सिंघु बॉर्डर मर्डर केस: 6 दिन की रिमांड पर भेजे गए तीनों आरोपी
नई दिल्ली, 17 अक्टूबर: सिंघु बॉर्डर पर दलित युवक की हत्या की गुत्थी सुलझ गई है। जिसमें तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर सोनीपत कोर्ट में पेश किया गया। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि 15 अक्टूबर को जहां पर किसानों का विरोध प्रदर्शन चल रहा था, वहां पर एक व्यक्ति का हाथ और पैर कटा शव मिला। जिसमें नारायण सिंह, भगवंत सिंह और गोविंद प्रीत सिंह को गिरफ्तार किया गया है। जिस पर कोर्ट ने तीनों आरोपियों को 6 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया।

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इस हत्या की जिम्मेदारी निहंग समूह निर्वेर खालसा उड़ना दल ने ली है। हाल ही में इस दल के पंथ अकाली बलविंदर सिंह ने बताया था कि मृतक ने उनके धार्मिक ग्रंथ की बेअदबी की। अगर कोई फिर से ऐसा करेगा तो उसके साथ भी इसी तरह का व्यवहार किया जाएगा। उसने आगे बताया कि शख्स को तीन बजे मारा गया। वो किसी भी पुलिस-प्रशासन के संपर्क में नहीं हैं। उनके मुताबिक दलित युवक कुछ दिनों पहले सिंघु बॉर्डर पर आया था। पहले तो उसने शिविर में सेवा की और फिर सबका विश्वास जीता। बाद में उनसे पवित्र ग्रंथ को ढकने के लिए रखे गए कपड़े को हटाया और उसका अपमान किया।
किसान मोर्चा ने कही ये बात
वहीं घटना के बाद से किसान आंदोलन पर सवाल उठने लगे हैं। घटना के बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि जिस निहंग समूह ने हत्या की है, उससे उनका और आंदोलन का कोई लेना-देना नहीं है। वो किसी भी सूरत में कानून को हाथ में लेने वालों का समर्थन नहीं करते हैं। इसके बाद किसान नेता बलदेव सिंह सिरसा ने कहा कि उनको नहीं पता आरोपी कैसे आया। उसकी पूरी जांच की जानी चाहिए कि वो कब और कहां से आया। साथ ही कितने दिन उसने वहां पर बिताए।
राकेश टिकैत ने कही ये बात
हर बार की तरह इस बार भी राकेश टिकैत ने इस घटना का पूरा ठिकरा सरकार पर फोड़ दिया। उन्होंने कहा कि ये घटना आंदोलन को बदनाम करने की साजिश है। इसके लिए करोड़ों रुपये दिए गए हैं। सिंघु बॉर्डर पर जो हुआ वो सब सरकार के उकसावे की वजह से हुआ है।












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