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Kangana Ranaut: 'कृषि कानूनों की हो वापसी', कंगना के बयान कहीं न बिगाड़ दें हरियाणा में BJP का खेल!

Kangana Ranaut News Hindi: बॉलीवुड से राजनीति का सफर तय करने वाली एक्ट्रेस कंगना रनौत एक बार फिर अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में उन्होंने कृषि कानूनों को वापस लाने की मांग की, जिससे हरियाणा विधानसभा में चुनावी (Haryana Assembly Chunav 2024) माहौल में हलचल मच गई है।

हरियाणा, जहां किसान मतदाता किसी भी पार्टी के भविष्य को तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं, वहां कंगना का यह बयान बीजेपी के लिए चुनौती बन सकता है।

Kangana Ranaut Demands Farm Laws Rolled back

कंगना रनौत का बयान और कृषि कानूनों की वापसी की मांग
कंगना रनौत, जो हिमाचल प्रदेश के मंडी से बीजेपी सांसद हैं, ने हाल ही में दिए एक बयान में कहा कि किसानों के हित में निरस्त कृषि कानूनों को वापस लाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "किसान भारत के स्तंभ हैं और उन्हें अपनी समृद्धि के लिए कृषि कानूनों की मांग करनी चाहिए। केवल कुछ ही राज्यों ने कृषि कानूनों पर आपत्ति जताई थी, लेकिन यह कानून किसानों के फायदे के लिए थे।"

कंगना का यह बयान ऐसे समय आया है, जब हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 (Haryana Assembly Chunav 2024) नजदीक हैं। इस बयान से कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को बीजेपी पर हमला करने का मौका मिल गया। कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि अगर बीजेपी कंगना के बयान का समर्थन नहीं करती है, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कंगना को राजनीति से दूर रहकर अपने बॉलीवुड करियर पर ध्यान देना चाहिए।

बीजेपी का कंगना के बयान से किनारा
कंगना के इस बयान से बीजेपी ने तुरंत दूरी बना ली। पार्टी के प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि यह कंगना का निजी बयान है और पार्टी इससे सहमत नहीं है। उन्होंने कहा कि कंगना को ऐसा बयान देने के लिए अधिकृत नहीं किया गया है और बीजेपी इस बयान की निंदा करती है।

भाटिया ने यह भी साफ किया कि कंगना का बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, लेकिन यह बीजेपी की आधिकारिक स्थिति नहीं है। उन्होंने कहा कि बीजेपी किसानों के हितों के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रही है, लेकिन यह बयान उनका व्यक्तिगत है।"

हरियाणा चुनाव में किसान मतदाताओं का महत्व
हरियाणा में किसानों का चुनावी महत्व किसी से छिपा नहीं है। राज्य में विधानसभा की 90 सीटों के लिए 5 अक्टूबर को मतदान होने हैं और किसानों का वोट किसी भी पार्टी की जीत-हार तय कर सकता है। किसान, जो पहले भी कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर चुके हैं, इस बार भी बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं।

हाल ही में, कुरुक्षेत्र में किसानों की महापंचायत हुई थी, जिसमें किसानों ने राज्य में बीजेपी को सबक सिखाने और 3 अक्टूबर को पूरे देश में रेल ट्रैक जाम करने की चेतावनी दी थी। किसानों का कहना है कि मौजूदा सरकार ने उनके साथ अन्याय किया है और वे बेरोजगारी और महंगाई के मुद्दों पर भी सरकार को घेर रहे हैं।

बीजेपी की रणनीति और आगामी चुनाव
हरियाणा में बीजेपी लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रही है। हालांकि, पिछले लोकसभा चुनाव 2019 में पार्टी को राज्य की 10 सीटों में से केवल 5 पर जीत मिली थी। जानकारों का मानना है कि किसानों की नाराजगी के चलते बीजेपी को नुकसान उठाना पड़ा था। पार्टी अब इस गलती को दोहराना नहीं चाहती।

बीजेपी ने किसानों को अपनी तरफ लाने के लिए एक व्यापक योजना बनाई है। पार्टी के बड़े नेता बड़ी-बड़ी रैलियों के जरिए किसानों को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके साथ ही, बीजेपी कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर किसानों को केंद्र और राज्य सरकार द्वारा किए गए विकास कार्यों के बारे में जानकारी दे रहे हैं।

कंगना रनौत के विवादित बयान और पार्टी की मुश्किलें

कंगना रनौत पहले भी कई बार अपने बयानों से पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर चुकी हैं। उन्होंने किसानों के प्रदर्शन पर कहा था कि बाहरी ताकतें भारत में अराजकता फैलाने की कोशिश कर रही थीं और अगर हमारे नेतृत्व की दूरदर्शिता न होती तो वे सफल हो जाते। इसके अलावा, कंगना जातीय जनगणना और आरक्षण जैसे मुद्दों पर भी विवादित बयान दे चुकी हैं।

कंगना का यह भी कहना था कि अगर भारत को विकसित करना है, तो गरीब, किसान और महिलाओं की बात होनी चाहिए। लेकिन अगर देश में नफरत फैलाना है, तो जातीय जनगणना होनी चाहिए। उनके इस बयान पर भी काफी विवाद हुआ था।

जेपी नड्डा ने कई बार खींची थी लगाम!
आपको बता दें कि कंगना के लगातार विवादित बयानों को लेकर बीजेपी कई बार उनको दिल्ली बुला चुकी है। पिछली बार, 29 अगस्त को एक ही सप्ताह में दूसरी बार कंगना से जेपी नड्डा ने मुलाकात की थी। यह मुलाकात भले आधे घंटे की थी, लेकिन पूरे दिन सियासी बाजार गर्म रहा। इस दौरान उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए गए कि अगर उन्हें बात करनी है तो अपने संसदीय क्षेत्र के बारे में करें, नीतिगत मुद्दों पर नहीं। पार्टी ने कहा कि नीतिगत मामलों पर निर्णय शीर्ष नेतृत्व द्वारा लिया जाता है और कंगना को इन मामलों पर बोलने का अधिकार नहीं है।

कंगना रनौत का हालिया बयान हरियाणा चुनाव 2024 में बीजेपी के लिए नई चुनौती बन सकता है, खासकर तब, जब राज्य के किसान मतदाता बीजेपी के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। हालांकि, बीजेपी ने कंगना के बयान से दूरी बना ली है, लेकिन इसका असर चुनावी परिणामों पर पड़ सकता है। पार्टी को अब किसानों के समर्थन को वापस पाने के लिए पूरी ताकत झोंकनी होगी।

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