हाथरस: बेटी के अंतिम दर्शन के लिए रोती-बिलखती रही मां, फिर भी नहीं पसीजा पुलिसवालों का दिल, देखें वीडियो
हाथरस। हाथरस की जिस बेटी की सलामती के लिए 15 दिनों तक मां-बाप रात दिन प्रार्थना करते रहे। भूखे पेट रातों को जाग-जाग कर बेटी के लिए दुआएं मांगते रहे, वह उस बेटी के अंतिम दर्शन भी नहीं कर पाए। पुलिस ने आधी रात में ही जबरन बेटी का अंतिम संस्कार कर दिया। इस दौरान युवती की मां रोती-बिलखती रही, लेकिन पुलिस-प्रशासन ने उसकी चीखें उसका दर्द नहीं सुना। पीड़िता की मां का सड़क पर बैठकर बेटी के अंतिम दर्शन के लिए बिलखने के लिए वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में एक मां अपनी बेटी के अंतिम दर्शन के लिए बिलख रही है।
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हाथरस में 14 सितंबर को चार युवकों ने किया था युवती से गैंगरेप
हाथरस में 19 वर्षीय दलित युवती से 14 सिंतबर को गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया गया था। पीड़िता को हाथरस के बाद इलाज के लिए अलीगढ़ के मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। 28 सितंबर को हालत नाजुक होने पर पीड़िता को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर किया गया था। 29 सिंतबर की सुबह पीड़िता ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। इस मामले में पुलिस सभी चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। बताया गया था कि दरिंदगी के बाद युवती की जीभ काट दी गई थी और रीढ़ की हड्डी भी तोड़ दी गई थी। हालांकि, अलीगढ़ पुलिस और हाथरस प्रशासन का कहना है कि मेडिकल जांच में रेप की पुष्टि नहीं हुई है और ना ही पीड़िता की जीभ काटी गई थी।

पुलिस पर जबरन अंतिम संस्कार कराने का आरोप
पुलिस ने मंगलवार की देर रात 2:40 बजे बिना किसी रीति रिवाज के पीड़िता के शव का अंतिम संस्कार करवा दिया। इस दौरान पीड़िता की मां पुलिस के आगे बिलखती रही और गिड़गिड़ाती रही कि वो बेटी को अपनी देहरी से हल्दी लगाकार विदा करेगी। घरवाले गुहार लगाते रहे, वो भीख मांगते रहे कि 15 मिनट के लिए बेटी के आखिरी दर्शन कर लेने दिए जाएं, लेकिन परिवार वालों की एक न सुनी गई और जबरन पीड़िता के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। मुखाग्नि भी पुलिस वालों ने ही दी। पीड़िता के भाई ने आरोप लगाया कि जब उन लोगों ने बेटी का संस्कार करने से इनकार कर दिया तो पुलिस गुस्से में हो गई। पुलिस ने उन लोगों को धमकी दी, उनके घरवालों के साथ धक्का-मुक्की भी की गई। कुछ लोगों को घर में बंद कर दिया गया तो कुछ डरकर अपने घरों में बंद हो गए।

एसआईटी कर रही मामले की जांच
यूपी की योगी सरकार ने इस पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है। एसआईटी की यह टीम सात दिन के अंदर रिपोर्ट सौंपेगी। बता दें, एसआईटी में दलित और महिला अधिकारी भी शामिल हैं। गृह सचिव भगवान स्वरूप, डीआईजी चंद्र प्रकाश और सेनानायक पीएसी आगरा पूनम एसआईटी के सदस्य होंगे। सीएम योगी ने पूरे मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में लाने के निर्देश भी दिए है।












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