IAS Pari Bishnoi: आईएएस परी बिश्नोई ने इस विधायक के साथ की सगाई, तस्वीरें आईं सामने
IAS Pari Bishnoi Photos: विधायक भव्य बिश्नोई और आईएएस परी बिश्नोई ने सगाई कर ली है। ये कार्यक्रम बीकानेर के मुकाम गांव में आयोजित किया गया था।

IAS Pari Bishnoi Engagement Photos: हरियाणा के बीजेपी विधायक भव्य बिश्नोई ने सगाई कर ली। उनकी होने वाली पत्नी आईएएस अधिकारी हैं। राजस्थान के बीकानेर में हुए कार्यक्रम में बिश्नोई परिवार के करीबी लोग शामिल हुए। जल्द ही दोनों शादी के बंधन में भी बंध जाएंगे।
भव्य हरियाणा के आदमपुर विधानसभा सीट से विधायक हैं, जबकि उनकी होने वाली पत्नी परी बिश्नोई आईएएस अधिकारी हैं। वो अभी सिक्किम में तैनात हैं। वो उन अफसर्स में से एक हैं, जिनकी सोशल मीडिया पर खूब चर्चा होती है।
राजस्थान के बीकानेर जिले में स्थित मुकाम गांव में सगाई का कार्यक्रम रखा गया था, जिसमें हरियाणा के कई नेता पहुंचे। इसके अलावा कई धार्मिक शख्सियतें भी कार्यक्रम में मौजूद रहीं। जिन्होंने दोनों को आशीर्वाद दिया।
बाबा थे पूर्व मुख्यमंत्री
आपको बता दें कि भव्य बिश्नोई हरियाणा के कद्दावर नेता और पूर्व सांसद कुलदीप बिश्नोई के बेटे हैं। उनके बाबा हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल हैं। कार्यक्रम में कुलदीप के बड़े भाई और पूर्व डिप्टी सीएम चंद्रमोहन बिश्नोई, फतेहाबाद विधायक दूड़ाराम बिश्नोई आदि मौजूद रहे।
कुलदीप की मां जसमा देवी और पत्नी रेणुका बिश्नोई ने कार्यक्रम में सभी रीति-रिवाजों को पूरा किया। इसके बाद उन्होंने अपनी होने वाली बहू परी के साथ ढोल की थाप पर डांस किया।

भव्य पिछले साल अपने परिवार के गढ़ आदमपुर से बीजेपी के टिकट पर विधायक चुने गए थे। उनके पिता कुलदीप बिश्नोई ने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया था, इस वजह से ये सीट खाली हो गई थी। कुलदीप ने 2019 में बतौर कांग्रेस प्रत्याशी इसी सीट से जीत हासिल की थी।
2020 बैच की हैं परी
आपको बता दें कि परी बिश्नोई 2020 की आईएएस अधिकारी हैं। वो राजस्थान की रहने वाली हैं। उन्होंने अजमेर से अपनी प्रारंभिक शिक्षा हासिल की थी। इसके बाद उन्होंने दिल्ली के इंद्रप्रस्थ कॉलेज फॉर वुमेन में एडमिशन लिया। बाद में उन्होंने अजमेर की MDS यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन किया। आईएएस बनने के बाद उनको सिक्किम कैडर मिला।

मुकाम गांव को क्यों चुना?
मुकाम गांव में मुकाम मुक्ति धाम मंदिर स्थित है। ये मंदिर बिश्नोई समुदाय का सबसे पवित्र धार्मिक स्थल है। इस वजह से दोनों परिवारों ने इस जगह को चुना।












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