यूक्रेन में फंसी पाकिस्तानी लड़की को भारतीय लड़के ने साथ लेकर बचाया, बोले- 5KM भूखे प्यासे चले थे पैदल
चंडीगढ़। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच वहां फंसे हजारों भारतीयों को 'ऑपरेशन गंगा' के जरिए भारत सरकार निकाल चुकी है। हालांकि, कुछ भारतीय अभी भी यूक्रेन के विभिन्न क्षेत्रों में फंसे हुए हैं। जिन्हें निकालने के लिए विमान भेजे गए हैं। भारतीय अधिकारी अब भारतीयों के अलावा पड़ोसी देशों के छात्र-छात्राओं को निकालने में भी मदद कर रहे हैं। आज एक पाकिस्तानी लड़की जो कि यूक्रेन में फंसी हुई थी और भारतीय एंबेसी की मदद से सकुशल लौटी, उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुक्रिया अदा किया है। इसी तरह एक और छात्रा को भारतीय छात्र ने अपने साथ लेकर, मुसीबतों से बचाया था।

मुसीबतों को मात देकर स्वदेश वापसी
हरियाणा के रहने वाले अंकित यादव ने बताया कि, "पिछले दिनों हम सकुशल स्वदेश लौट आए।मगर..यहां तक पहुंचने के लिए बहुत मुश्किलें झेलीं। उन्होंने बताया कि, यूक्रेन में जहां मैं था, वहां 25 फरवरी को रात करीब 2:30 बजे इंस्टीट्यूट से कुछ दूर ब्लास्ट हुआ था। उसके बाद लगभग 80 स्टूडेंट्स को बंकर में भेज दिया गया। उन स्टूडेंट्स मैं अकेला भारतीय था। और, एक पाकिस्तानी लड़की भी थी। उसका नाम मारिया था। हालत ऐसे थे कि, वो बेहद डरी हुई थी। वहां, आसपास लगातार ब्लास्ट होने पर मैंने वहां से निकलने का फैसला किया। उसने मुझे अपने जैसा समझा, क्योंकि बोलचाल हिंदी की थी। मेरे वहां से चलने पर उसने भी साथ चलने की गुजारिश की। वहां से फोन पर उसके परिवार से बातचीत हुई..उसने अपने घरवालों को कहा कि, मैं भारतीय लड़के के साथ हूं।"

पाकिस्तानी लड़की को बचाया
बकौल अंकित, "हम दोनों 28 फरवरी को यूक्रेन की राजधानी कीव के बुगजाला रेलवे स्टेशन के लिए पैदल निकले थे। 2 दिन से कुछ खाया नहीं था। मारिया चल नहीं पा रही थी। वो खिचरने लगी, तब मैंने उसका अपने हाथों में सामान लिया और फायरिंग से बचते-बचाते 5 किमी पैदल चले। हम एक स्टेशन पहुंचे, जहां बहुत भीड़ थी। हमसे तीन ट्रेनें मिस हो गई थीं। उसी दिन शाम 6 बजे धक्का-मुक्की के बीच हम एक ट्रेन में चढ़े। एक घंटे के सफर के बाद ट्रैक के किनारे जबरदस्त ब्लास्ट हुआ।एक गोली खिड़की से होती हुई मेरे सिर के ऊपर से निकली। ट्रेन में जो लोग सवार थे, वे सब सांस रोककर नीचे लेट गए। अंतत: 1 मार्च काे ट्रेन टर्नोपिल स्टेशन पहुंची। वहां मारिया का संपर्क पाकिस्तानी दूतावास के अफसरों से हुआ।"

पाकिस्तानियों ने की तारीफ
"हम दोनों फिर टर्नोपिल मेडिकल यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में ठहरे। जहां कॉफी, ब्रेड, सूप का सेवन किया। दूतावास पर पाकिस्तानियों ने भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि, एक भारतीय लड़का अंकित हमारी बच्ची को बचाते हुए हमारे पास लाया और हमारी बच्ची बच गई। बेटा! आपका शुक्रिया.. यह समय दोनों देशों के लोगों के लिए एक-दूसरे की टांग खींचने का नहीं, बल्कि प्यार और सपोर्ट करने का है। हमारे बच्चे हमारी नफरत से ज्यादा जरूरी हैं।"
अंकित ने बताया कि, "बाद में हमारा भारतीय दूतावास से संपर्क हुआ और वापसी सुनिश्चित हुई।"












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