Nuh Violence: हिंसा में 2 होमगार्ड जवानों ने गंवाई जान, परिवार बोला- फोन पर बात हुई थी बोला कि....
Haryana Nuh Violence: हरियाणा के मेवात इलाके के नूंह में सोमवार (31 जुलाई ) को विश्व हिंदू परिषद की पदयात्रा में पथराव के बाद भड़की सांप्रदायिक हिंसा में दो होमगार्ड समेत 6 लोगों की मौत हो गई।
नूंह हिंसा में जान गंवाने वाले होमगार्ड जवानों का नाम नीरज और गुरसेव सिंह की जान चली गई। घटना इतनी भयनाक थी कि पूरे इलाके में 6 घंटे तक भीड़ का तांड़व देखा गया। सैकड़ों गाड़ियों को फूंक दिया। 100 से ज्यादा लोग घायल हुए है।

होमगार्ड नीरज ने हिंसा में गंवाई जान
हिंसा की भेंट चढ़े 37 वर्षीय होमगार्ड नीरज का परिवार गुरुग्राम के गढ़ी बाजिदपुर में रहता है। सोमवार को नीरज ने अपने परिवार को बताया कि वह सांप्रदायिक तनाव के कारण नूंह जा रहा है। शाम को परिवार को सूचना दी गई कि उसका एक्सीडेंट हो गया है। लेकिन उन्हें यह समझने में देर नहीं लगी कि कुछ अनहोनी हो गई है।
शाम 5 बजे के आसपास मिली बुरी खबर
इंडियन एक्सप्रेस के बात करते हुए नीरज के बहनोई ने बताया कि हम कल्पना नहीं कर सकते थे कि 'दुर्घटना' इतनी गंभीर होगी। शाम 5 बजे के आसपास हमें पता चला कि नीरज की मृत्यु हो गई है। जानकारी के अनुसार नीरज के दो बच्चे हैं, एक सात साल का बेटा और एक पांच साल की बेटी। उसकी पत्नी गृहणी है वह दो भाइयों, उनके परिवारों और अपने पिता के साथ एक संयुक्त परिवार में रहते थे।
नीरज का पूरा परिवार डिफेंस और होमगार्ड की पृष्ठभूमि से आता है। नीरज के पिता ने भावुक होते हुए कहा कि मैंने देश के लिए सेवा की, मैंने करगिल में लड़ाई लड़ी है, मुझे गर्व है कि मेरा बेटा कर्तव्य निभाते हुए शहीद हो गया।
सैनिकों के परिवार का बेटा था नीरज
नीरज के बहनोई सलीम के मुताबिक सैनिकों के परिवार से आने वाले नीरज के लिए होम गार्ड में शामिल होना चरित्र से बाहर नहीं था। उनके पिता सशस्त्र बलों में थे, उनके दादा भी डिफेंस में काम करते थे। उन्हें हमेशा अपनी नौकरी से प्यार था और वह 15 सालों से काम कर रहे थे। नीरज की पत्नी वकीला गमगीन हैं और बच्चों को भी नहीं पता कि क्या हो रहा है।
होम गार्ड गुरसेव सिंह का परिवार भी बिखरा
वहीं एक और जान गंवाने वाले 33 वर्षीय होम गार्ड गुरसेव सिंह के परिवार पर भी दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनके परिवार ने कहा कि उन्हें पता था कि क्षेत्र में हिंसा फैल रही है, लेकिन उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि उनका बेटा इसका शिकार हो जाएगा। गुरसेव के भतीजे इंजी सिंह ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, "गुरसेव के पिता सैसी सिंह ने सोमवार को दोपहर करीब 3 बजे उनसे बात की... गुरसेव ने हमें स्थिति की गंभीरता के बारे में कभी नहीं बताया।"
पीछे छूटे बेटी और बेटा
गुरसेव के परिवार में यूपी के फतेहपुर स्थित गांव में उनके माता-पिता के अलावा उनकी पत्नी, छह साल की बेटी और एक चार साल का बेटा है। उन्होंने 24 जुलाई से फतेहाबाद में होमगार्ड के रूप में काम करना शुरू किया, इससे पहले वह एक साल के लिए दोहाना में तैनात थे।
भतीजे ने कहा, "वह परिवार में अकेले कमाने वाले थे और जो भी कमाते थे उसका आधा हिस्सा अपने गांव भेज देते थे...हमने अब तक उनके बच्चों को घटना के बारे में नहीं बताया है..." इंजी ने बताया कि गुरसेव को मंगलवार को अपने गांव वापस जाना था। उनकी पत्नी और बच्चे उनकी वापसी का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।"












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