर देगी। वहीं कोर ग्रुप में चुनावी रणनिति पर मंथन होगा।

किसी नेता को बीजेपी नहीं करेगी प्रोजेक्ट
लेकिन इस सबके बावजूद पार्टी नेताओं में चल रही कशमकश से परेशान पार्टी नेतृत्व ने चुनावों से पहले किसी नेता को प्रोजेक्ट करने से मना कर दिया है। प्रदेश में नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल के अलावा केन्द्रीय मंत्री जे पी नड्डा को सीएम का दावेदार माना जाता रहा है। पार्टी की कोशिश रही है कि उम्र के फॉर्मूले की जद में आ रहे धूमल को केन्द्र में लाया जाये व जेपी नड्डा को प्रदेश की कमान दी जाये लेकिन केन्द्र में जाने से धूमल ने मना कर दिया है। इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री कद्दावर भाजपा नेता शांता कुमार ने भी राज्यपाल बनने का ऑफर ठुकरा दिया था। शांता कुमार इस समय नड्डा के साथ हैं लेकिन पार्टी की सिरदर्दी संगठन मंत्री पवन राणा बन गये हैं। बताया जा रहा है कि आरएसएस के पूर्णकालिक प्रचारक राणा संगठन को चुस्त-दुरूस्त करने के काम से हटकर अपने-आपको सीएम का दोवदार बताने में लगे हैं।

होगा वही जो अमित शाह चाहेंगे!
राणा सर्मथक यह संदेश दे रहे हैं कि हरियाणा के खट्टर की तरह उनके नेता को भी पार्टी सीएम बना सकती है जिससे पार्टी में गफलत पैदा हो रही है। इसी तरह संघ के दूसरे प्रचारक अजय जमवाल को लेकर भी खबरें आ रही हैं कि अंदखाते जमवाल भी जुटे हैं। जमवाल भी संघ के पूर्णकालिक प्रचारक हैं व इस समय नार्थ ईस्ट के प्रभारी हैं। यही वजह है कि पार्टी बढ़ रहे दावेदारों को लेकर चिंतित है। पार्टी ने प्रदेश के नेताओं को बैनर होर्डिंग लगाने के लिये कड़े दिशा निर्देश जारी किये हैं जिसके तहत अब कोई भी अपना प्रचार नहीं कर पायेगा। आलाकमान के तेवरों को देखते हुये अब होगा वही जो अमित शाह चाहेंगे। इससे पहले उत्तराखंड में भी यही समस्या खड़ी हो गई थी लेकिन आखिर में अमित शाह के चहेते त्रिवेंद्र सिंह रावत चुनावों के बाद स्थापित नेताओं की नाराजगी के बावजूद मुख्यमंत्री बन गये थे।

नड्डा पर पीछे हटी भाजपा
हिमाचल प्रदेश में इस साल के अंत तक चुनाव होने हैं लेकिन पार्टी नेतृत्व ने जेपी नड्डा को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनाने का विचार त्याग दिया है। नड्डा को प्रदेश अध्यक्ष बनाये जाने के पीछे उन्हें अगले चुनावों के लिये सीएम का दावेदार के तौर पर पेश करने की रणनिति थी लेकिन अब यह सोच ठंडे बस्ते में चली गई है। नड्डा के आगे उनके धुर विरोधी नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल व उनके बेटे सांसद अनुराग ठाकुर दीवार बनकर खड़े हो गये हैं। चूंकि इस समय ज्यादातर विधायक धूमल सर्मथक हैं। नड्डा ब्राहम्ण हैं लिहाजा पार्टी चुनावों से पहले ताकतवर ठाकुर लॉबी से कोई पंगा नहीं लेना चाहती है। सूत्र बताते हैं कि पार्टी किसी भी प्रकार से विवाद से बचने के लिये ही चुनावों के बाद ही पार्टी के सीएम का फैसला लेगी। पहले कोई बात नहीं होगी।

धूमल की दावेदारी
नड्डा अभी अमित शाह की पहली पंसद बताये जा रहे हैं लेकिन पार्टी को डर है कि यह सब इतनी आसानी से नहीं होगा। नड्डा विरोधी लॉबी चुनावों में नुकसान पहुंचाने का पूरा प्रयास करेगी। लिहाजा अब चुनाव जीतने पर ध्यान देने की बात तय हो गई है। उत्तराखंड में भी अमित शाह पार्टी को मिले भारी बहुमत के बाद स्थापित नेताओं को दरकिनार कर अपना फैसला ले पाये थे। जानकार सूत्र मानते हैं कि अगर हिमाचल में पार्टी को कम सीटें आईं तो उस सूरत में नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल की दावेदारी को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा व सरकार बनाने में धूमल राजनिति को अपनी ओर मोड़ने का प्रयास करेंगे। देखना होगा कि चुनावों में पार्टी क्या करिश्मा दिखाती है। उत्तराखंड की तरह हिमाचल में प्रचंड बहुमत मिला तो नेता का फैसला अमित शाह ही करेंगे अन्यथा धूमल पर ही सारा दारोमदार होगा।












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