OPINION: निराश्रित बच्चों की सहायता के लिए साथ खड़ी है हरियाणा सरकार
हरियाणा सरकार निराश्रित बच्चों का अभिभावक बनकर उनकी मदद कर रही है। यही कारण है कि सरकार की ओर से इनकी सहायता के लिए जो योजना चल रही है, उसके लाभार्थियों की संख्या काफी बढ़ गई है।

हरियाणा सरकार निराश्रित या बेसहारा बच्चों की मदद के लिए उनका अभिभावक बनकर उनका साथ दे रही है। मनोहर लाल खट्टर सरकार न सिर्फ उनका मासिक भत्ता बढ़ाया है, बल्कि उसकी कोशिश है कि ऐसा कोई भी जरूरतमंद बच्चा सरकारी सहायता के लाभ से वंचित न रह जाए। इसी का परिणाम है कि प्रदेश में लाभार्थी निराश्रित बच्चों की संख्या में भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है।

लाभार्थियों की संख्या में भारी बढ़ोतरी
वित्त वर्ष 2022-23 में बेसहारा बच्चा वित्तीय सहायता योजना के तहत हरियाणा में 1,58,309 बच्चे लाभांवित हुए थे। जबकि, 28 मई, 2023 के सुबह 8 बजे तक ऐसे लाभार्थी बच्चों की संख्या बढ़कर 2,04,645 हो चुकी है। हरियाणा सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक राज्य सरकार की ओर से दी जाने वाली सभी पेंशन योजनाओं का यह 6.57% है।

1 अप्रैल, 2023 से मासिक 1,850 रुपए मिल रहे हैं
पिछले वित्त वर्ष तक इस योजना के लाभार्थी निराश्रित बच्चों को हरियाणा सरकार सिर्फ 1,600 रुपए की मासिक वित्तीय सहायता देती थी। लेकिन, मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर सरकार ने 1 अप्रैल, 2023 से इस सहायता राशि में भी 250 रुपए का इजाफा कर दिया है। अब हरियाणा की ओर से बेसहारा बच्चों को हर महीने 1,850 रुपए की वित्तीय मदद दी जा रही है।

किन बच्चों को मिलती है यह सहायता
इस योजना का लाभ 21 साल की उम्र तक दिए जाने का प्रावधान है। यह योजना उन बच्चों के लिए हैं, जो किसी वजह से पिता के आश्रय या उनकी देखभाल से वंचित रह गए हैं। जैसे कि उनकी मौत हो चुकी हो या उनकी मानसिक/शारीरिक स्थिति ऐसी न हो कि वह अपने बच्चों की देखभाल कर सकें। या पिता लगातार 2 साल से घर से अनुपस्थित हो या माता/पिता कम से कम एक साल की सजा काट रहे हों।

पात्रता के लिए ये भी है आवश्यकता
बेसहारा बच्चा वित्तीय सहायता योजना का लाभ एक परिवार के अधिकतम दो बच्चों को ही दिया जा सकता है। इसके साथ ही यह भी तय किया गया है कि निराश्रित बच्चों के माता-पिता या अभिभावक की सालाना आय 2,00,000 रुपए से अधिक न हो। इन शर्तों को पूरा करने वाले बच्चे ही इस योजना के लाभ के लिए पात्र हो सकते है।
जैसे ही इस योजना के लाभार्थी 21 साल के हो जाते हैं तो वह हरियाणा सरकार की अन्य योजनाओं का लाभ उठा सकते हैं, लेकिन यह वित्तीय सहायता उन्हें दिए जाने का प्रावधान नहीं है। इस तरह से जबतक ऐसे बच्चे अपने पैरों पर खड़े होने लायक नहीं हो जाते, सरकार उनके साथ उनका अभिभावक बनकर रहती है।












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