हरियाणा: किसान आंदोलन के बीच क्यों सुर्खियों में है ऐलनाबाद उपचुनाव, जानिए यहां का पूरा सियासी गणित
हरियाणा में चुनाव से ज़्यादा उपचुनाव दिलचस्प होता है। बरोदा उपचुनाव के बाद एक बार फिर ऐलनाबाद में सियासी जंग का ऐलान हो चुका है।
चंडीगढ़, अक्टुबर 4, 2021। हरियाणा में चुनाव से ज़्यादा उपचुनाव दिलचस्प होता है। बरोदा उपचुनाव के बाद एक बार फिर ऐलनाबाद में सियासी जंग का ऐलान हो चुका है। चुनाव आयोग ने नोटिफिकेशन जारी कर 30 अक्टुबर को ऐलनाबाद में मतदान का ऐलान किया है। 2 नवंबर को नतीजे घोषित किए जाएंगे वहीं किसान आंदोलन के दौरान होने वाले इस उपचुनाव में सत्ता पक्ष की इज्जत दांव पर लगी हुई है। सियासी गलियारों में यह हलचल है कि यह उपचुनाव दोनों पार्टियों के लिए अग्नि परीक्षा से कम नहीं है। सरकार ऐसे वक़्त में उपचुनाव कराने जा रही है, जब किसान बीजेपी-जेजीपी नेताओं को गांव में घुसने के नहीं दिया जा रहा है। साथ ही वह अपने सियासी कार्यक्रम तक नहीं कर पा रहे हैं।

अभया चौटाला ने दिया था इस्तीफ़ा
सिरसा जिले की ऐलनाबाद विधानसभा सीट इनेलो के विधायक अभय सिंह चौटाला के इस्तीफ़े की वजह से खाली हुई थी। ग़ौरतलब है कि अभय सिंह चौटाला ने तीन कृषि कानूनों के ख़िलाफ़ में ऐलनाबाद सीट से इस्तीफा दिया था। इनेलो से हरियाणा विधानसभा में सिर्फ़ एक वो ही विधायक थे। आपको बता दें कि अभय सिंह चौटाला ने साल 2019 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के पवन बेनीवाल को हराया था, हालांकि पवन बेनीवाल अब भारतीय जनता पार्टी का दामन छोड़ कर कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। अभी हरियाणा में बीजेपी और जेजेपी गठबंधन में है। ऐलनाबाद विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशी और बीजेपी-जेजेपी गठबंधन प्रत्याशियों के नाम पर संशय बरकरार है।

ऐलनाबाद का सियासी इतिहास
ऐलनाबाद हॉट सीट क्यों है यह जानने के लिए आपको ऐलनाबाद के इतिहास से रूबरू होना ज़रूरी है। आइए जानते हैं ऐलनाबाद का सियासी इतिहास। आज की तारीक तक ऐलनाबाद विधानसभा सीट पर दो बार उपचुनाव हो चुका हैं। वहीं 1967 से 2019 तक 15 बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, जिसमें 13 बार सामान्य और 2 बार उपचुनाव शामिल है। गौर करने वाली बात है कि दोनों बार उपचुनाव में इनेलो प्रत्याशी ने ही ऐलनाबाद विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की। जिन्होंने दोना बार उपचुनाव में जीत दर्ज की उस प्रत्याशी का नाम अभय चौटाला है। आपको बता दें कि सबसे ज़्यादा बार जो यहां से विधायाक रहे उनका नाम भागी राम थे और वह इनेलो की टिकट पर 5 बार जीते थे। 1977 में भागीराम ने निर्दलीय उम्मीदवार को चुनाव हराया था।

जीत की हैट्रिक लगा चुके हैं अभय
ऐलनाबाद विधानसभा सीट साल 1977 में आरक्षित हो गई थी और उसके बाद 2005 तक ऐलनाबाद विधानसभा आरक्षित ही रही। आपको बता दें कि ओमप्रकाश चौटाला ने यहां से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की उसके बाद 2010 में हुए उपचुनाव में अभय सिंह चौटाला ने जीत दर्ज की। अभय सिंह चौटाला ऐलनाबाद से 2009, 2014, 2019 में जीत की हैट्रिक लगा चुके है। वहीं बीजेपी के पवन बेनीवाल दूसरे नंबर पर रहे थे हालांकि पवन बेनीवाल अब कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। आपको बता दें कि ऐलनाबाद सीट पर 30 अक्टूबर को उपचुनाव होगा और 2 नवंबर को नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे। ऐलनाबाद विधानसभा उपचुनाव में इस बार भी इनेलो उम्मीदवार अभय सिंह चौटाला ही होंगे।

इनेलो से अभय चौटाला उम्मीदवार
चौपटा में आयोजित महापंचायत में इसका फैसला लिया गया। पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला की मौजूदगी में आयोजित महापंचायत में इनेलो नेताओं ने जनता से पूछा कि उम्मीदवार किसे बनाया जाए। सभी लोगों ने अभय सिंह चौटाला के नाम पर सहमती जताई। अभय सिंह चौटाला ने कहा कि इस्तीफा देने से पहले भी हमने जनता के बीच जाकर पूछा था और अब मैदान में आने से पहले भी आपसे पूछ रहे हैं। इसके बाद जनता ने उम्मीदवारी के लिए अभय सिंह चौटाला के नाम पर मुहर लगाई। इनेलो प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में ओम प्रकाश चौटाला ने अपने संबोधन में कहा कि चुनाव निश्चित रूप से आपकी पार्टी का प्रत्याशी जीतेगा। इनेलो प्रत्याशी के आगे सभी पार्टियों के उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो जाएगी।

सुर्खियों में है ऐलनाबाद उपचुनाव
अभय सिंह चौटाला ने कहा कि कांग्रेस के पास ऐलनाबाद उपचुनाव में उतारने के लिए उम्मीदवार तक नहीं है। दूसरी पार्टियों के नेता बैठक करने तक ही सीमित है। भाजपा के पास मैदान में उतारने के लिए उम्मीदवार तक नहीं है जबकि प्रभारी और सह प्रभारी पहले ही नियुक्त कर दिए गए हैं। उम्मीदवारों के बिना ही प्रभारियों की नियुक्ति की जा रही है। जजपा के पास अपना न तो झंडा और ना ही डंडा इसके बाद भी वह बैठक कर रहे हैं। आपको 4 साल का इंतजार न करना पड़े इसके लिए आपके पास चुनाव जीतने का यह बड़ा मौका है। अगर आपकी पार्टी का प्रत्याशी जीतेगा तो सत्ता में खलबली मच जाएगी। गठबंधन टूट जाएगा, सरकार अस्थिर हो जाएगी। ऐलनाबाद चुनाव नतीजों का असर पूरे देश में पड़ेगा। निश्चित रूप से परिस्थिति बदलेगी।
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